उत्तराखंड एसआईआर अपडेट: 95 हजार वोटर्स घोषित हुए 'इन-एलिजिबल', ऑटो-डिलीट की आहट से गरमाई राज्य की राजनीति
देहरादून। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के अंतिम चरण में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। प्रदेश में करीब 95 हजार से अधिक मतदाताओं को ईआरओ/एईआरओ द्वारा ‘इन-एलिजिबल’ (अपात्र) श्रेणी में चिन्हित किए जाने के बाद इन नामों के ऑटो-डिलीट होने का खतरा मंडरा रहा है। इस मामले के सामने आते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से बयानबाजी तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग 28 सितंबर को दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 3 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन करेगा।
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतिम चरण में मतदाता सूची को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। दावे और आपत्तियों की सुनवाई के बीच करीब 95 हजार मतदाताओं को ‘इनएलिजिबल’ मार्क किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन मतदाताओं के संबंध में सिस्टम से फॉर्म-7 ऑटो जनरेट होकर नाम हटाने की प्रक्रिया के लिए मार्क किए गए हैं। हालांकि, 28 सितंबर को दावे एवं आपत्तियों के अंतिम निस्तारण के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और 3 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के जरिए करीब 1.73 लाख आवेदन मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को प्राप्त हुए। इनमें से करीब 95 हजार मतदाताओं को सुनवाई और दस्तावेज उपलब्ध न कराने जैसी स्थितियों के आधार पर ‘इनएलिजिबल’ श्रेणी में रखा गया है। इस आंकड़े के सामने आने के बाद विपक्ष ने निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि निर्वाचन विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास के मुताबिक, 14 जुलाई को SIR के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया था। इसके बाद फॉर्म-7 के जरिए करीब 1.73 लाख मतदाताओं के नाम हटाने संबंधी आवेदन प्राप्त हुए। इनमें करीब 95 हजार ऐसे मतदाता हैं, जिन्हें ‘इनएलिजिबल’ मार्क किया गया है। उन्होंने बताया कि एसआईआर के पहले और दूसरे चरण में करीब 24.30 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे। इनमें ऐसे मतदाता शामिल थे, जिनकी जानकारी में त्रुटियां थीं या प्री- एसआईआर के दौरान उनकी मैपिंग नहीं हो पाई थी। नोटिस मिलने के बाद जिन मतदाताओं ने जवाब नहीं दिया, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए अथवा सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं हुए, उन्हें संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की प्रक्रिया के तहत ‘इनएलिजिबल’ मार्क किया गया। मस्तू दास के अनुसार, किसी मतदाता को ‘इनएलिजिबल’ मार्क किए जाने के बाद सिस्टम के माध्यम से फॉर्म-7 ऑटो जनरेट हो जाता है। हालांकि, 28 सितंबर को दावे एवं आपत्तियों के अंतिम निस्तारण के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में कितने नाम मतदाता सूची से हटाए जाते हैं। निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद भी मतदाताओं के लिए नाम जोड़ने का रास्ता खुला रहेगा। 3 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद जिन लोगों का नाम सूची में नहीं होगा, वे फॉर्म-6 भरकर नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे। निर्वाचन विभाग के अनुसार, 1 जुलाई 2026 को क्वालीफाइंग डेट के आधार पर अंतिम सूची प्रकाशित होगी। इसके बाद पात्र नए मतदाताओं के साथ ऐसे लोगों के लिए भी आवेदन की प्रक्रिया जारी रहेगी, जिनका नाम किसी कारण से मतदाता सूची में नहीं है। फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के माध्यम से संबंधित आवेदन किए जा सकेंगे। प्रदेश कांग्रेस की एसआईआर समिति के सदस्य अमरेंद्र बिष्ट ने आरोप लगाया कि मामला केवल 95 हजार मतदाताओं तक सीमित नहीं है। उनका दावा है कि प्री-एसआईआर के दौरान भी करीब नौ लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अंतिम सूची जारी होने के बाद लोगों को दोबारा फॉर्म-6 भरना पड़ेगा तो इसके औचित्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, कांग्रेस के इन आरोपों पर निर्वाचन विभाग का कहना है कि ‘इनएलिजिबल’ मार्क किए गए मतदाताओं के संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुनवाई और दस्तावेजों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में भाजपा विधायक विनोद चमोली ने भी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि वह पहले भी कई बार इस प्रक्रिया को लेकर अपनी बात रख चुके हैं। उनके मुताबिक एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नामों पर आपत्तियां लगाई गई हैं, इसलिए यह देखना जरूरी है कि इन आपत्तियों का निस्तारण किस स्तर पर और कितनी संख्या में हुआ। चमोली ने कहा कि जो व्यक्ति देश का नागरिक है, उसे मतदान का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतिम सूची के बाद नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन मौजूदा प्रक्रिया में उठ रही आपत्तियों को भी गंभीरता से देखने की जरूरत है। फिलहाल 95 हजार मतदाताओं के ‘इनएलिजिबल’ मार्क होने की सूचना ने एसआईआर को लेकर बहस तेज कर दी है। निर्वाचन विभाग का कहना है कि इसे सीधे तौर पर 95 हजार नामों के अंतिम रूप से कटने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि 28 सितंबर तक दावे और आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया जारी है। अब सबकी नजर 28 सितंबर के अंतिम निस्तारण और इसके बाद 3 अक्टूबर को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची पर है। अंतिम सूची सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि एसआईआर में कितने मतदाताओं के नाम वास्तव में हटे और कितने नाम दावे-आपत्तियों के आधार पर बरकरार रखे गए।