उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की ऐतिहासिक पहल: तीन तलाक और हलाला पीड़िताओं को मिलेगा मुफ्त आवास, जल्द आएगा प्रस्ताव
देहरादून। उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार लगातार एक के बाद एक कड़े और ऐतिहासिक सामाजिक सुधार लागू कर रही है। समान नागरिक संहिता को धरातल पर उतारने और मदरसा बोर्ड में सुधारों के बाद अब राज्य सरकार और उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने मुस्लिम समाज की पीड़ित महिलाओं के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में तीन तलाक और हलाला जैसी कुरीतियों का शिकार होकर बेघर हुई पीड़ित महिलाओं को अब रहने के लिए मुफ्त आवास (छत) उपलब्ध कराया जाएगा।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस जनहितैषी फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि पीड़ित और बेसहारा महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह खाका तैयार किया गया है। समाज की दर्दनाक हकीकत बयां करते हुए वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने कहा कि जब किसी महिला को तीन तलाक दिया जाता है या उसे हलाला की दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, तो वह सामाजिक और मानसिक रूप से पूरी तरह टूट जाती है। पति और ससुराल पक्ष द्वारा अचानक घर से बेदखल कर दिए जाने के बाद, छोटे-छोटे बच्चों के साथ उनके पास सिर छुपाने तक की जगह नहीं बचती। मायके से भी आर्थिक मदद न मिलने पर वे दर-दर भटकने को मजबूर हो जाती हैं। इन्हीं विषम परिस्थितियों को देखते हुए उत्तराखंड वक्फ बोर्ड अगले महीने (अक्टूबर) के पहले सप्ताह में होने वाली आधिकारिक बोर्ड बैठक में एक मजबूत प्रस्ताव लाने जा रहा है। इस प्रस्ताव के पारित होते ही तीन तलाक और हलाला पीड़िताओं को मुफ्त आवास आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। शादाब शम्स ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे 'वक्फ संशोधन विधेयक' से गरीब और जरूरतमंद मुस्लिम परिवारों में नई उम्मीद जगी है। वक्फ की संपत्तियां मूल रूप से गरीबों, यतीमों और बेवाओं के हक के लिए थीं, लेकिन सालों से रसूखदारों और भू-माफियाओं का इस पर अवैध कब्जा था। अब प्रशासन वक्फ बोर्ड की जमीनों को अवैध कब्जों (एंक्रोचमेंट) से मुक्त कराने के लिए सख्त अभियान चलाने जा रहा है। इन संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त कराकर जो भी संसाधन और आय मिलेगी, उसका सीधा इस्तेमाल पीड़ित बहनों और बेटियों को बसाने तथा उन्हें मुफ्त आवास देने में किया जाएगा। बोर्ड अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस पूरी योजना की मॉनिटरिंग बेहद सख्ती से की जाएगी ताकि किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी न हो सके। उन्होंने विश्वास जताया कि धामी सरकार और वक्फ बोर्ड की इस संयुक्त पहल से मुस्लिम बहनों को अब किसी की लाचारी में नहीं जीना पड़ेगा, बल्कि यह योजना उन्हें एक सुरक्षित और स्वाभिमानी जीवन देने का काम करेगी।