उत्तराखंड प्रमोशन में आरक्षण विवाद! सुप्रीम कोर्ट के ‘जरनैल सिंह’ फैसले के पालन की मांग, हाईकोर्ट में सुनवाई

Uttarakhand Reservation in Promotion Dispute! Demand for Compliance with Supreme Court's 'Jarnail Singh' Verdict; Hearing Underway in High Court.

नैनीताल। उत्तराखंड में सरकारी सेवाओं में पदोन्नति में आरक्षण को लेकर एक बार फिर कानूनी बहस तेज हो गई है। इस संबंध में हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप कार्रवाई करने के निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में अदालत से परमादेश (Writ of Mandamus) जारी करने की प्रार्थना करते हुए कहा गया है कि किसी भी सेवा कैडर में पदोन्नति से पहले Jarnail Singh vs Lachhmi Narain Gupta (2022) Supreme Court judgment में निर्धारित प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया जाए। यह फैसला 28 जनवरी 2022 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया था, जिसमें पदोन्नति में आरक्षण लागू करने के लिए आवश्यक शर्तें तय की गई थीं।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2012 में राज्य सरकार द्वारा इंदु कुमार पांडे समिति का गठन किया गया था और इसके बाद 4 सितंबर 2012 को जस्टिस इरशाद हुसैन आयोग का गठन किया गया। आयोग ने वर्ष 2016 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी, लेकिन इसे आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सरकार इस रिपोर्ट पर विचार कर आवश्यक कार्रवाई करे।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अपर महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि जस्टिस इरशाद हुसैन की रिपोर्ट फिलहाल सरकार के विचाराधीन है और इस पर उचित निर्णय लिया जाएगा। इस पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता दो सप्ताह के भीतर सरकार के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करे, जबकि सरकार को नौ माह के भीतर इस मामले में कारणयुक्त निर्णय लेकर याचिकाकर्ता को अवगत कराना होगा।

याचिका में यह भी मांग की गई है कि राज्य सरकार प्रत्येक सेवा के हर कैडर का कैडरवार रोस्टर तैयार करे और अनुसूचित जाति (SC) तथा अनुसूचित जनजाति (ST) के कर्मचारियों के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व का वस्तुनिष्ठ आकलन किया जाए। साथ ही अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि वह परिस्थितियों के अनुसार अन्य उपयुक्त आदेश पारित करे तथा याचिका की लागत भी प्रदान की जाए।

सुप्रीम कोर्ट के उक्त फैसले में स्पष्ट किया गया था कि पदोन्नति में आरक्षण लागू करने से पहले राज्य सरकारों को तीन प्रमुख शर्तें पूरी करनी होंगी, जिनमें पिछड़े वर्गों के अपर्याप्त प्रतिनिधित्व का ठोस डेटा एकत्र करना, प्रशासनिक दक्षता पर प्रभाव का मूल्यांकन करना और कैडर आधारित रोस्टर तैयार करना शामिल है। यह निर्णय पूर्व में दिए गए M. Nagaraj vs Union of India (2006) judgment के सिद्धांतों को और स्पष्ट करता है।