राजनीतिक पार्टियों के लिए भीड़ नहीं जुटाएंगे कलेक्टर...! आईएएस अफसर के मैसेज से मचा हड़कंप, पार्टी बनाम प्रशासन पर बहस तेज
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव के एक व्हाट्सएप मैसेज ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में तीखी बहस छेड़ दी है। इस संदेश में कथित तौर पर कलेक्टरों को राजनीतिक पार्टी के कार्यक्रम के लिए भीड़ न जुटाने और किसी भी प्रकार की प्रशासनिक व्यवस्था न करने के निर्देश दिए गए हैं। मैसेज के सामने आने के बाद यह मुद्दा प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल, सोमवार को महिला शक्ति वंदन बिल को लेकर लोकसभा में सहमति न बन पाने के विरोध में भाजपा द्वारा भोपाल में एक बड़े नारी सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से करीब 20 हजार महिलाओं को जुटाने की तैयारी थी। आमतौर पर ऐसे बड़े आयोजनों में भीड़ जुटाने और व्यवस्थाओं का जिम्मा प्रशासनिक स्तर पर भी कलेक्टरों के जरिए संभाला जाता रहा है, हालांकि इस पर कभी खुलकर बात नहीं होती। इसी बीच महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव जीवी रश्मि द्वारा एक व्हाट्सएप ग्रुप में साझा किए गए संदेश ने सबको चौंका दिया।
‘जनसंपर्क फॉर सीनियर ऑफिसर्स’ नाम के इस ग्रुप में प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी और सभी जिलों के कलेक्टर शामिल हैं। संदेश में स्पष्ट तौर पर कहा गया कि भोपाल में होने वाली महिला रैली के लिए जिलों से किसी प्रकार की आधिकारिक वेबकास्टिंग या लाइव टेलीकास्ट की व्यवस्था नहीं की जाएगी। साथ ही कलेक्टरों को निर्देश दिया गया कि वे इस कार्यक्रम के लिए किसी प्रकार की सभा या भीड़ जुटाने का इंतजाम न करें। मैसेज में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि पार्टी स्तर पर किसी प्रकार की व्यवस्था करनी है, तो वह पार्टी स्वयं कर सकती है, लेकिन प्रशासन को इसमें शामिल होने की जरूरत नहीं है। इस संदेश को पार्टी का काम पार्टी करे और प्रशासन अपना काम करे के रूप में देखा जा रहा है, जिसने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। हालांकि बाद में यह बात भी सामने आई कि यह संदेश जीवी रश्मि द्वारा खुद टाइप नहीं किया गया था, बल्कि उन्होंने इसे फॉरवर्ड किया था। ऐसे में अब सवाल यह उठ रहे हैं कि यह मूल संदेश किसने तैयार किया और क्या इसे जानबूझकर साझा किया गया था या फिर किसी उच्च स्तर से निर्देशित किया गया था। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर जहां कुछ लोग इसे प्रशासन की पारदर्शिता और निष्पक्षता की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक संकेतों के रूप में भी देखा जा रहा है। फिलहाल इस मामले में सरकार या संबंधित अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह मुद्दा लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।