उत्तराखण्डः 144 करोड़ की योजना पर सवाल! पर्यटन सीजन में प्यासी मसूरी, व्यापारियों की चेतावनी- तीन दिन में नहीं हुआ समाधान तो होगा आंदोलन

Uttarakhand: Questions mount over 144 crore project! Mussoorie thirsty during tourist season, traders warn: If a solution isn't found within three days, there will be a protest.

मसूरी। पर्यटन सीजन के चरम पर पहुंचते ही पहाड़ों की रानी मसूरी एक बार फिर पेयजल संकट से जूझ रही है। शहर के कई इलाकों में पानी की भारी कमी से होटल व्यवसायी, व्यापारी, होमस्टे संचालक और स्थानीय लोग परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि 144 करोड़ रुपये की यमुना पंपिंग पेयजल योजना की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। मगलवार को मसूरी होटल एसोसिएशन, मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन और होमस्टे संगठन ने एसडीएम कार्यालय के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मसूरी विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को ज्ञापन भेजकर समस्या के समाधान की मांग की। वहीं गढ़वाल जल संस्थान कार्यालय पहुंचकर अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी भी की गई। मसूरी ट्रेडर्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अग्रवाल ने कहा कि पानी की कमी से मसूरी की छवि प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में मंदिरों तक में जल चढ़ाने के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। वहीं होमस्टे संगठन के अध्यक्ष देवी गोदियाल ने बताया कि पानी की कमी के चलते प्रतिदिन 100 से अधिक पानी के टैंकर शहर में पहुंच रहे हैं, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या भी बढ़ रही है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो जल संस्थान कार्यालय में तालाबंदी कर मुख्यमंत्री आवास तक पैदल मार्च निकाला जाएगा। मामले को लेकर गढ़वाल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अमित कुमार ने कहा कि हाल की बारिश से कई पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थीं और यमुना योजना के दूसरे चरण में तकनीकी खराबी आने से आपूर्ति प्रभावित हुई। उन्होंने दावा किया कि अधिकांश समस्याओं का समाधान कर लिया गया है और जल्द सभी क्षेत्रों में जलापूर्ति सामान्य हो जाएगी। उनके अनुसार मसूरी में प्रतिदिन 14 से 15 एमएलडी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है तथा समस्या मुख्य रूप से वितरण व्यवस्था से जुड़ी है।