होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा तनाव: ईरान पर अमेरिका का बड़ा सैन्य हमला! 140 ठिकाने बने निशाना, जवाबी कार्रवाई से खाड़ी क्षेत्र में फिर भड़का संघर्ष
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रविवार को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाते हुए लगभग 140 ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि यह कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कंटेनर जहाज पर हुए हमले के जवाब में की गई, जिसमें जहाज में आग लग गई थी और चालक दल को जहाज छोड़कर सुरक्षित निकलना पड़ा था। इस नए सैन्य टकराव ने क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को गहरा झटका दिया है और वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस अभियान में मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, हथियारों के गोदाम, संचार नेटवर्क तथा अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। अधिकारियों का कहना है कि हाल के महीनों में यह अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई है। अमेरिकी सेना का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनके जरिए वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों और नागरिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रहा था। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने हमलों के बाद कड़ा संदेश देते हुए कहा कि ईरान ने गलत निर्णय लिया है और अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। उनके इस बयान को अमेरिका की सख्त सैन्य नीति का संकेत माना जा रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों के दौरान खोर्रमाबाद क्षेत्र में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की एयरोस्पेस फोर्स ने अपने नए एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से एक अमेरिकी क्रूज मिसाइल को मार गिराया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सैन्य हमले किए। रिपोर्टों के अनुसार बहरीन, कुवैत, कतर और ओमान की दिशा में मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है और कई देशों ने अपने सैन्य ठिकानों पर हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। इस बीच कुछ स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका के हवाई हमलों में ईरान की सशस्त्र सेना की नौसेना के लेफ्टिनेंट हामिदरेजा देहघानी की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि जास्क बंदरगाह पर हुए हमले के दौरान वह ड्यूटी पर तैनात थे। हालांकि इस संबंध में ईरान की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले संघर्षविराम की स्थिति के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का संकेत दिया था, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे पूरी दुनिया के लिए सकारात्मक कदम बताया था। उस समय उम्मीद जताई जा रही थी कि दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा और बातचीत के जरिए स्थायी समाधान निकल सकता है। लेकिन ताजा सैन्य कार्रवाई ने उन सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। रक्षा और कूटनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच यह सैन्य टकराव जारी रहा तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठन दोनों पक्षों से संयम बरतने और वार्ता के माध्यम से समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते इस नए सैन्य संघर्ष ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान पश्चिम एशिया की ओर खींच लिया है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की अगली रणनीति और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया इस संकट की दिशा तय करेगी।