उत्तराखण्डः वन विभाग के दैनिक श्रमिकों के नियमितीकरण का मामला हाईकोर्ट पहुंचा! कोर्ट ने सरकार से मांगी स्थिति रिपोर्ट
नैनीताल। वन विभाग में दैनिक श्रमिक और अनुबंध के आधार पर वर्षों से कार्यरत श्रीमिकों का नियमितीकरण करने को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ती सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य सरकार से स्थिति से अवगत कराने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने चार सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। याचिकाकर्ताओं ने नियमितीकरण नियमावली में तय की गई कटऑफ डेट को चुनौती दी है।
दरअसल, साल 2011 की नियमावली में नियमितीकरण के लिए 10 वर्ष की सेवा की शर्त निर्धारित की गई थी, जिसे वर्ष 2013 में संशोधित कर 5 वर्ष कर दिया गया था। इसके बाद 2013 की नियमावली को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और 2022 में कोर्ट के फैसले के बाद नियमितीकरण के लिए फिर से 10 वर्ष की सेवा की शर्त लागू हो गई। इस नियमावली को सरकार ने दिसंबर 2025 में संसोधन किया। जिसमें प्रावधान किया गया कि केवल वही कर्मचारी नियमितीकरण के पात्र होंगे, जिन्होंने 4 दिसंबर 2018 तक 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली हों। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कटऑफ डेट संविधान के अनुच्छेद 14 और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। उनका तर्क है कि नियमावली लागू होने की तारीख को आधार मानते हुए दिसंबर 2025 तक जिन कर्मचारियों ने 10 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें भी नियमितीकरण के लिए पात्र माना जाना चाहिए। इस मामले को पृथ्वी सिंह सहित अन्य वन विभाग में कार्यरत दर्जनों दैनिक श्रमिक और अनुबंध के आधार पर कार्य कर रखे श्रमिकों ने चुनौती दी है। कहा कि उनकी उम्र सेवानिवृत होने को है। लेकिन सरकार उन्हें नियमित नही कर रही है। सरकार की तरफ से कहा गया कि सरकार कर्मचारियों का नियमितीकरण वर्षनुसार कर रही है। इसलिए उन्हें स्थिति से अवगत कराने के लिए समय दिया जाए। आज मामले में याचिकाकर्ताओं की तरफ से मामले कि शीघ्र सुनवाई हेतु कोर्ट से प्रार्थना की गयी। कहा कि कई कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल पायेगा। क्योंकि जब तक उनका नियमतीकरण होता है तब तक वे सेवामुक्त हो जाएंगे। इसलिए मामले की शीघ्र सुनवाई कर सरकार को वर्तमान स्थिति से अवगत कराने के निर्देश दिए जाएं।