नैनीताल:टोल वसूली में नगर पालिका आगे,मॉल रोड बनवाने में पीछे!सड़क पीडब्ल्यूडी की,पर टोल नगर पालिका का?सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बोरा ने पूछा: पहल की होती तो धरने की नौबत ही क्यों आती?
नैनीताल की लाइफलाइन कही जाने वाली माल रोड लंबे समय से निर्माण और मरम्मत की बाट जोह रही है। सड़क के निर्माण में हो रही देरी को लेकर अब जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के साथ-साथ नगर पालिका प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं ग्वाल सेना के प्रदेश संयोजक प्रदीप बोरा ने आरोप लगाया कि माल रोड से नगर पालिका को लंबे समय से आर्थिक लाभ मिलता रहा है, लेकिन सड़क को जल्द दुरुस्त कराने के लिए नगर पालिका की ओर से अपेक्षित पहल नजर नहीं आई।
प्रदीप बोरा का कहना है कि माल रोड के रखरखाव और निर्माण की जिम्मेदारी भले ही लोक निर्माण विभाग की हो, लेकिन इस सड़क से जुड़े आर्थिक हित और यातायात व्यवस्था में नगर पालिका की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में नगर पालिका को भी सड़क के निर्माण को लेकर लगातार प्रशासन और संबंधित विभागों पर दबाव बनाना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि माल रोड पर नगर पालिका की ओर से वाहनों से टोल वसूला जाता है। इसके लिए बाकायदा व्यवस्था बनाई गई है और सड़क पर आने-जाने वाले वाहनों से शुल्क लिया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सड़क से होने वाले आर्थिक लाभ में नगर पालिका की भूमिका है तो सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर उसकी जिम्मेदारी और जवाबदेही क्यों नहीं तय होनी चाहिए?
बोरा ने कहा कि पूर्व में जब माल रोड पर टोल को लेकर विवाद हुआ था, तब लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने भी यह सवाल उठाया था कि जिस सड़क का निर्माण और रखरखाव पीडब्ल्यूडी करता है, वहां नगर पालिका किस आधार पर टोल वसूल रही है। उनका कहना है कि यदि नगर पालिका इस सड़क से शुल्क वसूलती है तो कम से कम सड़क की स्थिति को बेहतर बनाए जाने के लिए संबंधित विभागों के साथ प्रभावी समन्वय और पहल तो की जानी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि नगर पालिका ने अब तक कितनी बार जिलाधिकारी के सामने माल रोड के निर्माण का मुद्दा मजबूती से उठाया? कितनी बार कुमाऊं आयुक्त से इस संबंध में बैठक की? पीडब्ल्यूडी अधिकारियों और ठेकेदार से सड़क निर्माण की समयसीमा को लेकर कितनी बार जवाब मांगा गया? यदि नगर पालिका ने इन स्तरों पर पहल की है तो उसके परिणाम जनता के सामने क्यों नहीं हैं?
बोरा ने कहा कि सिर्फ टोल की पर्ची काटकर वाहनों को आगे भेज देना पर्याप्त नहीं है। जनता यह जानना चाहती है कि जिस सड़क से वर्षों से नगर पालिका को राजस्व मिलता आया है, उसी सड़क के निर्माण में देरी होने पर नगर पालिका ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए।
उन्होंने कहा कि यदि नगर पालिका प्रशासन ने समय रहते इस मामले में जिलाधिकारी, आयुक्त और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय किया होता और सड़क निर्माण को लेकर सार्वजनिक रूप से दबाव बनाया होता तो आज लोगों को धरने पर बैठने की जरूरत शायद नहीं पड़ती।
प्रदीप बोरा ने कहा कि माल रोड केवल एक सड़क नहीं बल्कि नैनीताल की पहचान और पर्यटन व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसकी खराब स्थिति का सीधा असर स्थानीय व्यापार, पर्यटन और शहर की छवि पर पड़ता है। ऐसे में सड़क निर्माण में देरी को लेकर केवल पीडब्ल्यूडी को जिम्मेदार ठहराने के बजाय नगर पालिका की भूमिका और जवाबदेही पर भी सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा जाना चाहिए।
उन्होंने नगर पालिका प्रशासन से सीधा सवाल किया कि जब माल रोड से होने वाली टोल वसूली में नगर पालिका की रुचि और अधिकार है, तो सड़क को जल्द बनवाने के लिए पहल करने की जिम्मेदारी से वह पीछे क्यों है?
अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन इन सवालों पर क्या जवाब देता है और माल रोड के निर्माण को जल्द पूरा कराने के लिए वह आगे क्या ठोस कदम उठाता है।