क्या आपको पता है आपका बैंक अकाउंट बैंक अपनी मर्जी से फ्रीज नहीं कर सकता! 44 लाख के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खुलवाया खाता
नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 44 लाख रुपये की गलत बैंक ट्रांजेक्शन के आधार पर फ्रीज किए गए एक बैंक खाते को तत्काल अनफ्रीज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सक्षम मजिस्ट्रेट या सक्षम जांच प्राधिकारी की ओर से खाते को फ्रीज करने का कोई आदेश मौजूद नहीं है, तो बैंक द्वारा इस तरह खाते को फ्रीज किया जाना कानून की नजर में कायम नहीं रह सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने मुनव्वर की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिका में मुनव्वर ने हरिद्वार के शिवालिक नगर स्थित कोटक महिंद्रा बैंक की शाखा में संचालित अपने खाता संख्या 96xxxxxxxxx को अनफ्रीज करने और सामान्य रूप से संचालित करने की अनुमति देने की मांग की थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि उनका बैंक खाता 10 अक्टूबर 2025 को फ्रीज कर दिया गया था। जानकारी लेने पर उन्हें बताया गया कि यस बैंक से प्राप्त एक सूचना के आधार पर खाते पर रोक लगाई गई है। सूचना में कहा गया था कि 44 लाख रुपये की राशि गलती से याचिकाकर्ता के खाते में ट्रांसफर हो गई थी।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सक्षम मजिस्ट्रेट के किसी आदेश के अभाव में बैंक को खाते को फ्रीज करने का कानूनी अधिकार नहीं था। इस दौरान बीएनएसएस, 2023 की धारा 106 और 107 का हवाला देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट के मालाबार गोल्ड एंड डायमंड्स लिमिटेड एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य मामले में दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से ये भी कहा गया कि बैंक खाते को फ्रीज करने का अधिकार कानून के अनुसार सक्षम प्राधिकारी के पास है, बैंक अपने स्तर पर ऐसा कदम नहीं उठा सकता।
सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से पेश अधिवक्ता ने भी स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता का खाता केवल यस बैंक से प्राप्त उस सूचना के आधार पर फ्रीज किया गया था, जिसमें 44 लाख रुपये की राशि के गलत तरीके से खाते में ट्रांसफर होने की बात कही गई थी। कोर्ट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। साथ ही बैंक की ओर से भी ऐसा कोई आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया, जो किसी सक्षम मजिस्ट्रेट या सक्षम जांच प्राधिकारी द्वारा खाते को फ्रीज करने के निर्देश के रूप में मौजूद हो।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में बैंक द्वारा याचिकाकर्ता का खाता फ्रीज किया जाना कानून की नजर में टिकाऊ नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड, शिवालिक नगर शाखा, हरिद्वार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के खाते को तत्काल अनफ्रीज किया जाए और उसे सामान्य रूप से संचालित करने की अनुमति दी जाए, बशर्ते खाते के संचालन में कोई अन्य कानूनी बाधा न हो। इसके साथ ही कोर्ट ने आपराधिक रिट याचिका का निस्तारण कर दिया।
बता दें कि यह आदेश जुलाई माह में हाईकोर्ट न्यायमूर्ति आलोक महरा ने पारित किया था।