स्वारना नदी के उफान पर आने से जंगल में फंसे यूपीईएस के 6 छात्र,एसडीआरएफ ने 6 किमी पैदल ट्रैकिंग कर किया सुरक्षित रेस्क्यू

Six UPES students stranded in the forest due to the swelling Swarna River were safely rescued by the SDRF after a 6-kilometer trek.

देहरादून। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच देहरादून के थान गांव स्थित मिसरास पट्टी क्षेत्र में एक बड़ा हादसा होने से टल गया। उफनती स्वारना नदी के कारण जंगल में फंसे यूपीईएस के 6 छात्रों को एसडीआरएफ की टीम ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए सुरक्षित बाहर निकाल लिया। खराब मौसम, उफनते नदी-नालों और अत्यंत दुर्गम रास्तों के बीच एसडीआरएफ के जवानों ने करीब 6 किलोमीटर की पैदल ट्रैकिंग कर इस जोखिम भरे रेस्क्यू अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

जानकारी के अनुसार, 17 अगस्त को यूपीईएस संस्थान के छह छात्र थान गांव के मिसरास पट्टी स्थित स्वारना नदी क्षेत्र में ट्रैकिंग के लिए पहुंचे थे। दिनभर की ट्रैकिंग पूरी कर जब छात्र वापस लौटने लगे, तभी इलाके में अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। देखते ही देखते पहाड़ी नदी स्वारना का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया। नदी के रौद्र रूप को देखकर छात्रों का वापस लौटने का मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया और वे घने जंगल के बीच असहाय होकर फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ  डाकपत्थर की रेस्क्यू टीम ने बिना समय गंवाए मोर्चा संभाला। क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और लगातार हो रही बारिश के कारण अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद रेस्क्यू टीम ने हार नहीं मानी और सुरक्षित रास्तों की तलाश करते हुए घने जंगलों के बीच करीब 6 किलोमीटर पैदल ट्रैकिंग की। जवानों ने कड़ी मशक्कत के बाद छात्रों की लोकेशन का पता लगाया और उन्हें सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके पश्चात सभी छात्रों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर जिला पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। एसडीआरएफ की टीम के पहुंचने से सभी छह छात्रों को सकुशल बचा लिया गया है और उनकी स्थिति पूरी तरह सामान्य बताई जा रही है। इस घटना के बाद एसडीआरएफ सेनानायक माणिक्यकांत मिश्रा ने मानसून के मौसम को ध्यान में रखते हुए पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और छात्रों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बरसात के दिनों में नदी-नालों के पास जाने से पूरी तरह बचें और किसी भी ट्रैकिंग पर निकलने से पहले मौसम का सटीक पूर्वानुमान अवश्य जान लें। पहाड़ी इलाकों में मौसम पलक झपकते बदल जाता है, ऐसे में बरती गई थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।