उत्तराखंड खुलासा: RTI से मांगी गयी सूचना में खुली RTE की पोल!एक ओर RTE के तहत पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या पिछले तीन सालों में घटी तो इन्हीं तीन सालों में सरकारी व्यय बढ़ा!
आप सभी जानते ही होंगे कि शिक्षा हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण है। जीवन में शिक्षा की शुरुआत स्कूली शिक्षा से ही होती है जिसके लिए सरकार ने देश के सभी छात्रों को स्कूली शिक्षा और शैक्षिक पाठ्यक्रम प्रदान करने के लिए शिक्षा का अधिकार (RTE) लॉन्च किया था। सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूल अपने राज्य में गरीब और वंचित समूहों के परिवारों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए आरटीई के तहत आवेदन कर सकते है। उत्तराखंड आरटीई प्रवेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत राज्य के विभिन्न शहरों से 25% कोटा के तहत प्रदान किया जा रहा है। शिक्षा के अधिकार के तहत उत्तराखंड शिक्षा विभाग द्वारा आरटीई स्कूल सूची प्रकाशित की जाती है। लेकिन आरटीई को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत गोनिया ने सूचना का अधिकार अधिनियम से मांगी गई सूचना पर एक बड़ा खुलासा किया है। पिछले 3 वर्षों में आरटीई के तहत शिक्षा लेने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई है तो वही आरटीई के लिए सरकारी खर्च में बढ़ोतरी हुई है। जी हां! ये मामला सुनने में अजीब लग रहा होगा कि जब छात्रों की संख्या घटी तो भला खर्च कैसे बढ गया? लेकिन सूचना के अधिकार अधिनियम यानी आरटीआई के तहत यही खुलासा हुआ है। कोरोना महामारी के बाद आरटीई के तहत शिक्षालेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में करीब 20 हज़ार तक कमी दर्ज की गई है,जबकि खर्च हर साल बढ़ता रहा।आरटीआई से मिली सूचना के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2018 -19 में उत्तराखंड में आरटीई से लाभान्वित विद्यार्थियों की संख्या 107432 थी,वहीं 2019-20 में विद्यार्थियों की संख्या कम होकर 92994 रह गयी और वित्तीय वर्ष 2020-21 में विद्यार्थियों की संख्या और सिमटकर 83184 हो गयी,वही पिछले साल यानी 2022 में 87714 विद्यार्थियों ने आरटीई का लाभ लिया। इस तरह पिछले तीन सालों में हर साल विद्यार्थियों की संख्या में कमी आई। अब जानते है इन्ही वित्तीय वर्षों में हर साल होने वाले व्यय का ब्यौरा। आरटीआई में खुलासा हुआ कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में जब आरटीई के तहत सबसे ज्यादा विद्यार्थी पढ़ रहे थे तब सरकार की ओर से 97.69 करोड़ खर्च किया गया,वहीं 2019-20 में सरकार ने 102.97 करोड़ खर्च किया। वित्तीय वर्ष 2020-21 में ये खर्च बढ़कर 126.20 करोड़ हो गया। और पिछले वर्ष ये आंकड़ा 168.00 करोड़ तक पहुंच गया,जबकि आरटीआई के खुलासे के मुताबिक इन वर्षों में लगातार विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज की गई।