उत्तराखंड: बागेश्वर में अवैध खड़िया खनन से घरों और खेतों में आई दरारों पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब! पीड़ित परिवारों के लिए पिछले डेढ़ साल में क्या किए उपाय?

Uttarakhand: The High Court has sought a response from the government regarding the cracks appearing in houses and fields due to illegal soapstone mining in Bageshwar. What measures have been taken f

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बागेश्वर के कांडा तहसील सहित जिले के कई अन्य गांवों में अवैध खड़िया खनन से आई दरारों के मामले में स्वतः संज्ञान लिए जाने वाली जनहित याचिका के अलावा 165 खनन इकाइयों से सम्बन्धित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। कोर्ट की खण्डपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि पिछले डेढ़ वर्षों में पीड़ित परिवारों की परेशानियों को दूर करने के लिए किए जा उपायों से कोर्ट को अवगत कराएं। मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट ने 2 सप्ताह बाद की तिथि नियत की है। बता दें कि पूर्व में कांडा तहसील के ग्रामीणों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर कहा था कि अवैध खड़िया खनन से उनकी खेतीबाड़ी, घर, पानी की लाइनें चोबट हो चुकी हैं। जो धन से सपन्न थे उन्होंने अपना आशियाना हल्द्वानी व अन्य जगह पर बना दिया है। अब गावों में निर्धन लोग ही बचे हुए हैं। उनके जो आय के साधन थे उनपर अब खड़िया खनन के लोगों की नजर टिकी हुई है। इस सम्बंध में कई बार उच्च अधिकारियों को प्रत्यावेदन भी दिए, लेकिन उनकी समस्या का कुछ हल नही निकला। ग्रामीणों द्वारा कोर्ट से प्रार्थना की गई थी उनकी समस्या का समाधान किया जाए।