उत्तराखंड: पिथौरागढ़ में खुले में फेंके जा रहे मेडिकल वेस्ट पर हाईकोर्ट सख्त! सरकार को कॉमन मेडिकल वेस्ट प्लांट के लिए जमीन चिन्हित करने और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चार सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश

Uttarakhand: High Court takes a strict stance on medical waste being dumped in the open in Pithoragarh! Government directed to identify land for a common medical waste plant, and Pollution Control Bo

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पिथौरागढ़ जिले में अस्पतालों का मेडिकल वेस्ट खुले में, नदी, नालों, गड्ढों और नगर पालिका के कूड़े के डिब्बों में डाले जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार से कहा है कि पिथौरागढ़ में कॉमन मेडिकल वेस्ट प्लांट लगाने के लिए जगह का चयन कर कोर्ट को बताएं और राज्य प्रदूषण बोर्ड जिले के सभी हॉस्पिटलों की जांच करके चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा है। साथ में कोर्ट ने यह भी कहा है कि हॉस्पिटल कर्मचारियों को इसकी ट्रेनिंग कराई जाए। बता दें कि पिथौरागढ़ निवासी डॉक्टर राजेश पांडे ने नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने कहा है कि पिथौरागढ़ जिले में मेडिकल वेस्ट का निस्तारण के लिए कोई सुविधा नहीं है। जिसकी वजह से सरकारी, प्राइवेट अस्पातल और पैथ लैब का मेडिकल वेस्ट इनकी ओर से खुले में, नदी, नालों, गड्ढों व नगर पालिका के कूड़े के डिब्बों में डाला जा रहा है, जिसकी वजह से बीमारी फैलने की आशंका बढ़ रही है। निस्तारण के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं इस वेस्ट को जानवर भी खा रहे हैं। उनके स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। पिथौरागढ़ जिले में करीब 20 पैथ लैब संचालित है, लेकिन इनका यूकेपीसीबी यानी उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। जिसकी वजह से पर्यावरण को भी खतरा उत्पन्न हो गया है। हॉस्पिटलों के द्वारा नियमों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। पीसीबी के द्वारा अभी तक जिले के दो हॉस्पिटल की जांच की गई है अन्य की नहीं की गयी।