Oct 12, 2026 Login
Awaaz24x7-government

उत्तराखंड ब्रेकिंग:चिपको आंदोलन के कर्मक्षेत्र रैणी गांव में कांचुला के पेड़ों का फैंसी आईटम बनाने के लिए किया गया कटान,ग्रामीणों में रोष

Uttarakhand Breaking: In Raini village, the work area of ​​Chipko movement, Kanchula trees were cut to make fancy items, villagers furious

26 मार्च को उत्तराखंड में चिपको आंदोलन की 49वी वर्षगांठ मनाई गई। ये आंदोलन जंगलों और पेड़ो को बचाने के लिए चमोली जिले के रैणी गाँव मे शुरू हुआ था। आज चिपको आंदोलन के उसी कर्मक्षेत्र रैणी गांव में कांचुला के कई पेड़ो की आहुति दे दी गयी जिसकी सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और रैणी गांव के ग्रामीण मौके पर पहुंचे।
सोमवार को गांव के ही एक व्यक्ति ने जब कांचुला के पेड़ों को हुए भारी नुकसान से देखा तो उसने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों को दी। जिसके बाद रैणी गांव की महिलाएं, युवक मंगल दल वन विभाग की टीम और अन्य ग्रामीणों ने मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का जायजा लेने का प्लान बनाया। 
मिली जानकारी के मुताबिक रैणी गांव में 20 से 25 पेड़ो को काटा गया है कई पेड़ो से कुछ टुकड़े निकाल कर उन्हें खोखला कर दिया है। इन टुकड़ों की तस्करी की जाती है,इनसे फैंसी ग्लास,कटोरी,फैंसी आईटम इत्यादि बनाकर अच्छी कीमत पर बेचा जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि ये काम रैणी गांव के लोग नही वल्कि बाहरी लोगों ने किया है,रैणी गांव में पेड़ो और जंगलों को बचाने के लिए ग्रामीण वर्षों से काम कर रहे है ऐसे में ग्रामीणों के प्रयासों और मेहनत का कोई औचित्य नही रह जाता जब पेड़ो को इस तरह काटा जाता है।

 

 

फ़ोटो साभार:अमर उजाला