कद नहीं, किरदार की हुई जीत: पिथौरागढ़ के बस्तड़ी गांव ने रचा इतिहास,3 फीट के 'चन्नू' बने निर्विरोध उपप्रधान

Triumph of character, not stature: Pithoragarh's Bastadi village makes history as 3-foot-tall 'Channu' is elected unopposed as Deputy Village Head.

पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के कनालीछीना विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम बस्तड़ी से लोकतंत्र की एक ऐसी खूबसूरत और मिसाल कायम करने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे प्रदेश का दिल जीत लिया है। गांव में हुए उपप्रधान पद के चुनाव में ग्रामीणों ने शारीरिक कद-काठी की रूढ़िवादी सोच को दरकिनार करते हुए करीब तीन फीट की लंबाई वाले 31 वर्षीय चंद्रशेखर भट्ट उर्फ 'चन्नू' को सर्वसम्मति से निर्विरोध उपप्रधान चुन लिया है। बस्तड़ी के ग्रामीणों के इस ऐतिहासिक फैसले ने देश-दुनिया को एक बेहद सकारात्मक और बड़ा संदेश दिया है कि लोकतंत्र में व्यक्ति की असली पहचान उसके शारीरिक कद से नहीं, बल्कि उसके ऊंचे किरदार, कर्म, सेवा और जनता के प्रति अटूट विश्वास से होती है।

चंद्रशेखर भट्ट उर्फ 'चन्नू' जितने सहज और सरल हैं, शैक्षणिक मोर्चे पर उतने ही मजबूत हैं। उन्होंने राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर (एमए) की डिग्री हासिल की है। चन्नू पिछले लंबे समय से क्षेत्र के सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं। ग्रामीणों के सुख-दुख में आधी रात को भी खड़े रहना, उनका बेहद विनम्र व्यवहार और गांव के विकास के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता ने उन्हें बहुत कम समय में ही बस्तड़ी गांव का सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय चेहरा बना दिया। यही वजह रही कि जब उपप्रधान पद के लिए चुनाव की घोषणा हुई, तो उनके प्रति सम्मान और विश्वास जताते हुए गांव के किसी भी अन्य व्यक्ति ने उनके खिलाफ नामांकन तक दाखिल नहीं किया। चंद्रशेखर भट्ट चन्नू की यह अद्वितीय सफलता उन लोगों के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है, जो किसी भी प्रकार की शारीरिक चुनौती या दिव्यांगता को अपनी राह का रोड़ा मानकर हताश हो जाते हैं। बस्तड़ी के लोगों ने यह साबित कर दिया कि जब कोई समाज व्यक्ति के बाहरी स्वरूप के बजाय उसके आंतरिक चरित्र, उसकी योग्यता और कार्यशैली को प्राथमिकता देता है, तो प्रकृति द्वारा तय की गई सारी सीमाएं और बाधाएं अपने आप बौनी हो जाती हैं। चन्नू की सेवा भावना ने आज उन्हें उस मुकाम पर पहुंचा दिया है, जहां पूरा गांव उनके नेतृत्व में आगे बढ़ने को तैयार है। निर्विरोध उपप्रधान चुने जाने के बाद गांव में जश्न का माहौल है और चंद्रशेखर भट्ट को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। इस ऐतिहासिक जीत के बाद भावुक होते हुए चन्नू ने कहा, यह मेरी अकेले की जीत नहीं है, बल्कि यह पूरे बस्तड़ी गांव के नागरिकों और उनकी महान सोच की जीत है। ग्रामीणों ने मुझ पर जो अभूतपूर्व भरोसा जताया है, मैं उसे कभी टूटने नहीं दूंगा। उन्होंने भविष्य की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि वह गांव के हर वर्ग को साथ लेकर चलेंगे। उनका मुख्य फोकस गांव के समग्र विकास, पंचायती कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता लाने और सामाजिक एकता को और अधिक मजबूत करने की दिशा में रहेगा। बस्तड़ी गांव के ग्रामीणों का यह अनुकरणीय फैसला आज के दौर की राजनीति में एक ताजी हवा के झोंके जैसा है, जिसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई दे रही है।