अस्पताल का गजब कारनामा! टूटे पैर पर प्लास्टर की जगह बांध दिया गत्ते का कार्टन, वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप

Hospital's bizarre blunder! Cardboard carton tied around broken leg instead of a cast; uproar ensues after video goes viral.

बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय जिले स्थित अनुमंडलीय अस्पताल मंझौल से स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल एक युवक के टूटे हुए पैर पर प्लास्टर या मेडिकल स्प्लिंट बांधने के बजाय डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने गत्ते (कार्डबोर्ड) का कार्टन बांध दिया और उसे बेगूसराय सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। मरीज के पैर में बंधे कार्टन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सरकारी अस्पतालों की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

जानकारी के अनुसार, नावकोठी थाना क्षेत्र के महेशवारा वार्ड-4 निवासी कृष्ण कुमार 15 जुलाई की रात गढ़पुरा से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान मंझौल थाना क्षेत्र के हरसाइन पुल के पास एक टेंपो की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना मिलने पर डायल-112 पुलिस उन्हें तत्काल मंझौल अनुमंडलीय अस्पताल लेकर पहुंची। अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के दौरान युवक के पैर में गंभीर चोट और फ्रैक्चर की आशंका जताई। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल बेगूसराय रेफर कर दिया गया। रेफर करने से पहले मरीज के पैर को हिलने से रोकने के लिए कार्टन का सहारा लेकर अस्थायी रूप से बांधा गया। इसी दौरान किसी ने पूरी प्रक्रिया का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने अस्पताल में संसाधनों की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति पर सवाल उठाए। कई लोगों ने इसे लापरवाही बताया, जबकि चिकित्सकीय विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर फ्रैक्चर की स्थिति में मरीज को रेफर करते समय प्रभावित अंग को अस्थायी रूप से स्थिर (इमॉबिलाइज) करना जरूरी होता है और संसाधन उपलब्ध न होने पर कठोर सामग्री का उपयोग चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का हिस्सा हो सकता है। अस्पताल प्रबंधक गौरी शंकर ने बताया कि अस्पताल में आर्थोपेडिक विभाग के केवल एक डॉक्टर तैनात हैं, जबकि ड्रेसर, ओटी असिस्टेंट, वार्ड ब्वॉय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों सहित लगभग 70 प्रतिशत मानव संसाधनों की कमी है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों के अनुसार मरीज को प्राथमिक उपचार देकर रेफर किया गया। अस्पताल प्रभारी चिकित्सक ने भी स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो 15 जुलाई की रात का है, जिसे अब सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में फ्रैक्चर स्प्लिंट की आपूर्ति नहीं हो रही है और सीमित संसाधनों के बीच मरीज के हित में उसका पैर स्थिर कर रेफर किया गया था। उन्होंने बताया कि अस्पताल फिलहाल मात्र 30 प्रतिशत स्टाफ के सहारे संचालित हो रहा है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सकीय उपकरण उपलब्ध कराने और खाली पदों पर जल्द नियुक्तियां करने की मांग की है। वहीं, वायरल वीडियो ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।