उत्तराखण्डः पौड़ी के ऐराड़ी गांव में 112 नाली भूमि खरीद पर मचा बवाल! सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद जांच के घेरे में मामला, भू-कानून पर उठे सवाल
पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के पौड़ी-देवप्रयाग मोटरमार्ग स्थित ऐराड़ी गांव में 112 नाली भूमि की खरीद का मामला इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर भूमि खरीद से जुड़ा एक वीडियो वायरल होने के बाद उत्तराखंड के भू-कानून और बड़े पैमाने पर भूमि खरीद की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों के विरोध और जनचर्चा के बीच जिला प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने पूरे प्रकरण की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित कर दी है।
जानकारी के अनुसार विकासखंड कोट के ऐराड़ी गांव में 112 नाली भूमि कृषि परियोजना के नाम पर खरीदी गई है। राजस्व विभाग के अनुसार यह भूमि देहरादून स्थित दून हैचरीज लिमिटेड के माध्यम से खरीदी गई है, जो वर्ष 1997 से पंजीकृत कंपनी है। विभाग का कहना है कि कंपनी यमकेश्वर ब्लॉक के ग्राम कोठार निवासी नरेंद्र सिंह के नाम पर पंजीकृत है। भूमि की खरीद वर्ष 2025 में शुरू हुई, जबकि रजिस्ट्री फरवरी माह में और दाखिल-खारिज जुलाई में किया गया। राजस्व उपनिरीक्षक भूपेंद्र सिंह के अनुसार यह भूमि ग्राम सभा ढुंगली के अंतर्गत आने वाले एक ही खानदान के 12 परिवारों से खरीदी गई है। उनका कहना है कि स्थानीय व्यक्ति अथवा संस्था कृषि परियोजना के लिए अधिकतम 12.5 एकड़ अर्थात 252.12 नाली भूमि खरीद सकती है और प्रथम दृष्टया यह खरीद वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप प्रतीत होती है। हालांकि अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
दूसरी ओर, गांव में एक साथ इतनी बड़ी मात्रा में भूमि बिकने से स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि भूमि बिक्री से पहले ग्राम पंचायत या ग्रामीणों को विश्वास में नहीं लिया गया। उनका कहना है कि यदि इतनी बड़ी परियोजना प्रस्तावित थी तो ग्रामसभा की बैठक आयोजित कर स्थानीय लोगों को जानकारी दी जानी चाहिए थी। ग्रामीणों ने दावा किया कि सोशल मीडिया पर 144 नाली भूमि पर हाउसिंग सोसाइटी, रिसॉर्ट और स्विमिंग पूल जैसे निर्माण का विज्ञापन भी देखा गया है। हालांकि राजस्व विभाग फिलहाल केवल 112 नाली भूमि की खरीद की पुष्टि कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रदेश में नया भू-कानून लागू है तो एक व्यक्ति या संस्था द्वारा एक साथ इतनी बड़ी भूमि की खरीद कैसे संभव हुई? यदि कानून में कोई खामी है तो भविष्य में यह पहाड़ों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि बड़े स्तर पर निर्माण कार्य हुआ तो क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोतों और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने अपर जिलाधिकारी एफ.आर. चौहान की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति में संयुक्त मजिस्ट्रेट पौड़ी, उप निबंधक पौड़ी तथा जिला विकास प्राधिकरण के प्रभारी अधिशासी अभियंता को सदस्य बनाया गया है। समिति ने मौके का निरीक्षण कर आवश्यक दस्तावेज और अभिलेख एकत्र कर लिए हैं तथा विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है।