आवाज़ खुलासा: पंतनगर यूनिवर्सिटी! 22 हॉस्टल, एक पैटर्न, टेंडर नहीं, सिर्फ एक्सटेंशन! RTI ने खोली पूरी पोल
पंतनगर (उधम सिंह नगर)। गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। छात्रावासों की मेस व्यवस्था को लेकर दायर आरटीआई संख्या 156,157 और 158 से जो तथ्य सामने आए हैं, वे न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही बल्कि संभावित मिलीभगत की ओर भी इशारा करते हैं। आरटीआई से प्राप्त सूचनाओं के अनुसार विश्वविद्यालय के 22 छात्रावासों में से अधिकांश में मेस संचालन से जुड़े नियम, टेंडर प्रक्रिया, ठेकेदार चयन और प्रशासनिक आदेशों की जानकारी या तो पूरी तरह “शून्य” बताई गई या फिर अधूरी दी गई। कई प्रमुख हॉस्टलों जैसे सरोजिनी, कस्तूरबा, नेहरू, टैगोर और पटेल भवन में बिंदु 1 से 8 तक कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि पिछले पाँच वर्षों से मेस संचालन के लिए कोई भी ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। आरटीआई जवाबों से संकेत मिलता है कि जिन ठेकेदारों के पास पहले से मेस का संचालन था, उन्हें ही बार-बार एक्सटेंशन देकर काम सौंपा जाता रहा।
और खास बात ये है कि कुछ ही चुनिन्दा ठेकेदार हैं जो कई वर्षों से एक नहीं बल्कि दो हॉस्टल के मेस संचालक बनकर मलाई चाट रहे हैं जिनके लिए कोई टेंडर नहीं होता बस सेटिंग से एक्सटेंशन होता है और ऐसे ही पंतनगर में हॉस्टल मेस के पीछे भ्रष्टाचार का खेल बदस्तूर चलता रहता है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है और नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है। इतना ही नहीं, कई मामलों में यह भी सामने आया कि ठेकेदारों के आवश्यक दस्तावेज पूर्ण नहीं हैं, इसके बावजूद वे लगातार मेस संचालन कर रहे हैं। टेंडर से जुड़े अहम दस्तावेज जैसे NIT, बिडर सूची, तकनीकी मूल्यांकन रिपोर्ट, फाइनेंशियल बिड और चयन समिति की कार्यवाही अधिकांश मामलों में उपलब्ध नहीं कराए गए। कई ठेकेदारों के पास सोल्वेंसी प्रमाण पत्र तक नहीं है जो कि हॉस्टल टेंडर लिस्ट का प्रमुख दस्तावेज़ है। हाल ही में विश्वविद्यालय को डॉ. शिवेंद्र कश्यप के रूप में नया कुलपति मिला, जिससे उम्मीद थी कि परिसर में व्याप्त अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा। लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह उम्मीद अभी तक पूरी होती नजर नहीं आ रही है। मेस संचालन के लिए बनाई गई नीति-नियमावली भी प्रभावी रूप से लागू नहीं हो पाई है।
आपको बता दें डॉ. शिवेंद्र कुमार कश्यप पर पूर्व में प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे, जिनके आधार पर विभागीय जांच और चार्जशीट जारी की गई थी। हालांकि, वर्ष 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रक्रिया संबंधी त्रुटियों के आधार पर उक्त चार्जशीट को निरस्त कर दिया था। सूत्रों के अनुसार विश्वविद्यालय में ठेकों के आवंटन को लेकर अंदरखाने एक अलग ही तंत्र काम कर रहा है, जहाँ “करीबी” ठेकेदारों को प्राथमिकता मिलती है। आरोप तो यहां तक हैं कि एक ही ठेकेदार वर्षों तक अलग-अलग हॉस्टलों में बना रहता है, जिससे “भ्रष्टाचार की पंचवर्षीय योजना” जैसा माहौल तैयार हो गया है। फिलहाल आरटीआई की प्रक्रिया जारी है आने वाले समय में पंतनगर विश्वविध्यालय को लेकर और भी खुलासे आपके सामने लेकर आएंगे।