उत्तराखण्डः कपकोट वायरल फोटो-वीडियो विवाद में नया मोड़! आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पीड़िता ने फॉरेंसिक जांच की मांग उठाई
बागेश्वर। बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र में वर्ष 2024 से सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित अश्लील फोटो और वीडियो को लेकर चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से चरित्रहनन और बदनाम करने के आरोप में मुख्य आरोपी जगदीश गोस्वामी को गिरफ्तार कर लिया है। हालांकि, आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद मामला शांत होता नहीं दिख रहा है। मामले में पीड़िता ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें केवल गिरफ्तारी से न्याय नहीं मिलेगा, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष और फॉरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए। पीड़िता ने आरोपी की गिरफ्तारी के बाद फेसबुक पर एक नया वीडियो जारी कर अपनी मांग दोहराई। उनका कहना है कि पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि फोटो की सत्यता क्या है? और इस मामले में वर्ष 2024 में शिकायत दिए जाने के बावजूद तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से उन्हें और उनके परिवार को मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक पीड़ा का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि अब पुलिस को मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि वायरल तस्वीर असली है, या नकली। उनका कहना है कि फॉरेंसिक जांच से ही सच्चाई सामने आएगी और उसके बाद दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। इस पूरे प्रकरण के बीच स्थानीय विधायक सुरेश गड़िया पर भी निष्पक्ष जांच को लेकर दबाव बढ़ गया है। इससे पहले 30 जुलाई को पीड़िता द्वारा आत्मदाह की चेतावनी दिए जाने और मुकदमा दर्ज होने के बाद विधायक मीडिया के सामने आए थे। उन्होंने वायरल तस्वीर को राजनीतिक साजिश बताते हुए उसका खंडन किया था। इसी बीच पुलिस ने मंगलवार रात मुख्य आरोपी जगदीश गोस्वामी को बैजनाथ क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस और एसओजी की तीन टीमें उसकी तलाश में विभिन्न जिलों में लगातार दबिश दे रही थीं। गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित सामग्री का स्रोत क्या था और उसका सोशल मीडिया पर प्रसार किस प्रकार हुआ। पीड़िता ने एक अन्य वीडियो में पुलिस-प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वह अपने परिवार के साथ आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल सच्चाई सामने लाना और अपने सम्मान की रक्षा करना है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पीड़िता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पुलिस महानिदेशक, राष्ट्रीय महिला आयोग, उत्तराखंड राज्य महिला आयोग तथा अन्य संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित कराने की अपील की है।