उत्तराखण्डः देहरादून के दो होमगार्ड जवानों को ड्यूटी से हटाने के मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए जारी प्रतिबंधात्मक आदेश किए निरस्त
नैनीताल। देहरादून के दो होमगार्ड जवानों को ड्यूटी से प्रतिबंधित किए जाने के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने दोनों जवानों के खिलाफ जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों को निरस्त करते हुए कहा कि कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना इस तरह की कार्रवाई नहीं की जा सकती। सुनवाई के दौरान डायरेक्टर जनरल होमगार्ड डॉ. पीवीके प्रसाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित हुए। अदालत ने उनसे पूछा कि उन्होंने किस वैधानिक अधिकार के तहत यह कार्रवाई की, लेकिन न्यायालय को इसका संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जा सका। इसके बाद हाईकोर्ट ने दोनों प्रतिबंधात्मक आदेशों को निरस्त कर दिया। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुरूप और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए कोई कार्रवाई करना चाहता है, तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र होगा। बता दें कि देहरादून के दो होमगार्ड जवानों, अजीत और दिनकर, ड्यूटी से प्रतिबंधित को चुनौती देते हुए कहा की दोनों को 12 जून को नोटिस जारी कर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने ड्यूटी के दौरान शराब का सेवन किया। नोटिस में यह भी उल्लेख था कि डायरेक्टर जनरल होमगार्ड के निर्देश पर एक जवान को एक वर्ष और दूसरे को छह महीने के लिए ड्यूटी से प्रतिबंधित किए जाने का प्रस्ताव है। जवानों ने अपने जवाब में आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि संबंधित दिन वे ड्यूटी पर ही मौजूद नहीं थे और उनके खिलाफ ऐसा कोई मामला भी दर्ज नहीं है। इसके बावजूद 15 जून से एक जवान को एक वर्ष और दूसरे को छह महीने के लिए ड्यूटी से प्रतिबंधित कर दिया गया। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए दलील दी गई कि उत्तराखंड होमगार्ड अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत बिना विधिवत जांच और सुनवाई के इस प्रकार का दंडात्मक आदेश पारित किया जा सके। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अधिनियम के अनुसार होमगार्ड कर्मियों के साथ भी नियमानुसार जांच और प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।