महायुद्ध की कगार पर दुनिया! ईरान का अमेरिकी नौसैनिक अड्डे और तेल टैंकरों पर मिसाइल हमला, पलटवार में अमेरिका ने शुरू किए विनाशकारी हवाई हमले, 84 के पार पहुंचा क्रूड ऑयल
दुबई। मध्य-पूर्व (मिडल-ईस्ट) में छिड़ी सैन्य जंग अब बेहद खतरनाक और बेकाबू मोड़ पर पहुंच चुकी है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी आमने-सामने के सैन्य टकराव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को हिलाकर रख दिया है। ईरान की सेना ने जहां खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी नौसेना के सबसे बड़े मुख्यालय पर मिसाइलों और ड्रोनों से सीधा प्रहार किया है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक तेल आपूर्ति के सबसे संवेदनशील मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में संयुक्त अरब अमीरात के तेल टैंकरों पर घातक क्रूज मिसाइलों से हमला किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी वायुसेना ने भी अब ईरान पर अब तक के सबसे बड़े और विनाशकारी हवाई हमले शुरू कर दिए हैं।
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने मंगलवार को एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उसने बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट मुख्यालय पर मिसाइलों और ड्रोनों की बौछार कर दी है। ईरान के अनुसार, इस हमले में अमेरिकी नौसैनिक अड्डे का मुख्य ईंधन डिपो धू-धू कर जल उठा है। अमेरिका का अभेद्य माना जाने वाला 'पैट्रियट एयर डिफेंस रडार', एयर कंट्रोल रडार और सी-रैम अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम पूरी तरह तबाह हो गए हैं। मानव रहित सतही जहाजों के नियंत्रण और निगरानी केंद्र को मलबे में तब्दील कर दिया गया है। ईरान ने इसे अमेरिकी हमलों का 'प्रतिशोध' बताया है। हालांकि, अमेरिकी सेना और बहरीन प्रशासन ने अभी तक आधिकारिक रूप से इस नुकसान की पुष्टि नहीं की है, लेकिन बहरीन में मिसाइल हमलों के सायरन गूंजने से दहशत का माहौल है। तनाव उस वक्त और हिंसक हो उठा जब यूएई के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि होर्मुज जलडमरूमध्य में उसके दो विशाल तेल टैंकरों मोम्बासा' और 'अल बहिया' पर ईरान ने दो क्रूज मिसाइलें दाग दीं। मिसाइल लगते ही दोनों टैंकर धधकती आग के शोलों में बदल गए। इस कायरतापूर्ण हमले में मोम्बासा टैंकर पर तैनात एक भारतीय चालक दल के सदस्य की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में चार भारतीय और दो यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है। यूएई ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा है कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए ईरान को करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ईरान के इस दुस्साहस के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार तड़के ईरान के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया। ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान पर दोबारा बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। ट्रंप ने कहा हम ईरान पर बेहद जोरदार हमला कर रहे हैं और यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी सैन्य क्षमताएं मलबे में नहीं मिल जातीं। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की समुद्री नाकेबंदी (ब्लॉकेड) को दोबारा सख्ती से लागू किया जा रहा है। अब होर्मुज से गुजरने वाले अन्य देशों के व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षा देने की लागत भी उन्हीं देशों से वसूली जाएगी। इस महायुद्ध के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी और महंगाई का काला साया मंडराने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के कुल कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है, वहां युद्ध छिड़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमत एक महीने के उच्चतम स्तर $84 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सैन्य टकराव अगले कुछ दिनों तक और खिंचा, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल का आंकड़ा भी पार कर सकती हैं। इससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत होने के साथ-साथ परिवहन, मालभाड़े और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या संयुक्त राष्ट्र (UN) या अन्य वैश्विक शक्तियां इस संभावित तीसरे विश्व युद्ध को टालने में सफल हो पाती हैं या नहीं।