महासंग्रामः होर्मुज से लाल सागर तक हाहाकार! अमेरिका की नई स्ट्राइक से दहला ईरान, जॉर्डन बॉर्डर पर हाई अलर्ट! ईरान की चेतावनी- तेल-गैस सप्लाई सबके लिए या किसी के लिए नहीं?

Major Confrontation: Chaos from Hormuz to the Red Sea! Iran shaken by a new US strike; high alert at the Jordan border! Iran's warning: Oil and gas supplies—for everyone or for no one?

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष की आग में झुलस रहा है। कुछ दिनों पहले हुए अस्थायी संघर्ष विराम के टूटने के बाद अमेरिका और ईरान फिर आमने-सामने आ गए हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के तटीय रक्षा तंत्र, क्रूज मिसाइल भंडारण केंद्रों और रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर व्यापक हवाई और मिसाइल हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं और पूरी दुनिया को चेतावनी दी है कि यदि उस पर दबाव जारी रहा तो पश्चिम एशिया से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। इस संघर्ष ने न केवल सैन्य तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। तनाव की शुरुआत तब और तेज हो गई जब पिछले शनिवार रात ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान कर दिया। युद्ध से पहले विश्व के लगभग 20 प्रतिशत तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होती थी। ईरान के इस कदम को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के खिलाफ बताते हुए नौसैनिक कार्रवाई तेज कर दी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार भारतीय समयानुसार सुबह लगभग साढ़े तीन बजे ईरान के ग्रेटर टुंब द्वीप स्थित तटीय रक्षा प्रणाली, एंटी-शिप मिसाइल लॉन्चर और क्रूज मिसाइल भंडारण केंद्रों पर हमला किया गया। करीब 90 मिनट तक चले इस अभियान में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके लगभग नौ घंटे बाद अमेरिकी सेना ने दूसरी बार भी हमले किए। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की समुद्री सैन्य क्षमता को कमजोर करना था ताकि होर्मुज क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही सुरक्षित बनाई जा सके।

तेल टैंकर पर भी मिसाइल हमला
अमेरिकी सेना ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए ईरान के खर्ग द्वीप की ओर जा रहे एक तेल टैंकर को भी निशाना बनाया। सेंट्रल कमांड के अनुसार टैंकर को कई बार चेतावनी दी गई थीए लेकिन उसके नहीं रुकने पर उसे मिसाइल से निष्क्रिय कर दिया गया। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा कंपनियों में चिंता और बढ़ गई है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक अमेरिकी हमलों में अहवाज शहर के चार अलग-अलग इलाकों तथा बंदर अब्बास को भी निशाना बनाया गया। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े जनहानि की पुष्टि नहीं हुई। वहीं सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने दावा किया कि अहवाज के एक अस्पताल के निकट भी विस्फोट हुआ, जहां बच्चों के कैंसर का इलाज किया जाता है। सुरक्षा कारणों से अस्पताल को खाली कराया गया।

ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर हमले
ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई का जवाब देते हुए क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। कुवैत सरकार ने पुष्टि की कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान से दागी गई चार मिसाइलों और 21 ड्रोन को मार गिराया। हमले में कुछ संपत्ति को नुकसान पहुंचा लेकिन किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली। ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने कहा कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवस्था बनाए रखने पर निर्भर करती है। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि ऊर्जा निर्यात या तो सभी के लिए होगा या फिर किसी के लिए नहीं। इस बयान को दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए गंभीर संकेत माना जा रहा है।