नैनीताल:सोनम वांगचुक के समर्थन में दिल्ली जा रहे प्रभात ध्यानी को ट्रेन से उतारने पर हाईकोर्ट ने पुलिस से मांगा जवाब, किस कानून के तहत उठाया?

The High Court sought an answer from the police on the removal of Prabhat Dhyani from the train while he was going to Delhi in support of Sonam Wangchuk. Under which law was he removed?

सोनम वांगचुक के समर्थन में जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली जा रहे उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं वरिष्ठ आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी को ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का मामला सोमवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर किस कानूनी प्रावधान के तहत एक व्यक्ति को इस तरह हिरासत में लिया गया।


याचिका में बताया गया कि प्रभात ध्यानी रविवार शाम ऋषिकेश से ट्रेन के जनरल कोच में सवार होकर दिल्ली के लिए रवाना हो रहे थे। उन्होंने इससे पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर जानकारी दी थी कि वह उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के साथियों के साथ जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन और सोनम वांगचुक के समर्थन में शामिल होने जा रहे हैं।
बताया गया कि ट्रेन रवाना होने से पहले रेलवे स्टेशन पर पहुंची पुलिस ने उन्हें ट्रेन से उतार लिया। शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उन्हें किस एजेंसी ने और किस कारण हिरासत में लिया है। उनके साथ मौजूद लोगों और परिजनों को भी कई घंटों तक उनकी कोई जानकारी नहीं मिल सकी। देर रात पता चला कि उन्हें रामनगर पुलिस अपने साथ ले गई है। इस दौरान सोशल मीडिया पर भी उनकी हिरासत को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहीं।
याचिका में यह भी कहा गया कि प्रभात ध्यानी का उसी दिन एम्स में पहले से निर्धारित चिकित्सकीय अपॉइंटमेंट था, लेकिन हिरासत में लिए जाने के कारण वह वहां भी नहीं पहुंच सके।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य पक्ष से पूछा कि क्या कोई ऐसा कानूनी प्रावधान है जो किसी व्यक्ति को बिना किसी अपराध के केवल यात्रा करने या प्रदर्शन में शामिल होने की आशंका के आधार पर हिरासत में लेने की अनुमति देता है। कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि यदि बाद में उन्हें छोड़ना ही था तो एक स्वतंत्र वयस्क नागरिक को किसी अन्य व्यक्ति के सुपुर्द क्यों किया गया, जबकि वह अपनी इच्छा से कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र है।
सुनवाई के दौरान यह तर्क भी सामने आया कि यदि दिल्ली पुलिस की ओर से लोगों को दिल्ली सीमा पर रोकने संबंधी कोई निर्देश थे, तो ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर की गई कार्रवाई का आधार क्या था। कोर्ट ने इस पहलू पर भी स्पष्टीकरण मांगा।
मामले में आगे की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने अगली तिथि मंगलवार निर्धारित की है।