कुमाऊं यूनिवर्सिटी का गजब सिस्टम! छात्र ने परीक्षा दी, रिजल्ट भी आया, RTI से मांगी उत्तरपुस्तिका!अब उत्तरपुस्तिका देने से पहले छात्र से ही मांगा जा रहा परीक्षा में उपस्थिति का प्रमाण!
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिस छात्र ने विश्वविद्यालय के डीएसबी कॉलेज में परीक्षा दी, विश्वविद्यालय ने ही उसका परिणाम घोषित किया, परीक्षाफल जारी किया और उसे उत्तीर्ण भी बताया।लेकिन अब उसी छात्र को अपनी परीक्षा में उपस्थिति का प्रमाण देने के लिए कहा जा रहा है। यानी परीक्षा भी विश्वविद्यालय की, परिणाम भी विश्वविद्यालय का और अब उपस्थिति का प्रमाण छात्र से !

मामले के अनुसार एमजेएमसी चतुर्थ सेमेस्टर के एक छात्र ने विश्वविद्यालय के ऑनलाइन RTI पोर्टल के जरिए Photo Journalism और The Art and Essentials of Anchoring विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं की फोटोकॉपी मांगी थी। इसके लिए निर्धारित ₹138 शुल्क भी जमा किया गया। 9 अगस्त 2026 को किए गए ऑनलाइन आवेदन में छात्र का नाम, रोल नंबर, एनरोलमेंट नंबर, पाठ्यक्रम, सेमेस्टर, परीक्षा वर्ष समेत तमाम विवरण दर्ज हैं। आवेदन में परिणाम घोषित होने की तारीख 24 जुलाई 2026 भी दर्ज है। छात्र के मुताबिक, ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया में रिजल्ट भी अपलोड किया गया था। इसके बाद विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव/लोक सूचना अधिकारी (परीक्षा) की ओर से 5 सितंबर को जारी पत्र में छात्र से संबंधित परीक्षा का “उपस्थिति/जांच पत्र” उपलब्ध कराने को कहा गया। यानी जिस परीक्षा में छात्र के बैठने, उसके रोल नंबर और विषयों का रिकॉर्ड विश्वविद्यालय की अपनी परीक्षा व्यवस्था में मौजूद है, उसी परीक्षा की उत्तरपुस्तिका लेने के लिए अब छात्र से उसकी उपस्थिति का प्रमाण मांगा जा रहा है।

आरटीआई में आए विश्वविद्यालय के जवाब ने उल्टा अब विश्वविद्यालय की रिकॉर्ड व्यवस्था पर ही सीधा प्रश्न खड़ा कर दिया है कि परीक्षा किसने करवाई? विश्वविद्यालय ने,परिणाम किसने जारी किया?विश्वविद्यालय ने। उत्तरपुस्तिका किसके पास है? विश्वविद्यालय के पास। फिर उपस्थिति का रिकॉर्ड भी तो विश्वविद्यालय के ही परीक्षा अभिलेखों में होना चाहिए।
खास बात यह भी है कि छात्र ने किसी तरह की पुनर्मूल्यांकन की मांग नहीं की। उसने सिर्फ अपनी जांची गई उत्तरपुस्तिकाओं की फोटोकॉपी मांगी है। इसके लिए विश्वविद्यालय के ऑनलाइन पोर्टल पर बाकायदा आवेदन किया, संबंधित दोनों पेपर दर्ज किए और शुल्क भी जमा किया।
ऐसे में विश्वविद्यालय को आरटीआई के जवाब में ये बताना चाहिए था उत्तरपुस्तिका की प्रति देने से पहले छात्र से “उपस्थिति/जांच पत्र” मांगने का प्रावधान आखिर किस नियम में है? और यदि यह रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध है तो उसे छात्र से मांगने की जरूरत क्यों पड़ी?
कागजों पर दर्ज परीक्षा परिणाम और विश्वविद्यालय के अपने परीक्षा अभिलेखों के बावजूद एक छात्र को अपनी ही परीक्षा में उपस्थिति साबित करने के लिए दस्तावेज जुटाने पड़ें, तो यह व्यवस्था की सहजता पर नहीं, रिकॉर्ड संभालने और सूचना देने की प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़े करता है।