जंतर-मंतर आंदोलन की गूंज नैनीताल तक,पेपर लीक के विरोध में नैनीताल के युवाओं ने बुलंद की आवाज,सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे छात्र,राइट टू एजुकेशन हमारा अधिकार!
देशभर में पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन की गूंज अब सरोवर नगरी नैनीताल तक पहुंच गई है। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के समर्थन में रविवार को बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, अभिभावक और शिक्षक डीएसए मैदान में एकत्र हुए। हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक की घटनाओं पर जवाबदेही तय करने और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा की मांग उठाई।

प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि शिक्षा का अधिकार प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है, लेकिन लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को संकट में डाल दिया है।

प्रदर्शनकारी शिक्षा रावत
उनका कहना था कि पिछले कई वर्षों में अनेक प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, जिससे मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का विश्वास व्यवस्था से उठता जा रहा है। छात्रों ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से कई युवाओं पर मानसिक दबाव बढ़ा है और कुछ विद्यार्थियों ने आत्महत्या जैसा गंभीर कदम भी उठाया है। ऐसे में सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे दिल्ली में जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में अपनी एकजुटता दर्ज कराने के लिए एकत्र हुए हैं।

उन्होंने बताया कि वे व्यक्तिगत कारणों से दिल्ली नहीं पहुंच सके, इसलिए नैनीताल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा आंदोलन नहीं है, बल्कि पूरी तरह छात्रों और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा जनसरोकार का मुद्दा है।

छात्रों ने स्पष्ट कहा कि उनकी एकमात्र मांग शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई, दोषियों की जवाबदेही तय करना और शिक्षा नीतियों में आवश्यक सुधार लागू करना है। उनका कहना था कि सरकार को इस गंभीर विषय पर खुलकर संवाद करना चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी एवं कठोर व्यवस्था लागू करनी चाहिए।

प्रदर्शन में डीएसबी परिसर सहित विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राएं, शिक्षक, अभिभावक तथा सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग भी शामिल रहे। सभी ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विद्यार्थियों के अधिकारों की रक्षा की मांग दोहराई।