ईरान का खौफ: ट्रंप की सुरक्षा के लिए अंकारा में चला गुप्त ऑपरेशन! कैमरों के सामने एयर फोर्स वन में बैठे, फिर कैटरिंग ट्रक से बदला विमान
वाशिंगटन। तुर्किए में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद गोपनीय अभियान चलाए जाने का दावा सामने आया है। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से संभावित सुरक्षा खतरे को देखते हुए अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ट्रंप की तुर्किए से ब्रिटेन तक की यात्रा को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ट्रंप को कैमरों के सामने पुराने एयर फोर्स वन में सवार कराया गया, लेकिन कुछ देर बाद उन्हें एक कैटरिंग ट्रक के जरिए दूसरे विमान तक ले जाया गया। बताया गया कि इस पूरे ऑपरेशन का उद्देश्य राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा को छिपाना और संभावित सुरक्षा खतरे को कम करना था। उस समय व्हाइट हाउस की ओर से बताया गया था कि ट्रंप तुर्किए से ब्रिटेन के लिए एयर फोर्स वन से रवाना हुए हैं। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार वास्तविकता इससे अलग थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अंकारा एयरपोर्ट पर ट्रंप को पत्रकारों और कैमरों के सामने पुराने एयर फोर्स वन में सवार कराया गया। राष्ट्रपति के विमान में पहुंचने की तस्वीरें भी सामने आईं। इसके कुछ ही समय बाद ट्रंप को विमान से बाहर निकालकर एक कैटरिंग ट्रक के जरिए एयरपोर्ट के दूसरे हिस्से में ले जाया गया। कैटरिंग ट्रक आमतौर पर विमान में भोजन, पेय पदार्थ और अन्य जरूरी सामग्री पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इसी वाहन के जरिए ट्रंप को अमेरिकी वायुसेना के सी-32ए विमान तक ले जाने का दावा किया गया है। इसके बाद ट्रंप ने इसी विमान से ब्रिटेन के लिए उड़ान भरी। न्यूयॉर्क टाइम्स भी इससे मिलती-जुलती रिपोर्ट पहले प्रकाशित कर चुका है। ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए एक नए और अपग्रेड किए गए विमान से अंकारा पहुंचे थे। यह विमान कतर की ओर से उपलब्ध कराया गया था और ट्रंप की इस यात्रा में पहली बार इस्तेमाल हुआ था। हालांकि, तुर्किए से ब्रिटेन रवाना होते समय राष्ट्रपति ने अचानक पुराने एयर फोर्स वन का इस्तेमाल करने का फैसला किया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इसे पुरानी यादों से जोड़ते हुए कहा था कि नया विमान ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहाल बेस पर ही रहेगा, ताकि वहां मौजूद अमेरिकी सैनिक उसे देख सकें।
पत्रकारों को भी नहीं थी असली यात्रा की जानकारी
गुप्त ऑपरेशन की सबसे खास बात यह रही कि ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों को भी उनकी वास्तविक यात्रा की जानकारी नहीं थी। पत्रकारों को लगा कि वे राष्ट्रपति के साथ उसी पुराने एयर फोर्स वन में ब्रिटेन जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों को विमान की खिड़कियों के शेड बंद रखने के लिए कहा गया था। बाद में जब पत्रकारों ने ट्रंप से इसका कारण पूछा तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि शायद वे 'खतरनाक उड़ान' पर थे। इस पूरी व्यवस्था के दौरान राष्ट्रपति की वास्तविक लोकेशन और विमान की जानकारी को सीमित रखने की कोशिश की गई, ताकि संभावित खतरे की आशंका को कम किया जा सके।
सी-32ए पहले पहुंचा, बाद में पहुंचा एयर फोर्स वन
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप को लेकर अमेरिकी वायुसेना का सी-32ए विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयर फोर्स वन और मीडिया दल भी वहां पहुंच गया। हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ब्रिटेन पहुंचने के बाद ट्रंप को सी-32ए विमान से पुराने एयर फोर्स वन में किस तरह स्थानांतरित किया गया। ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल के अनुसार, राष्ट्रपति रात करीब 10:56 बजे पुराने एयर फोर्स वन से नीचे उतरे। ट्रंप ने वहां मौजूद पत्रकारों की ओर शांति का संकेत किया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं की। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद अमेरिकी सैनिकों का अभिवादन किया और एयर फोर्स वन से वाशिंगटन के लिए आगे की यात्रा पूरी की।
पहले भी बदला गया था अमेरिकी राष्ट्रपति का विमान
अमेरिकी राष्ट्रपतियों की सुरक्षा के लिहाज से यात्रा के दौरान विमान बदलने का ऐसा उदाहरण पहले भी सामने आ चुका है। वर्ष 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की भारत से पाकिस्तान यात्रा के दौरान विमान बदला गया था। उस समय क्लिंटन को गल्फस्ट्रीम विमान से पाकिस्तान ले जाया गया था। ट्रंप की तुर्किए से ब्रिटेन यात्रा में सामने आए इस कथित गुप्त ऑपरेशन ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था और संभावित खतरों से निपटने के लिए अपनाई जाने वाली गोपनीय रणनीतियों को चर्चा में ला दिया है।