झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन पर गरमाई सियासत:आधी रात धरनास्थल पहुंची पुलिस,बीजेपी बोली-छात्रों को हटाने की साजिश
राँची। झारखंड में बिहार लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक संग्राम में बदल गया है। राँची के ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में नौ दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के बीच बुधवार आधी रात उस वक्त भारी तनाव की स्थिति बन गई, जब भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुँचा। प्रशासन की इस अचानक कार्रवाई की खबर फैलते ही कई वरिष्ठ भाजपा नेता देर रात ही धरनास्थल पहुँच गए और सरकार पर रात के अंधेरे में बलपूर्वक प्रदर्शनकारियों को हटाने व डराने का गंभीर आरोप लगाया।
आधी रात करीब 12:30 बजे स्टेडियम पहुँचे भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही ने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी का यह आंदोलन अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश के युवाओं की उम्मीदों से जुड़ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि रात के अंधेरे में छात्रों को डराने की कोशिश की जा रही है और प्रशासन को तय सीमाओं में रहकर काम करना चाहिए। वहीं भाजपा विधायक राज सिन्हा और नेता प्रतुल सहदेव ने सवाल उठाया कि आधी रात को उपायुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का 500 से 600 पुलिसकर्मियों के साथ पहुँचना सामान्य बात नहीं है। भाजपा नेताओं ने साफ किया कि वे आंदोलन का हिस्सा बनने नहीं, बल्कि छात्रों को नैतिक समर्थन देने पहुँचे हैं। धरने पर बैठे छात्र प्रतिनिधि प्रेम नायक ने आरोप लगाया कि भूख हड़ताल के नौवें दिन देर रात पहुंची पुलिस ने अभ्यर्थियों के बीच फूट डालने और उन्हें धमकाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि पुलिस अधिकारियों ने छात्रों से पहचान संबंधी कागजात मांगे और बिना वजह सवाल-जवाब किए। प्रेम नायक ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह से संवैधानिक है और यदि सरकार उन्हें जबरन उठाकर जेल भी भेजती है, तो वे वहां भी अपनी भूख हड़ताल जारी रखेंगे। छात्रों और विपक्षी नेताओं के आरोपों को राँची के सिटी एसपी पारस राणा ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की मंशा किसी भी प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेने या जबरन हटाने की नहीं थी। सिटी एसपी ने बताया कि बीते दिनों हुई पथराव की घटना के बाद सुरक्षा के लिहाज से सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने बताया कि आंदोलन की कोर कमेटी ने ही आशंका जताई थी कि कुछ असामाजिक तत्व या आपराधिक प्रवृत्ति के लोग इस प्रदर्शन में घुसकर माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में पुलिस टीम कुछ लोगों की पहचान की पुष्टि करने और छात्रों से संवाद स्थापित करने पहुँची थी। उन्होंने कहा कि पुलिस के पहुँचते ही कुछ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भ्रामक वीडियो बनाकर अफवाह फैला दी। नौ दिनों से जारी इस आंदोलन और आधी रात को हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद अब राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है। एक तरफ जहां विपक्ष इस मुद्दे पर हेमंत सोरेन सरकार को घेर रहा है, वहीं दूसरी तरफ गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों के बीच छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत के जरिए कोई रास्ता निकलता है या यह आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा।