उत्तराखंड हाईकोर्ट में मदरसों और स्कूलों के नए मानकों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई! सरकार ने मांगा समय, अगली सुनवाई 1 सितंबर को

Hearing in the Uttarakhand High Court on a petition challenging new standards for madrasas and schools! The government sought time; the next hearing is scheduled for September 1.

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट में मदरसों और स्कूलों से जुड़े उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के प्रावधानों और मानकों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। मामले में सरकार की ओर से अतिरिक्त समय मांगा गया, जिस पर याचिकाकर्ता की ओर से आपत्ति दर्ज कराते हुए अब तक दाखिल नहीं किए गए दस्तावेज कोर्ट में प्रस्तुत करने की मांग की गई। मामले की अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 1 सितंबर की तारीख तय की है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में मदरसों और स्कूलों से जुड़े उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एडिशनल एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को बताया कि एडवोकेट जनरल की ओर से एक आवेदन प्रस्तुत किया गया है, जिसमें मामले की सुनवाई के लिए कुछ और समय मांगा गया है और इसे दो-तीन सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया गया है। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अहमद शमशाद ने सरकार के समय मांगने पर आपत्ति नहीं जताई, लेकिन कहा कि यदि मामले को दो-तीन सप्ताह बाद सुना जाना है तो इस बीच वे सभी दस्तावेज और जवाब दाखिल किए जाएं, जो अभी तक कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।

बता दें कि विभिन्न मदरसा संचालकों द्वारा याचिका दायर कर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई है, जिनमें मदरसा और स्कूली शिक्षा से जुड़े मानकों को लागू किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि कम समय में नए मानकों को पूरा करना इन मदरसों के लिए मुश्किल है और इसके चलते आने वाले शैक्षणिक सत्र में इनके बंद होने की स्थिति पैदा हो सकती है। साथ ही केबीएन सोसाइटी, ऊधमसिंह नगर द्वारा दायर याचिका को भी इसी याचिका में समायोजित किया गया है जिसमें कहा गया है की वर्ष 2006 से मदरसों का संचालन किया जा रहा है। इन संस्थानों में धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है और इन्हें उत्तराखंड सरकार से मान्यता प्राप्त है। जिनमें मदरसा और स्कूली शिक्षा से जुड़े मानकों को लागू किया गया है। इतने कम समय में नए मानकों को पूरा करना इन मदरसों के लिए मुश्किल है और इसके चलते आने वाले शैक्षणिक सत्र में इनके बंद होने की स्थिति पैदा हो सकती है। इन संस्थानों में करीब 550 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। संस्थानों के बंद होने की स्थिति में छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को प्राप्त शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने के मौलिक अधिकार का भी हवाला दिया गया है। वहीं आज याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी बताया कि नए संशोधन के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जिसे नई रिट याचिका संख्या 599/2026 के माध्यम से चुनौती दी गई है। मामले की अगली सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने 1 सितंबर की तिथि नियत की है।