दिल्ली हाईकोर्ट से न्यूज़ एंकर अंजना ओम कश्यप को अंतरिम राहत नहीं, खान सर समेत अन्य को नोटिस जारी
दिल्ली हाईकोर्ट ने वरिष्ठ टीवी पत्रकार अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क द्वारा दायर 2 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे में फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने लोकप्रिय शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कथित आपत्तिजनक सामग्री हटाने संबंधी अंतरिम आदेश जारी करने से फिलहाल इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने प्रतिवादियों से इस मामले में जवाब मांगा है। यह विवाद उस टीवी बहस के बाद शुरू हुआ, जिसमें अंजना ओम कश्यप ने नीट परीक्षा में गड़बड़ियों और शिक्षा क्षेत्र पर चर्चा के दौरान ऑनलाइन "स्टार टीचर्स" के बढ़ते प्रभाव पर सवाल उठाए थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कुछ ऑनलाइन शिक्षकों की कार्यशैली और प्रभाव को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणी की थी। इसके बाद खान सर और कई अन्य शिक्षकों तथा सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क का आरोप है कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर एक संगठित अभियान चलाया गया, जिसमें उन्हें अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया गया और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। याचिका में यह भी कहा गया है कि कुछ पोस्टों में उनके परिवार से जुड़ी निजी जानकारी तक साझा की गई।
अदालती दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार,अंजना ओम कश्यप ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि खान सर और अन्य लोगों ने उन्हें "बिकाऊ पत्रकार", "चाटुकार" तथा "फेक न्यूज की दुकान" जैसे शब्दों से संबोधित किया था। इन्हीं टिप्पणियों को आधार बनाकर मानहानि का दावा किया गया है। विवाद की शुरुआत उस टीवी चर्चा से हुई, जिसमें अंजना ओम कश्यप ने कुछ ऑनलाइन शिक्षकों और तथाकथित "स्टार टीचर्स" की भूमिका पर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने ऐसे शिक्षकों पर व्यूज और लोकप्रियता हासिल करने के लिए मुद्दों को उछालने तथा शिक्षा के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने जैसे आरोप लगाए थे साथ ही कौड़ी के टीचर्स कहकर आलोचना की थी इसी टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। सुनवाई के दौरान खान सर पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश मल्होत्रा ने दलील दी कि यदि प्रतिवादियों की पोस्ट हटाई जाती हैं तो अंजना ओम कश्यप द्वारा किए गए संबंधित पोस्ट और टिप्पणियों पर भी समान मानदंड लागू होना चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फिलहाल कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया और मामले को 17 जून के लिए सूचीबद्ध कर दिया।