क्या चुनावी नियमों से ऊपर हैं सत्ता के मंत्री! उत्तराखण्ड में मतदान केंद्र के अंदर कैबिनेट मंत्री की एंट्री पर बवाल, लिंक में जानें क्या है पूरा मामला?

Are ministers in power above election rules? Uproar in Uttarakhand over a cabinet minister entering a polling station; find out the full details at the link.

देहरादून। यूं तो देशभर में चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते आ रहे हैं और विपक्षी दल लगातार सरकार, चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इस बीच उत्तराखण्ड से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल प्रदेश की सियासत गरमाई है, बल्कि मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता और चुनावी प्रोटोकॉल को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, आज टिहरी गढ़वाल के नरेंद्र नगर पालिका चुनाव के दौरान मतदान केंद्र में उस समय बड़ा विवाद हो गया, जब कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल अपने लाव-लश्कर के साथ एक बूथ पर पहुंच गए। इस दौरान यूकेडी कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार विरोध किया। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में भी बहस छिड़ गई है। बता दें कि नगर पालिका नरेंद्रनगर की चुनाव प्रक्रिया के तहत अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र सिंह गुसाईं का नामांकन पत्र निरस्त होने के चलते भाजपा प्रत्याशी और पूर्व पालिकाध्यक्ष राजेंद्र विक्रम सिंह पंवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। जिसके बाद आज सात वार्डों में सभासदों के पद पर मतदान प्रक्रिया संपन्न कराई गई। विपक्ष का आरोप है कि सत्ता का दुरूपयोग करते हुए पहले कांग्रेस प्रत्याशी राजेन्द्र सिंह गुसाईं का नामांकन पत्र निरस्त कराया गया और उसके बाद वार्डों में भी सेंधमारी की कोशिश की गई। यही नहीं विपक्षी दलों से जुड़े लोगों का आरोप है कि इस चुनाव में भी भाजपा ने सत्ता का पूरा दुरूपयोग करते हुए निर्वाचन अधिकारियों के साथ मिलकर दूसरी पार्टियों को समय कम दिया और मामूली बात पर कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन पत्र निरस्त कर दिया। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने के लिए बहुत कम समय दिया गया। फिलहाल इस मामले ने प्रदेश की सियासत गरमा दी है और विपक्ष सत्ताधारी पार्टी पर गंभीर आरोप लगा रहा है। 

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विपक्षी दलों ने मंत्री के आचरण पर सवाल उठाते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और चुनावी नियमों का उल्लंघन बताया है। जानकारी के अनुसार नरेंद्र नगर पालिका चुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं स्थानीय विधायक सुबोध उनियाल मतदान केंद्र के भीतर पहुंच गए। मंत्री के मतदान केंद्र में प्रवेश करते ही उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया। विरोध के दौरान माहौल गर्मा गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होने लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद उस समय और बढ़ गया जब यूकेडी नेत्री प्रमिला रावत ने मतदान केंद्र के भीतर मंत्री की मौजूदगी पर कड़ी आपत्ति जताई। इस दौरान प्रमिला रावत और सुबोध उनियाल के बीच तीखी बहस हुई। मतदान केंद्र परिसर में कुछ देर के लिए गहमागहमी का माहौल बन गया। बढ़ते विवाद और विरोध के बीच मंत्री अपने समर्थकों के साथ वहां से वापस लौट गए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला राजनीतिक रंग ले गया है। कांग्रेस ने भी पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मंत्री सुबोध उनियाल पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की अवहेलना करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति संविधान और चुनावी नियमों से ऊपर नहीं हो सकता।

उन्होंने आरोप लगाया कि मतदान के दौरान मंत्री द्वारा प्रोटोकॉल और निर्वाचन नियमों की अनदेखी करते हुए मतदान केंद्र के भीतर प्रवेश करना गंभीर मामला है। गरिमा दसौनी ने कहा कि जब स्थानीय मतदाताओं और नागरिकों ने इस पर आपत्ति जताई तो मंत्री को संयम और मर्यादा का परिचय देना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय आक्रामक रवैया अपनाया गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मतदान केंद्र में मंत्री के प्रवेश का विरोध कर रही महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया और उनके मोबाइल फोन तक छीनने का प्रयास किया गया। कांग्रेस ने कहा कि यदि सत्ता में बैठे मंत्री ही चुनाव आयोग के नियमों और कानूनों का पालन नहीं करेंगे तो आम जनता से नियमों के सम्मान की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में मतदान प्रक्रिया सर्वोपरि होती है और किसी भी जनप्रतिनिधि या मंत्री को ऐसी कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हों या मतदाताओं पर किसी प्रकार का प्रभाव पड़ने की आशंका पैदा हो। प्रदेश कांग्रेस ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं घटना को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर भी लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब सभी की नजर राज्य निर्वाचन आयोग की संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि शिकायतों के आधार पर जांच शुरू होती है तो यह मामला आगामी दिनों में प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।