दिल्ली अग्निकांड पर बड़ा खुलासा: 6 कमरों की अनुमति, चल रहे थे 25 कमरे! बेसमेंट में बंद थे लोग, इमरजेंसी एग्जिट तक नहीं! आग लगते ही मची चीख-पुकार और कूदे लोग
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लॉरिस स्टे में बुधवार सुबह हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं। आग इतनी भयावह थी कि होटल में फंसे लोगों के पास जान बचाने के लिए खिड़कियों और ऊपरी मंजिलों से छलांग लगाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि कुछ को स्थानीय लोगों और दमकलकर्मियों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। हादसे के बाद सामने आए तथ्यों ने होटल प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि होटल को ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ श्रेणी के तहत केवल 6 कमरों के संचालन की अनुमति दी गई थी, लेकिन परिसर में करीब 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे। इतना ही नहीं, बेसमेंट में भी लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी, जो सुरक्षा मानकों के प्रतिकूल मानी जा रही है।
आग लगी और कुछ ही मिनटों में फैल गई पूरे भवन में
जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह करीब 9 बजे होटल परिसर में आग लगने की सूचना मिली। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे भवन को अपनी चपेट में ले लिया। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। दमकलकर्मियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक भारी नुकसान हो चुका था। होटल के अंदर धुआं भर जाने से कई लोग बाहर नहीं निकल पाए और दम घुटने जैसी स्थिति पैदा हो गई।
बेसमेंट में बंद थे लोग, बाहर से लगा था ताला
जांच के दौरान सामने आया सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि भवन के बेसमेंट में कई लोग रह रहे थे और वहां जाने का केवल एक ही रास्ता था। बताया जा रहा है कि उस रास्ते पर बाहर से ताला लगाया गया था। पुलिस और राहत दल को मौके पर पहुंचकर ताला काटना पड़ा, जिसके बाद अंदर फंसे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया गया। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि बेसमेंट के प्रवेश मार्ग पर ताला क्यों लगाया गया था और क्या यह लापरवाही इस बड़े हादसे का कारण बनी।
नहीं था कोई इमरजेंसी एग्जिट, मुख्य रास्ता बंद होते ही फंस गए लोग
स्थानीय लोगों और जांच एजेंसियों के अनुसार होटल की संरचना में गंभीर खामियां थीं। भवन के अंदर से सुरक्षित बाहर निकलने के लिए कोई वैकल्पिक आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) नहीं बनाया गया था। होटल में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक मुख्य रास्ता था और दुर्भाग्य से आग सबसे पहले उसी हिस्से में लगी। इससे होटल में मौजूद लोग अंदर ही फंस गए और कई लोगों को खिड़कियों व बालकनियों से बाहर निकलने की कोशिश करनी पड़ी।
स्थानीय लोगों ने दिखाई बहादुरी
हादसे के दौरान स्थानीय लोगों ने भी साहस का परिचय दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई लोगों ने सड़क पर गद्दे बिछाकर ऊपरी मंजिलों से कूद रहे लोगों की मदद की। कुछ स्थानीय नागरिक अपनी जान जोखिम में डालकर होटल के अंदर भी पहुंचे और फंसे लोगों को बाहर निकालने में सहयोग किया। राहत एवं बचाव अभियान के दौरान कुल 37 लोगों को सुरक्षित अथवा अचेत अवस्था में बाहर निकाला गया। इनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो होटल में ठहरे हुए थे। अग्निकांड में घायल हुए लोगों को मैक्स अस्पताल, एम्स ट्रॉमा सेंटर और पंडित मदन मोहन मालवीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और डॉक्टरों की विशेष टीम उनका उपचार कर रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जताया शोक
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि मालवीय नगर की इस त्रासदी में हुई जनहानि अत्यंत पीड़ादायक है और सरकार प्रभावित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), कैट्स एम्बुलेंस सेवा तथा अन्य आपातकालीन एजेंसियों को सक्रिय कर दिया गया था। उनकी त्वरित कार्रवाई से कई लोगों की जान बचाई जा सकी।