Aug 19, 2026 Login

फायदे की राजनीतिः पांच साल पहले यशपाल ने मझधार में छोड़ा था हरदा का हाथ, अब फिर आए साथ! जनता बोली-यही है उत्तराखण्ड का विकास

Politics of profit: Five years ago Yashpal had left Harda's hand in the middle, now come together again! People said - this is the development of Uttarakhand

रुद्रपुर (मनोज कुमार)। कहते हैं राजनीति में कोई किसी का सगा नही होता। राजनेता कभी इधर तो कभी उधर होते रहते हैं। यूं तो सियासत में दलबदल की खबरें आम हैं, लेकिन इससे आमजन और विकास को कितना फर्क पड़ता है इससे जनप्रतिनिधियों को कोई लेना-देना नहीं होता, उन्हें बस अपनी सियासत चमकाने और फायदे से मतलब होता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं उत्तराखण्ड में अभी-अभी हुए सियासी बदलाव की। दरअसल आज उत्तराखण्ड की सियासत में एक बार फिर दलबदल हुआ है। भाजपा सरकार में मंत्री पद पर नियुक्त बाजपुर विधायक यशपाल आर्य और उनके पुत्र नैनीताल विधायक संजीव आर्य ने आज एक बार फिर कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया है। बता दें कि यशपाल आर्य ने 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले अपने बेटे संजीव आर्य के साथ कांग्रेस के हाथ को झटकते हुए भाजपा का दामन था। इसके बाद भाजपा ने यशपाल आर्य को बाजपुर तो संजीव आर्य को नैनीताल विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा था। इन दोनों सीटों पर भाजपा की जीत हुई। वैसे तो बाजपुर यशपाल आर्य का गढ़ माना जाता है और वह पुराने नेताओं में अपनी गिनती रखते हैं, वह भाजपा में जाने से पहले कांग्रेस सरकार में भी मंत्री पद पर बने हुए थे। लेकिन उनके पुत्र संजीव आर्य ने मोदी लहर में अपनी नैय्या पार की थी। साफ-साफ कहा जाए तो भाजपा में जाने का संजीव आर्य को बहुत फायदा मिला। क्योंकि वह राजनीति में नए थे और नैनीताल के लिए बिल्कुल नया चेहरा था। चूंकि मोदी लहर थी तो यशपाल आर्य ने अपने पुत्र का राजनीतिक भविष्य संवारने के लिए पूरी ताकत झोंक दी और मोदी लहर में संजीव आर्य ने भी यह अहम मुकाम हांसिल कर लिया। कहा जाता है कि भाजपा में जाने के बाद कद्दावर नेता यशपाल आर्य ने अपने बेटे संजीव का राजनीतिक भविष्य तो संवार दिया, लेकिन भाजपा में वह हमेशा असहज महसूस करते थे। समय-समय पर उनकी नाराजगी भी खुलकर सामने आती रहती थी। अभी हाल ही में उनकी नाराजगी सामने आने पर प्रदेश के मुखिया पुष्कर सिंह धामी उन्हें मनाने के लिए उनके आवास पर गए और मुलाकात की। इस मुलाकात को कई मायनों से देखा जा रहा था। उम्मीद की जा रही थी कि मुख्यमंत्री धामी ने यशपाल आर्य को मना लिया है और अब वह कांग्रेस में नहीं जायेंगे। लेकिन कल शाम से एकाएक सोशल मीडिया पर यशपाल और संजीव आर्य के कांग्रेस में जाने की खबरों ने जोर पकड़ लिया। और इन चर्चाओं पर आज सुबह उस समय विराम लग गया जब यशपाल और संजीव आर्य कांग्रेस के चाणक्य कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ एक मंच पर नजर आए। थोड़ा देर बाद साफ हो गया कि यशपाल आर्य ने अपने पुत्र संजीव के साथ कांग्रेस की सदस्यता ले ली और भाजपा को टाटा, बाय-बाय कह दिया।
उधर जैसे ही यशपाल और संजीव आर्य की घर वापसी की खबरें सोशल मीडिया पर चली तो कुछ भाजपाईयों ने इसको लेकर भड़ास भी निकाली। एक भाजपा नेता ने अपने फेसबुक पेज पर तंज कसते हुए लिखा कि, किसी ने बिल्कुल सही कहा है नया नौ दिन और पुराना सौ दिन। उनके इस पोस्ट पर कमेंट भी आए। यही नहीं कई और लोगों ने भी इसको लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी।