ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ आज देशभर में केमिस्टों का हल्लाबोल, 24 घंटे बंद रहेंगे मेडिकल स्टोर
देशभर के मरीजों और आम जनता के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन दवा बिक्री (ई-फार्मेसी) के बढ़ते चलन और उसके नियमों के विरोध में आज बुधवार, 20 मई को देशभर के मेडिकल स्टोर 24 घंटे के लिए बंद रहेंगे। अखिल भारतीय दवा विक्रेता संगठन (AIOCD) द्वारा बुलाई गई इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल के कारण आज सुबह से ही देश के कोने-कोने में दवाइयों की खुदरा दुकानें और वितरण केंद्र पूरी तरह बंद हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो यह आंदोलन और उग्र हो सकता है।
एआईओसीडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेएस शिंदे ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वर्तमान में देश में चल रही ऑनलाइन दवा बिक्री पूरी तरह से गैरकानूनी है और यह मौजूदा नियमों का खुला उल्लंघन करती है। संगठन ने विशेष रूप से सरकारी अधिसूचना 'जीएसआर 817' का जिक्र करते हुए इसे अनुचित ठहराया है।दवा विक्रेताओं का तर्क है कि बिना किसी मजबूत आईटी बुनियादी ढांचे और कड़े नियंत्रण के ऑनलाइन दवाएं बेचने की अनुमति देने से 'दवा माफिया' को बढ़ावा मिल सकता है। इससे नकली और प्रतिबंधित दवाओं का अवैध कारोबार बढ़ने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। कोविड-19 महामारी के दौरान लागू की गई जीएसआर 220 और हालिया जीएसआर 817 अधिसूचना को तुरंत वापस लिया जाए। ऑनलाइन दवा बिक्री को पूरी तरह नियंत्रित करने के लिए एक नया और मजबूत कानून बनाया जाए। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स द्वारा दी जाने वाली मनमानी छूट पर तुरंत रोक लगे। दवा मूल्य नियंत्रण आदेश में संशोधन करके पारंपरिक फार्मासिस्टों का लाभांश (मार्जिन) बढ़ाया जाए, ताकि वे भी ग्राहकों को उचित छूट दे सकें। दवा विक्रेताओं के संगठन एआईओसीडी ने स्पष्ट किया है कि आम जनता की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए इस हड़ताल के दौरान भी जीवन रक्षक और आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर और गंभीर स्थिति वाले मरीजों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पहले ही पूरी कर ली गई हैं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। इस हड़ताल का व्यापक असर पूरे देश में देखने को मिल रहा है। देश के 12.4 लाख से अधिक केमिस्ट और दवा वितरक इस बंद का समर्थन कर रहे हैं। अकेले आंध्र प्रदेश में आज लगभग 43,000 मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद हैं। महामारी के कठिन दौर में जब सब बंद था, तब केवल फार्मासिस्टों ने ही अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों तक दवाएं पहुंचाई थीं। आज हमारे अस्तित्व पर संकट है, इसलिए पूरे राज्य में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और रैलियां निकाली जा रही हैं। पारंपरिक दवा विक्रेताओं का कहना है कि ई-कॉमर्स कंपनियां भारी पूंजी के दम पर उनके पारंपरिक व्यापार को नष्ट कर रही हैं। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह देश के लाखों केमिस्टों के रोजगार और डिजिटल इंडिया के तहत ई-फार्मेसी के विस्तार के बीच कैसे संतुलन बनाती है। फिलहाल, आज दिनभर दवा की दुकानें बंद रहने से आम उपभोक्ताओं को थोड़ी असुविधा का सामना जरूर करना पड़ सकता है।