Aug 20, 2026 Login

नैनीतालः क्या कर सकती हो मॉर्क्स बढ़वाने के लिए? छात्रा ने कुमाऊं विवि के कुलपति पर लगाए गंभीर आरोप, आरटीआई से खुली वीसी के दावों की पोल

Nainital: "What can you do to get your marks increased?" Female student levels serious allegations against Kumaun University Vice-Chancellor; RTI exposes the hollowness of the VC's claims.

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत की कार्यशैली और विश्वविद्यालय प्रशासन के दावों के बीच डीएसबी कैंपस की पूर्व छात्रा ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित छात्रा ने कुलपति पर 13 जुलाई 2026 को कुलपति कार्यालय में कथित तौर पर चरित्र पर टिप्पणी करने, अपमानित करने और मानसिक उत्पीड़न करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित छात्रा कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर से एम.एस.सी भू-विज्ञान की पढ़ाई कर चुकी हैं। पूरा विवाद उनकी पढ़ाई के दौरान पहले सेमेस्टर के एक विषय के इंटरनल मार्क्स, मार्कशीट में दर्ज नहीं होने से शुरू हुआ। पीड़िता के मुताबिक, पहले सेमेस्टर में एक विषय के इंटरनल मॉर्क्स के लिए उन्होंने अपना असाइनमेंट समय पर जमा कर दिया था, लेकिन मार्कशीट में उन्हें उस विषय में अनुपस्थित दिखा दिया गया। जबकि डीएसबी परिसर के भूगर्भ विज्ञान विभाग की ओर से उनके नंबर एक बार नहीं बल्कि चार बार विश्वविद्यालय को भेजे जा चुके थे फिर विश्वविद्यालय ने छात्रा को कई चक्कर लगाए, और एक ही जवाब दिया कि “आपके विभाग से मॉर्क्स नहीं आए हैं।” विश्वविद्यालय की क्लोजिंग रिपोर्ट में पीड़ित छात्रा को प्रथम सेमेस्टर की  आंतरिक परीक्षा में अनुपस्थित बताया गया है। दूसरी तरफ, आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के जवाब में कुमाऊं विवि के भू-विज्ञान विभाग ने 23 जुलाई 2026 को लिखित रूप से बताया है कि संबंधित पेपर के इंटरनल असेसमेंट के अंकों का विवरण विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक को चार बार भेजा गया था। विभाग के अनुसार ये अंक 24 अप्रैल 2023, 15 जुलाई 2023, 5 अप्रैल 2024 और 25 अप्रैल 2026 को भेजे गए। खास बात यह है कि 25 अप्रैल 2026 को अंक भेजे जाने की बात विश्वविद्यालय की खुद की क्लोजिंग रिपोर्ट में भी दर्ज है। कुमाऊं विश्वविद्यालय में 11 जुलाई को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुलपति दीवान सिंह रावत से पूछे गए सवालों के जवाबों पर छात्रा ने पलटवार करते हुए कहा, जब वो मॉर्क्स जुड़वाने को लेकर कई बार विश्वविद्यालय गयी, लेकिन किसी ने उनकी नहीं सुनी। यहां तक कि डॉ. महेंद्र सिंह राणा ने कहा कि मैं पद पर नहीं हूं, इसलिए मैं कुछ नहीं कर सकता। जब छात्रा को डॉ. महेंद्र सिंह राणा से कोई मदद नहीं मिली तो छात्रा अपनी समस्या लेकर कुलपति कार्यालय पहुंची और कुलपति दीवान सिंह रावत ने समस्या सुनने के बजाय छात्रा के साथ अभद्र व्यवहार किया। कुलपति रावत ने छात्रा के चरित्र पर सवाल उठाए और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इतना ही नहीं कुलपति ने पीड़ित छात्रा को अनपढ़ गंवार, इत्यादि शब्द बोले और मार्क्स जुड़वाने के लिए सीधे कहा की अगर मै मॉर्क्स जुड़वा दूं तो तुम क्या कर सकती हो? कुलपति रावत ने छात्रा से कहा कि तुम दिल्ली की हो, दिल्ली की लड़कियां कैसी होती हैं और मॉर्क्स जुड़वाने के लिए क्या-क्या कर सकती हैं मैं सब जानता हूं। जिसके बाद पीड़ित छात्रा को पैनिक अटैक आया।


कुलपति बोले- छात्रा खुद मिलने आई थी, रोने लगी तो अधिकारियों से कराई मामले की जानकारी
छात्रा द्वारा सीएम पोर्टल पर की गयी शिकायत के निस्तारण संबंध में 11 अगस्त को कुमाऊं विवि में आयोजित प्रेस कोन्फ्रेंस में जब कुलपति रावत से सवाल पूछा गया तो जवाब में कुलपति ने कहा कि यह मामला वर्ष 2023 में उनके विश्वविद्यालय में कार्यभार संभालने से पहले का है। उनके अनुसार, छात्रा उनसे मिलने आई थी और उसने शिकायत की थी कि वर्ष 2023 से पहले के उसके इंटरनल असेसमेंट के अंक नहीं जोड़े गए हैं। कुलपति ने कहा कि उनकी आदत है कि वह छात्रों और अन्य  लोगों से सीधे मिलते हैं और उनका दरवाजा खुला रहता है, इसलिए छात्रा भी अपनी शिकायत लेकर सीधे उनके पास आई थी। कुलपति के मुताबिक उन्होंने छात्रा से पूछा कि क्या उसने इस संबंध में पहले कोई रिप्रेजेंटेशन दिया था और यदि दिया था तो उसकी प्रति कहां है। छात्रा के पास उसकी कोई प्रति नहीं थी। इसके बाद उन्होंने छात्रा से दिसंबर 2023 में आयोजित समाधान पखवाड़े में शिकायत करने के बारे में पूछा, लेकिन छात्रा ने कहा कि उसे इसकी जानकारी नहीं थी। कुलपति ने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी वेबसाइट पर संपर्क करने संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई थी और सवाल किया कि इतने समय बाद वह उनके पास क्यों आई तथा शिकायत के समर्थन में दस्तावेज क्यों नहीं दिखाए गए। कुलपति ने बताया कि इस दौरान छात्रा भावुक होकर रोने लगी। इसके बाद उन्होंने मौके पर मौजूद अपने पीए और डिप्टी कंट्रोलर से मामले की जानकारी ली। डिप्टी कंट्रोलर ने बताया कि छात्रा का मामला वर्ष 2025 में परीक्षा समिति के समक्ष रखा गया था, जहां उसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद कुलपति ने परीक्षा नियंत्रक को निर्देश दिए कि विभागाध्यक्ष से पूरी रिपोर्ट ली जाए और यह पता किया जाए कि छात्रा की ओर से संबंधित दस्तावेज या आवेदन कभी परीक्षा शाखा को भेजे गए थे या नहीं, अथवा मामले में कहीं चूक हुई थी। कुलपति ने कहा कि उन्होंने छात्रा को यह भी समझाया कि किसी सरकारी कार्यालय में शिकायत या रिप्रेजेंटेशन देने पर उसकी प्रति अपने पास जरूर रखनी चाहिए, चाहे आवेदन ईमेल के माध्यम से ही क्यों न भेजा गया हो, क्योंकि आगे की कार्रवाई के लिए इसका रिकॉर्ड होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके बाद छात्रा वहां से चली गई और उसके बाद उसने क्या किया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। जब पत्रकार ने सवाल किया कि छात्रा ने उनके व्यवहार को लेकर सीएम पोर्टल पर सीधे उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई, तो कुलपति ने कहा कि इस पर वह क्या जवाब दें। इसके बाद पत्रकार ने सीएम पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी सवाल उठाया। पत्रकार ने कहा कि कुलपति के लिंक्डइन पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार 13 शिकायतों में से 12 का निस्तारण हो चुका था, जबकि एक शिकायत को पार्शियल क्लोज्ड बताया गया था। इस पर कुलपति ने स्पष्ट किया कि सीएम पोर्टल पर प्रदर्शित डेटा मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराया जाता है और शिकायतों की समीक्षा वहां से होती है। उन्होंने कहा कि जिस शिकायत की बात की जा रही है, वह छात्रा वाली शिकायत नहीं है और वह मामला पहले का है। कुलपति ने यह भी कहा कि इस तरह की शिकायत का निस्तारण सीधे उनके स्तर से नहीं किया जाता।

छात्रा की शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में, दर्ज नहीं हुई एफआईआर
मुख्यमंत्री पोर्टल पर दर्ज शिकायत में छात्रा ने आरोप लगाया कि मल्लीताल पुलिस ने आपराधिक मामला नहीं है कह कर शिकायत दर्ज नहीं की, जिसके बाद मजबूरन छात्रा ने सीएम पोर्टल पर शिकायत की और मामला नैनीताल के मल्लीताल कोतवाली पहुंच गया जहां पुलिस ने 22 जुलाई को शाम 7 बजे छात्रा के बयान दर्ज करवाए, लेकिन कोई कार्रवाही नहीं की। जिसके बाद आवाज इंडिया ने 13 अगस्त को नैनीताल एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी से संपर्क किया और पता लगा कि एसएसपी को भी इस मामले की जानकारी नहीं है, जबकि 17 जुलाई को उनके कार्यालय में शिकायती पत्र प्राप्त हो चुका था। जब शिकायत संख्या एसएसपी को बताई गयी, तब से लेकर अब तक वो मामले को दिखवाने का आश्वासन दिये जा रहे हैं। बहरहाल, अभी तक नैनीताल पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की है। छात्रा के अनुसार कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय जिसमें दो वॉइस रिकार्डिंग वाले सीसीटीवी लगे हुए हैं घटना की जानकारी उनकी रिकार्डिंग निकलवाकर की जा सकती है। छात्रा के परिजनों का आरोप है कि पुलिस कुलपति दीवान सिंह रावत के दबाव में है इसलिए एफआईआर दर्ज कर जांच आगे नहीं बड़ा रही है और पुलिस छात्रा के बयान दर्ज करने के बाद भी छात्रा को अनुपस्थित बता रही है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज शिकायत के स्क्रीनशॉट के अनुसार, शिकायत 13 जुलाई 2026 को दर्ज की गई थी। पोर्टल पर शिकायत की मौजूदा स्थिति 'Partially Closed' दिखाई दे रही है। कुलपति दीवान सिंह रावत ने भी अपने सोशल अकाउंट linkdin में उनके खिलाफ हुई सभी शिकायतों का स्क्रीनशॉट लगाकर क्लोज बता दिया था, जबकि सभी शिकायतों का निस्तारण अभी तक नहीं हुआ है। 


छात्रा की शिकायत ने खड़े किए सवाल
एक तरफ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. रावत अपनी उपलब्धियों और प्रगति के आंकड़े पेश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ डीएसबी परिसर की पूर्व छात्रा ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर उन्हीं के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना, अपमान और उसे पैनिक अटैक तक पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। जिसमें कुलपति रावत ने दिल्ली की लड़कियों के चरित्र को लेकर नकारात्मक टिप्पणी की है। आरोप के अनुसार छात्रा के मॉर्क्स जुड़वाने के लिए कुलपति ने छात्रा पर ही GIVE and TAKE फार्मूला आजमा लिया। विभाग द्वारा कई बार असाइनमेंट के मॉर्क्स कुमाऊं विवि भेजने के बाद भी नहीं चढ़ाये गए, जिस कारण छात्रा की द्वितीय श्रेणी बन गयी और छात्रा के दो साल खराब हो गए। छात्रा द्वारा जब सीएम पोर्टल पर कुलपति की शिकायत की गयी, तो कुमाऊं विवि को सभी दस्तावेज चमत्कारिक तरीके से वापस मिल गए और दो साल बाद मॉर्क्स भी अपडेट कर दिये गए और अब छात्रा की प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण है। एक बात इस पूरे प्रकरण से साफ है की Geology विभाग से 4 बार मॉर्क्स विश्वविद्यालय भेजे गए और डॉ. महेंद्र सिंह राणा की कारगुजारियों के चलते मॉर्क्स नहीं चढ़ाए गए और छात्रा के दो साल खराब कर दिये गए और वीसी दीवान सिंह रावत जो खुद की उपलब्धियों का गुणगान करते नहीं थकते। उन्होने अपनी और डॉ. राणा की नाकामी को छुपाने के लिए छात्रा के साथ अभद्र व्यवहार कर डाला। वीसी दीवान सिंह रावत का ये इकलौता मामला नहीं है, इससे पहले भी आवाज इंडिया के पास कई छात्र-छात्राएं इसी तरह के प्रकरण लेकर पहुंच चुके हैं। लेकिन आज तक वीसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब देखना ये खास होगा कि महिला सुरक्षा और ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा लगाने वाली धामी सरकार वीसी दीवान सिंह रावत और संबन्धित पुलिस अधिकारियों पर क्या कार्रवाही करती है?