Aug 20, 2026 Login

भागवत के अमेरिका दौरे से पहले आरएसएस पर बैन की मांग, यूएससीआईआरएफ ने कहा- संघ नेताओं को न मिले राजनयिक सम्मान

Demand for a ban on the RSS ahead of Bhagwat's US visit; USCIRF says Sangh leaders should not receive diplomatic honors.

नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में सियासत गरमा गई है। अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता पर नजर रखने वाली संस्था 'यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम' (यूएससीआईआरएफ) के शीर्ष अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित अमेरिका दौरे से पहले वहां धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर काम करने वाली अमेरिकी संस्था यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम ने संघ को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। यूएससीआईआरएफ के अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने और उसके नेताओं को हाई-लेवल बैठकों या राजनयिक सम्मान से दूर रखने की अपील की है। इस बयान के बाद भारत-अमेरिका संबंधों के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। यूएससीआईआरएफ के चेयरमैन आसिफ महमूद ने आरएसएस को ऐसा ‘अंब्रेला ऑर्गनाइजेशन’ बताया, जिसके सहयोगी संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ हमलों के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आरएसएस के सदस्य हैं और अब संघ प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका आने वाले हैं। भागवत के 29 अगस्त को न्यूयॉर्क पहुंचने की संभावना है। वह ‘अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ की ओर से आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसी दौरे से पहले यूएससीआईआरएफ की ओर से यह टिप्पणी सामने आई है। यूएससीआईआरएफ कमिश्नर जीन मिल्स ने अमेरिकी सरकार से अपील की कि आरएसएस नेताओं को, भले ही उनका भारत सरकार से प्रत्यक्ष संबंध हो, हाई-लेवल मीटिंग या राजनयिक सम्मान नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम उठाने की बात कही। अमेरिका स्थित एडवोकेसी ग्रुप ‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स’ ने भी भागवत के दौरे पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि आरएसएस नेटवर्क से जुड़े हिंसा के आरोपों को नजरअंदाज कर ‘एकता’ के कार्यक्रम को नहीं देखा जा सकता। संगठन ने दावा किया कि धार्मिक श्रेष्ठता की राजनीति को किसी आयोजन के जरिए छिपाया नहीं जा सकता। यूएससीआईआरएफ ने मार्च में जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में भी भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में आरएसएस और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (आरएडब्लू) समेत कुछ संस्थाओं व व्यक्तियों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों की सिफारिश का उल्लेख किया गया था। यूएससीआईआरएफ  ने इनसे धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघन को जोड़ते हुए कार्रवाई की पैरवी की थी। भारत सरकार यूएससीआईआरएफ  की रिपोर्टों और उसके आकलनों को पहले ही खारिज कर चुकी है। विदेश मंत्रालय का कहना रहा है कि यह अमेरिकी संस्था भारत की स्थिति की ‘गलत और चुनिंदा’ तस्वीर पेश करती है और उसके निष्कर्ष संदिग्ध स्रोतों तथा वैचारिक पूर्वाग्रह पर आधारित हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मार्च में यूएससीआईआरएफ की आलोचना करते हुए कहा था कि संस्था को भारत पर चुनिंदा टिप्पणी करने के बजाय अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हो रही तोड़फोड़ और हमलों जैसी घटनाओं पर भी ध्यान देना चाहिए। भारत ने अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ कथित असहिष्णुता और डराने-धमकाने की घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई थी। भागवत के अमेरिका दौरे से पहले यूएससीआईआरएफ की ताजा टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंध लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। हालांकि यूएससीआईआरएफ अमेरिकी सरकार की सलाहकार संस्था है और उसके बयान अपने आप में अमेरिकी सरकार की आधिकारिक नीति नहीं माने जाते। इसके बावजूद आरएसएस को लेकर उसकी टिप्पणी और भागवत के दौरे के बीच सामने आया यह विवाद अमेरिका में भारत के सामाजिक-राजनीतिक विमर्श को लेकर नई बहस छेड़ सकता है।