Aug 19, 2026 Login

नैनीताल नगर पालिका में लाइफ जैकेट शुल्क का हिसाब गायब! 2007 से 2010 तक की वसूली को लेकर आरटीआई से मिले रिकॉर्ड ने खड़े किए सवाल

Records regarding life jacket fees in the Nainital Municipality from 2007 to 2010 are missing; RTI findings have raised questions.

नैनीताल। नैनीताल नगर पालिका परिषद की वर्ष 2007 से 2010 के बीच संचालित लाइफ जैकेट शुल्क योजना में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी राजस्व के कथित गबन का मामला सामने आया है। आरटीआई एक्टिविस्ट पवन जाटव ने उपलब्ध अभिलेखों और सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर मामले की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने 17 अगस्त 2026 को नगर पालिका परिषद नैनीताल के अधिशासी अधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजा है।

शिकायत के अनुसार, 7 नवंबर 2007 को नगर पालिका की ओर से प्रत्येक नाव स्टैंड पर लाइफ जैकेट शुल्क की वसूली के लिए प्रीपेड बूथ स्थापित करने तथा रसीद पुस्तिकाओं के साथ नगर पालिका कर्मचारियों की तैनाती के निर्देश दिए गए थे। आरोप है कि योजना के तहत नाव संचालकों और अन्य संबंधित लोगों से शुल्क तो वसूला गया, लेकिन उसके संग्रह और सरकारी खाते में जमा किए जाने के रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां हैं।

शिकायतकर्ता का दावा है कि 7 नवंबर 2007 से 31 मार्च 2009 तक की अवधि में लाइफ जैकेट शुल्क की राशि सरकारी कोष में जमा किए जाने का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जबकि 1 अप्रैल 2009 से 31 मार्च 2010 तक दैनिक आय का पूरा रिकॉर्ड भी नहीं मिलता। इसे शिकायत में गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया गया है।

आरटीआई से प्राप्त चार वर्ष की कैश बुक के परीक्षण का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता ने वर्ष 2009-10 में दैनिक नकद संग्रह के रिकॉर्ड में बड़ी कमी होने का दावा किया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार अप्रैल 2009 में केवल 20 दिन, मई में 8 दिन, जून में 10 दिन, जुलाई में 19 दिन, अगस्त में 17 दिन, सितंबर में 6 दिन, अक्टूबर में 12 दिन, नवंबर में 2 दिन और दिसंबर में 10 दिन की जमा राशि का रिकॉर्ड उपलब्ध है। इसी तरह जनवरी 2010 में 7 दिन, फरवरी में 8 दिन और मार्च में 11 दिन का रिकॉर्ड होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि शेष दिनों की वसूली और जमा राशि का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से वास्तविक राजस्व और संभावित वित्तीय नुकसान की जांच आवश्यक है।

इस मामले में नगर पालिका बोर्ड द्वारा 27 जुलाई 2009 को प्रस्ताव संख्या 33 के माध्यम से जांच का निर्णय लिए जाने का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि 15 वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद जांच का कोई निर्णायक परिणाम सामने नहीं आया और किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई।

पवन जाटव के अनुसार, उस समय नगर पालिका में अधिशासी अधिकारी के पद पर इलियास अहमद, विचित्र पवार, रोहिताश शर्मा और नीरज जोशी जैसे अधिकारी रहे। इनमें रोहिताश शर्मा का कार्यकाल करीब 14 माह का बताया गया है। वहीं कर अधीक्षक के पद पर ईश्वर सिंह रावत समेत अन्य अधिकारियों के रहने का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता ने यह सवाल भी उठाया है कि शुल्क की वास्तविक वसूली कौन करता था, राशि किस स्तर पर जमा की जाती थी और दैनिक संग्रह का सत्यापन किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी।

शिकायत में तत्कालीन लेखाकार की भूमिका और रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उपलब्ध रिकॉर्ड से यह स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि दैनिक संग्रह का मिलान, कैश बुक का सत्यापन और सरकारी खाते में जमा की निगरानी किस अधिकारी द्वारा की जाती थी।

शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि वर्ष 2009 में मई और जून माह की राशि नियमित रूप से जमा नहीं होने का मामला नगर पालिका बोर्ड के समक्ष भी आया था और उस समय अधिशासी अधिकारी रोहिताश शर्मा थे। इसके अलावा नगर पालिका से संबंधित मूल फाइल उपलब्ध नहीं होने तथा मिनट बुक रजिस्टर की प्रति देहरादून से प्राप्त कर शिकायत के साथ संलग्न किए जाने की बात भी कही गई है।

 

 

पवन जाटव ने मांग की है कि वर्ष 2007 से 2009 की अवधि में लाइफ जैकेट योजना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए, 27 जुलाई 2009 के प्रस्ताव संख्या 33 के तहत प्रस्तावित जांच की स्थिति स्पष्ट की जाए तथा संबंधित अवधि की सभी रसीदों और सरकारी खातों में जमा रकम का विशेष वित्तीय ऑडिट कराया जाए। साथ ही अनियमितता या सार्वजनिक धन के गबन के लिए जो भी अधिकारी या कर्मचारी जिम्मेदार पाए जाएं, उनकी जवाबदेही तय कर विभागीय एवं आपराधिक कार्रवाई की जाए और यदि कोई सरकारी राशि बकाया या गबन की गई पाई जाती है तो उसकी वसूली की जाए।

शिकायतकर्ता ने कहा है कि उसके पास आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेज और अन्य अभिलेखीय सामग्री मौजूद है और वह जांच के दौरान सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने तथा जांच एजेंसी को सहयोग करने के लिए तैयार है।