Aug 20, 2026 Login

उत्तराखंड HC:कोर्ट के आदेश के बावजूद अतिथि प्रवक्ता को भी मिला वेतन, हाईकोर्ट ने सोबन सिंह जीना विवी से मांगा जवाब!

Uttarakhand HC: Guest lecturer still receives salary despite court order, HC seeks response from Soban Singh Jeena University!

नैनीताल। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा में विधि विभाग की अतिथि प्रवक्ता डॉ. प्रियंका के वेतन भुगतान और आईसीसी की सिफारिशों पर कार्रवाई के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय से विस्तृत जवाब तलब किया है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को शपथपत्र दाखिल कर यह बताने के निर्देश दिए हैं कि आंतरिक शिकायत समिति (ICC) की सिफारिशों के आधार पर अब तक क्या कार्रवाई की गई और डॉ. प्रियंका को ज्वाइनिंग के बाद पूरे समय का वेतन क्यों नहीं दिया गया।

 

 

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने डॉ. प्रियंका की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश 17 अगस्त 2026 को पारित किया।

सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से पेश अधिवक्ता सीएस रावत ने रजिस्ट्रार से प्राप्त निर्देश कोर्ट के समक्ष रखे। इसमें बताया गया कि याचिकाकर्ता को 11 फरवरी 2026 से 28 फरवरी 2026 तक की अवधि का वेतन जारी कर दिया गया है।

हालांकि, कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि 4 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने संबंधित विज्ञापन पर रोक लगाते हुए उसके आधार पर किसी भी नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। इसके चलते डॉ. प्रियंका विधि विभाग में अतिथि प्रवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दोबारा शुरू करने की हकदार हो गई थीं। कोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 के आदेश से भी इस स्थिति को स्पष्ट किया था।

 

कोर्ट के आदेश के अनुसार डॉ. प्रियंका को 30 दिसंबर 2025 को ज्वाइनिंग दी गई थी। इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर से शीतकालीन अवकाश का हवाला देते हुए 11 फरवरी 2026 तक उनका वेतन नहीं दिया गया। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि यह स्थिति 4 दिसंबर और 11 दिसंबर 2025 के उसके आदेशों का स्पष्ट उल्लंघन प्रतीत होती है।

खंडपीठ ने यह भी याद दिलाया कि 23 मार्च 2026 को विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष यह आश्वासन दिया था कि पूर्व में पारित आदेशों का अक्षरश: और उनकी भावना के अनुरूप पालन किया जाएगा।

मामले में विधि विभाग के विभागाध्यक्ष के खिलाफ आईसीसी की ओर से की गई सिफारिशों का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान उठा। विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने 26 जुलाई 2025 को रजिस्ट्रार की ओर से विभागाध्यक्ष को भेजा गया पत्र कोर्ट के समक्ष रखा। पत्र के मुताबिक, आईसीसी के निष्कर्षों को देखते हुए कुलपति ने निर्देश दिया था कि भविष्य में उक्त घटना के संबंध में कोई प्रतिकूल स्थिति उत्पन्न होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालय की ओर से इसी आधार पर दावा किया गया कि विवाद का समाधान हो चुका है।

वहीं, डॉ. प्रियंका ने व्यक्तिगत रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होकर इसका विरोध किया। उनका कहना था कि कुलपति को आईसीसी की जांच रिपोर्ट और उसकी सिफारिशों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय विभागाध्यक्ष को बचाने का प्रयास किया जा रहा है और दूसरी ओर उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार को शपथपत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि शपथपत्र में आईसीसी की सिफारिशों के आधार पर विश्वविद्यालय द्वारा की गई कार्रवाई का पूरा विवरण दिया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि डॉ. प्रियंका की ज्वाइनिंग की तारीख से पूरे कार्यकाल का वेतन उन्हें क्यों नहीं दिया गया। मामले से जुड़े अन्य प्रासंगिक तथ्यों को भी शपथपत्र में सामने रखने के निर्देश दिए गए हैं।हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तारीख तय की है।

मामले में डॉ. प्रियंका स्वयं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुईं, जबकि विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता सीएस रावत और यूजीसी की ओर से अधिवक्ता योगेश कुमार पचोलिया ने पक्ष रखा।