Aug 22, 2026 Login

नैनीताल:वाइल्डलाइफ एक्ट केस में हाईकोर्ट से सांपो के कब्जे और जहर सरंक्षण के आरोपी को मिली बेल,ट्रायल में तय होगा असली सच

Nainital: High Court Grants Bail to Accused in Wildlife Act Case Involving Possession of Snakes and Snake Venom; The Truth Will Be Determined During Trial.

नैनीताल में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम से जुड़े एक चर्चित मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आरोपी को बड़ी राहत देते हुए जमानत मंजूर कर ली है। यह मामला जहरीले सांपों के कब्जे और उनके विष के कथित कारोबार से जुड़ा हुआ है, जिसमें आरोपी पिछले कई महीनों से न्यायिक हिरासत में था। अदालत ने सुनवाई के बाद यह स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया मामला अवैध व्यापार से ज्यादा लाइसेंस नवीनीकरण में देरी से जुड़ा प्रतीत होता है, इसलिए आरोपी को जमानत दी जा सकती है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की एकल पीठ में हुई। आरोपी नितिन कुमार, जो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का निवासी है, अक्टूबर 2025 से जेल में बंद था। उसके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था, जिसमें जहरीले सांपों को अपने कब्जे में रखने और उनके विष के संग्रहण से जुड़े गंभीर आरोप शामिल थे।
बचाव पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपी के पास पहले से सांपों के विष का उपयोग जीवनरक्षक दवाओं के निर्माण के लिए वैध लाइसेंस था, जिसकी वैधता 31 दिसंबर 2023 तक थी। लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए समय रहते आवेदन भी किया गया था, लेकिन संबंधित विभाग द्वारा उस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके अलावा, आरोपी ने अपने पास मौजूद सांपों को जंगल में छोड़ने के लिए भी आवेदन किया था, जो लंबित रहा।
जांच के दौरान 89 जहरीले सांप बरामद होने की बात सामने आई थी, जिसे लेकर अभियोजन पक्ष ने अवैध कब्जे और व्यापार का आरोप लगाया। हालांकि, अदालत ने यह माना कि केवल संख्या अधिक होने से ही अवैधता साबित नहीं होती, खासकर तब जब आरोपी के पास पहले वैध लाइसेंस रह चुका हो और नवीनीकरण की प्रक्रिया लंबित हो।
वहीं राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपी का लाइसेंस समाप्त हो चुका था और कुछ सांपों की मौत भी हुई है, जिससे मामले की गंभीरता बढ़ जाती है। साथ ही, उस पर अवैध रूप से जहर के व्यापार में संलिप्त होने के आरोप भी लगाए गए।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि इस स्तर पर यह तय करना संभव नहीं है कि मामला वास्तव में अवैध कारोबार का है या केवल प्रशासनिक प्रक्रिया में हुई देरी का परिणाम। अदालत ने कहा कि इन पहलुओं की अंतिम जांच ट्रायल के दौरान ही हो सकेगी। इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया।