Aug 22, 2026 Login

रुद्रपुर में किसानों का धरना दूसरे दिन भी जारी! कलेक्ट्रेट गेट पर डटे सैकड़ों किसान, कर्जमाफी से लेकर स्मार्ट मीटर हटाने तक की उठाई मांग

Farmers' protest in Rudrapur continues for the second day! Hundreds of farmers remain camped at the Collectorate gate, raising demands ranging from loan waivers to the removal of smart meters.

रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर कलेक्ट्रेट परिसर के मुख्य गेट के बाहर भारतीय किसान यूनियन टिकैत का धरना शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सैकड़ों किसान धरना स्थल पर डटे रहे। किसानों ने चाय-नाश्ता और भोजन की व्यवस्था धरना स्थल पर ही करते हुए आंदोलन जारी रखा। किसान नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि उनका आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और किसी भी राजनीतिक दल को आंदोलन के मंच का इस्तेमाल नहीं करने दिया जाएगा। धरने को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई। मुख्य गेट के आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा। एसडीएम सदर समेत प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे और धरना स्थल की स्थिति पर नजर बनाए रखी। किसानों के अनुसार प्रशासन की ओर से धरना स्थल पर पानी और बिजली की व्यवस्था की गई है, जबकि टेंट, भोजन और अन्य जरूरी इंतजाम किसानों ने स्वयं किए हैं। किसानों के आंदोलन को समर्थन देने के लिए किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़, खटीमा विधायक भुवन कापड़ी और पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल भी धरना स्थल पर पहुंचे। तीनों नेताओं ने किसानों से मुलाकात की और उनकी मांगों का समर्थन किया। कुछ समय तक वे किसानों के बीच धरने पर भी बैठे। हालांकि, किसान नेताओं ने राजनीतिक दलों से दूरी बनाए रखने की अपनी नीति स्पष्ट करते हुए नेताओं को मंच साझा करने की अनुमति नहीं दी। किसान नेताओं ने कहा कि आंदोलन किसानों का है और इसे किसी राजनीतिक पार्टी का मंच नहीं बनने दिया जाएगा। इसके बाद तीनों नेता कुछ समय बाद धरना स्थल से वापस लौट गए। किसान नेता बाजवा ने कहा कि किसान अपने आंदोलन को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहते। उनका कहना है कि किसान अपने खेतों में काम करने जाते समय भी खाने-पीने और जरूरत की चीजों की व्यवस्था स्वयं करते हैं। इसी तरह धरने पर आने से पहले किसानों ने अपनी जरूरत के मुताबिक भोजन और अन्य व्यवस्थाएं खुद की हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी राजनीतिक सहारे की जरूरत नहीं है और वे अपनी मांगों के लिए स्वयं संघर्ष करने में सक्षम हैं। धरने पर बैठे किसानों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। किसानों की प्रमुख मांगों में कृषि ट्यूबवेलों के बिजली बिल माफ करना और घरेलू बिजली कनेक्शनों पर 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देना शामिल है। किसानों ने संपूर्ण कर्जमाफी की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के बीच किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सरकार को किसानों के हित में ठोस निर्णय लेते हुए कर्जमाफी करनी चाहिए। इसके अलावा पहाड़ी जिलों के किसानों को प्रतिमाह 20 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की मांग भी किसानों ने रखी है। किसानों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में खेती करना लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है, इसलिए वहां के किसानों को विशेष आर्थिक सहायता दी जानी चाहिए।

बाजपुर के 20 गांवों की जमीन से रोक हटाने की मांग
किसानों ने बाजपुर क्षेत्र के 20 गांवों की भूमि पर लगी रोक हटाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। किसान नेताओं का कहना है कि प्रभावित किसानों को उनकी भूमि पर पूर्ण अधिकार दिया जाना चाहिए। किसानों ने लंबे समय से लंबित गन्ना भुगतान का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने वर्ष 2007 के गन्ना भुगतान से जुड़े करीब एक करोड़ रुपये के बकाये का तत्काल भुगतान करने की मांग की है। इसके साथ ही वर्ष 2011-12 के करीब 25 करोड़ रुपये के भुगतान को भी जल्द जारी करने की मांग की गई है। किसानों का कहना है कि गन्ना किसानों का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। ऐसे में सरकार को बकाया राशि के भुगतान के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए, ताकि किसानों को आर्थिक राहत मिल सके। किसान नेताओं ने प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाए जाने का भी विरोध किया। उन्होंने स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाने की मांग की है। इसके साथ ही जिन स्थानों पर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, उन्हें हटाने की मांग भी किसानों ने ज्ञापन में रखी है। किसानों का कहना है कि बिजली से जुड़ी नीतियों में किसानों और आम उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। किसान संगठन ने इस मुद्दे पर भी सरकार से स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की है। किसानों ने गन्ने के मूल्य को लेकर भी अपनी मांग रखी। किसानों ने गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 700 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, सिंचाई, बिजली, मजदूरी और कृषि मशीनरी पर खर्च बढ़ने के कारण मौजूदा दरों पर किसानों के लिए खेती करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में गन्ने का उचित मूल्य तय किया जाना जरूरी है। इसके अलावा किसानों ने सभी वर्गों की भूमि का हक-कब्जा किसानों को देने की मांग भी की है।