नैनीताल HC समाचार:बिंदुखत्ता समेत वन भूमि को राजस्व गांव बनाने पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, केंद्र के प्रतिबंध के चलते याचिका खारिज

Nainital HC News: Demand to make Bindukhatta a revenue village faces setback! High Court disposes of PIL

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने नैनीताल जिले के बिंदुखत्ता सहित वन भूमि को राजस्व गांव घोषित करने की मांग से जुड़ी जनहित याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार के प्रतिबंध के चलते इस तरह की मांग पर राहत नहीं दी जा सकती। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट से मांग की गई थी कि मुख्यमंत्री की 24 फरवरी 2009 की अधिसूचना को लागू करते हुए वन बस्तियों को राजस्व गांव घोषित किया जाए और पात्र लोगों को स्वामित्व अधिकार दिए जाएं। साथ ही, इस मामले में वर्षों से चली आ रही देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने और संबंधित सभी अभिलेख कोर्ट में पेश करने के निर्देश भी मांगे गए थे।
याचिका में यह भी कहा गया था कि 2009 में मुख्यमंत्री द्वारा हल्द्वानी विधानसभा क्षेत्र की वन भूमि को राजस्व गांव घोषित करने की घोषणा की गई थी, जिस पर बाद में विभागीय स्तर पर भी पत्राचार हुआ और विधानसभा में चर्चा भी हुई, लेकिन आज तक इसे लागू नहीं किया गया।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि केंद्र सरकार ने 4 दिसंबर 2006 के आदेश के तहत नैनीताल, उधम सिंह नगर और चंपावत जिलों में वन भूमि को राजस्व गांव में बदलने पर प्रतिबंध लगा रखा है। इसी आधार पर 2013 की अधिसूचना में मुख्यमंत्री की घोषणा को निरस्त माना गया है।
कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि केंद्र सरकार का यह प्रतिबंध हटाया गया है। ऐसे में याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी जा सकती।
खंडपीठ ने यह भी माना कि हरिद्वार और टिहरी जैसे जिलों में कुछ वन भूमि को राजस्व गांव का दर्जा दिया गया है, लेकिन वहां केंद्र का प्रतिबंध लागू नहीं था, इसलिए उस आधार पर नैनीताल जिले के मामले में राहत नहीं दी जा सकती। इसी के साथ हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए निस्तारित कर दिया तथा इससे जुड़े सभी लंबित प्रार्थना पत्र भी समाप्त कर दिए।