बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 900 अंक टूटा, पहली बार 95 के पार पहुंचा रुपया

Market Turmoil: Sensex Plunges 900 Points; Rupee Crosses 95 Mark for the First Time

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने भारतीय वित्तीय बाजार की कमर तोड़ दी है। गुरुवार को कारोबारी हफ्ते के चौथे दिन शेयर बाजार में 'ब्लैक थर्सडे' जैसा मंजर देखने को मिला। भारी बिकवाली के चलते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 900 अंकों से अधिक फिसल गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे लुढ़क गया।

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। गुरुवार को घरेलू बाजार में भारी बिकवाली का दबाव रहा, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने बाजार की दिशा को कमजोर कर दिया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद होते नजर आए। कारोबार की शुरुआत से ही बाजार में गिरावट का माहौल बना रहा। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स 959.22 अंकों यानी 1.23 प्रतिशत तक लुढ़ककर 76,537.14 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 285.66 अंकों यानी 1.18 प्रतिशत गिरकर 23,892.00 के स्तर पर आ गया, जिससे यह 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि मुद्रा बाजार में भी दबाव साफ दिखाई दिया। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 95.07 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और डॉलर की बढ़ती मांग का संकेत देती है। बाजार में अस्थिरता का स्तर भी बढ़ गया है। इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स, जो बाजार के उतार-चढ़ाव को मापता है, 4.90 अंकों की बढ़त के साथ 18.29 पर पहुंच गया। यह दर्शाता है कि निवेशकों में अनिश्चितता और डर का माहौल बना हुआ है। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों  ने बुधवार को ही 2,468.42 करोड़ रुपये की इक्विटी की बिकवाली की। विशेषज्ञों का कहना है कि एफपीआई लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं और डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अलावा, भारतीय डेट मार्केट में प्रतिफल करीब 7 प्रतिशत तक पहुंचने के बावजूद निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में स्थिति स्पष्ट नहीं होती और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।