उत्तराखण्डः बागेश्वर में अवैध खड़िया खनन से पड़ी दरारों के मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई! सरकार से मांगा स्पष्टीकरण, 165 खनन इकाइयों पर चार हफ्ते बाद फिर सुनवाई

 Uttarakhand: The High Court is hearing the case of cracks caused by illegal chalk mining in Bageshwar. The government is asked for clarification. A hearing on 165 mining units is scheduled for four

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बागेश्वर जिले के कांडा तहसील सहित कई अन्य गांवों में अवैध खड़िया खनन से आई दरारों के मामले में स्वतः संज्ञान लिए जाने वाली जनहित याचिका के अलावा 165 खनन इकाइयों से सम्बन्धित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई आज भी की। मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता औए न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की  खण्डपीठ ने अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद कि तिथि नियत की है। कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से पूछा है कि जिन खनन इकाइयों पर रोक लगी है उसपर अपना जवाब प्रतुत करें। क्योंकि राज्य में अभी तक स्टेट इन्वायरमेंट कमेटी गठित नही हुई है। सर्वोच्च न्यायलय के आदेश के आधार पर अपना जवाब कोर्ट में प्रस्तुत करें। मामले के अनुसार पूर्व में कांडा तहसील के ग्रामीणों ने मुख्य न्यायधीश को पत्र भेजकर कहा था कि अवैध खड़िया खनन से उनकी खेतीबाड़ी, घर, पानी की लाइनें चौपट हो चुकी है। जो धन से सपन्न थे उन्होंने अपना आशियाना हल्द्वानी व अन्य जगह पर बना दिया है। अब गावों में निर्धन लोग ही बचे हुए हैं। उनके जो आय के साधन थे उनपर अब खड़िया खनन के लोगों की नजर टिकी हुई है। इस सम्बंध में कई बार उच्च अधिकारियों को प्रत्यावेदन भी दिए, लेकिन उनकी समस्या का कुछ हल नही निकला। इसलिए अब हम न्यायलय की शरण में आये हैं। उनकी समस्या का समाधान किया जाय।