नीट-यूजी पेपर लीक मामले में बड़ा कदम: सीबीआई ने 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट,फास्ट ट्रैक कोर्ट में आज सुनवाई
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने जांच को निर्णायक मोड़ पर पहुंचाते हुए 13 आरोपियों के खिलाफ दिल्ली के राऊज एवेन्यू स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस बहुचर्चित मामले में बुधवार को विशेष अदालत में चार्जशीट पर सुनवाई होगी। पूरे देश के लाखों छात्रों और अभिभावकों की निगाहें अब अदालत की कार्यवाही पर टिकी हैं। इस मामले की सुनवाई के लिए गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश अनु ग्रोवर बलिगा चार्जशीट पर विचार करेंगी। इससे पहले 27 जुलाई को मामले की पहली सुनवाई स्थगित कर दी गई थी। दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय के निर्देश पर सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए इस विशेष अदालत का गठन किया गया था।
सीबीआई ने जिन 13 लोगों को आरोपी बनाया है, उनमें यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रहलाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। जांच एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तथा पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि परीक्षा की गोपनीयता भंग कर अवैध तरीके से प्रश्नपत्र लीक किए गए, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए। गौरतलब है कि 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आने के बाद देशभर में व्यापक विरोध हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित कराई गई। इसके बाद केंद्र सरकार ने पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने जांच के दौरान कई राज्यों में छापेमारी, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और संदिग्धों से पूछताछ के आधार पर चार्जशीट तैयार की है। माना जा रहा है कि अदालत में सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी मामले से जुड़े अहम साक्ष्य और आरोपों का विस्तृत ब्यौरा पेश करेगी। यह मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में फास्ट ट्रैक कोर्ट की कार्यवाही और आगामी फैसलों पर लाखों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजर बनी हुई है। अब देखना होगा कि अदालत इस बहुचर्चित मामले में आगे क्या रुख अपनाती है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किस दिशा में बढ़ती है।