SRCC शताब्दी समारोह: गिलास पूरा भरा है से नाराज फूफा तक! PM मोदी का विपक्ष पर तंज, 2013 के भाषण को किया याद
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में शनिवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। शिक्षक दिवस के मौके पर आयोजित इस विशेष समारोह में प्रधानमंत्री ने कॉलेज की 100 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा, उसके पूर्व छात्रों के योगदान और देश के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से बात की। कार्यक्रम में पहुंचने के लिए प्रधानमंत्री ने दिल्ली मेट्रो की यात्रा की और रास्ते में बच्चों से बातचीत भी की। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत एसआरसीसी के शताब्दी समारोह की बधाई देकर की। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति 100 वर्ष का होता है तो वह अनुभव का खजाना बन जाता है, लेकिन जब कोई संस्थान 100 वर्ष पूरे करता है तो वह उपलब्धियों का महासागर बन जाता है। उन्होंने कहा कि एसआरसीसी ने अपनी 100 वर्षों की यात्रा में कई पीढ़ियों को गढ़ा और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की दिशा दिखाई।
प्रधानमंत्री ने एसआरसीसी की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्थान की शुरुआत दरियागंज के एक छोटे से संस्थान के रूप में हुई थी। आज यह कॉलेज एक विशाल वृक्ष का रूप ले चुका है, जिसने कई पीढ़ियों को अपनी छांव दी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में जब किसी से पूछा जाता है कि कौन सा कॉलेज, तो कई बार केवल एसआरसीसी कहना ही पर्याप्त होता है। पीएम मोदी ने कॉलेज के पूर्व छात्रों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि एसआरसीसी के एल्युमनाई ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई और दुनिया में भारत का मान बढ़ाया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उनकी भाषा में कहें तो यहां के एल्युमनाई ‘OG’ हैं। प्रधानमंत्री ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता दिवंगत अरुण जेटली का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जेटली एसआरसीसी से पढ़े थे और जब भी उनसे मुलाकात होती थी तो कॉलेज से जुड़ा कोई न कोई किस्सा जरूर सुनाते थे। पीएम ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि कभी-कभी उन्हें इस बात से परेशानी भी होती थी कि जेटली हर बार वही किस्सा सुनाया करते थे। प्रधानमंत्री ने अपनी टीम के सदस्य संजीव सान्याल समेत कई अन्य लोगों का भी उल्लेख किया, जिन्होंने एसआरसीसी में शिक्षा हासिल की है। उन्होंने कहा कि इस संस्थान ने केवल अर्थशास्त्र और व्यापार जगत के लोग ही नहीं दिए, बल्कि कलाकार, वकील और जज भी यहां से निकले हैं। एसआरसीसी के छात्रों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। शताब्दी समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने अपने 2013 के एसआरसीसी भाषण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीते कुछ दिनों से उस भाषण की काफी चर्चा हो रही है और कई लोगों ने उसे दोबारा सुना और पढ़ा है। पीएम ने कहा कि उस समय इस मंच से कही गई बातें उनके दृढ़ विश्वास का हिस्सा थीं और वह आज भी उन्हीं विचारों तथा सपनों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2013 में वह गुजरात के मुख्यमंत्री होने के साथ देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के सदस्य भी थे। उस समय लोगों को उम्मीद थी कि वह तत्कालीन केंद्र सरकार पर जमकर हमला करेंगे, लेकिन उन्होंने मंच का इस्तेमाल राजनीतिक आरोप लगाने के लिए नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने एक विजन और सकारात्मक विचार सामने रखे।
‘गिलास आधा खाली नहीं, पूरा भरा हुआ देखता हूं’
प्रधानमंत्री ने अपने पुराने भाषण में दिए पानी के गिलास के उदाहरण को भी याद किया। उन्होंने कहा कि गिलास को देखने के तीन नजरिए हो सकते हैं, किसी को वह आधा भरा दिखाई देता है, किसी को आधा खाली और किसी को पूरा भरा हुआ, जिसमें आधा पानी और आधी हवा है। पीएम मोदी ने कहा कि उस समय देश निराशा के दौर से गुजर रहा था, लेकिन उन्होंने भारत को आधा-अधूरा नहीं बल्कि पूरा भरा हुआ देखा। उन्होंने छात्रों से 2013 के आसपास की खबरों और उस समय की परिस्थितियों को समझने की अपील की। प्रधानमंत्री ने 2013 की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय देश की आर्थिक वृद्धि दर नीचे थी और महंगाई ऊपर। उन्होंने कहा कि घोटालों और भ्रष्टाचार को लेकर भी देश में निराशा का माहौल था तथा भारत को दुनिया की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में गिना जा रहा था। इसके विपरीत मौजूदा आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हाल ही में 7.8 प्रतिशत की तिमाही विकास दर सामने आई है, जिसने देश का उत्साह बढ़ाया है। उन्होंने बिजली उत्पादन, वाहनों की बिक्री, स्टील और सीमेंट की खपत में बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आंकड़े देश में बढ़ती आर्थिक गतिविधियों की ओर संकेत करते हैं। प्रधानमंत्री ने जनधन योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले देश के बड़ी संख्या में लोग बैंकिंग व्यवस्था से बाहर थे। उन्होंने दावा किया कि बीते 12 वर्षों में 60 करोड़ नए बैंक खाते खोले गए और इससे देश का लगभग हर परिवार बैंकिंग प्रणाली से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन ने भारत में फिनटेक क्रांति के लिए मजबूत आधार तैयार किया। पीएम ने ‘माई-बाप’ संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य नागरिकों को व्यवस्था के सामने निर्भर बनाए रखना नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाना है। पीएम मोदी ने 2013 के अपने भाषण में ‘मेड इन इंडिया’ की चर्चा को याद करते हुए कहा कि उस समय कुछ लोगों को यह विचार अव्यावहारिक लगता था। उन्होंने कहा कि आज भारत का रक्षा उत्पादन नए स्तर पर पहुंच चुका है और देश रक्षा उत्पादों का निर्यात भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए और भारतीय कंपनियों को देश में ही उपकरण बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। प्रधानमंत्री ने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव बताया।
‘नाराज फूफाओं’ का जिक्र कर विरोधियों पर निशाना
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में उन लोगों पर भी तंज कसा, जो नई योजनाओं और परियोजनाओं पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को ‘नाराज फूफा’ बताते हुए कहा कि उनका काम हर नए प्रयास पर यह पूछना होता है कि इसकी क्या जरूरत है। उन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, मेट्रो, यूपीआई, सेमीकंडक्टर चिप, नई संसद भवन और नेशनल वॉर मेमोरियल जैसी परियोजनाओं का उदाहरण दिया। पीएम ने कहा कि इन परियोजनाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए, लेकिन देश ने ऐसे लोगों को जवाब दिया और जो काम राष्ट्रहित में जरूरी है, उसे पूरा करने से भारत को अब कोई रोक नहीं सकता। प्रधानमंत्री ने एसआरसीसी के छात्रों से कहा कि देश को युवाओं पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि भारत आने वाले समय में मैन्युफैक्चरिंग के साथ रिसर्च और इनोवेशन का बड़ा केंद्र बनेगा। कृषि निर्यात, अंतरिक्ष और खेल के क्षेत्र में भी भारत बड़ी उपलब्धियां हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है। पीएम ने छात्रों से सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने और समाज की शक्ति को राष्ट्र की शक्ति में बदलने का आह्वान किया।