Oct 12, 2026 Login
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उत्तराखंड/नैनीताल:

Jagte Raho - A Story of Villages"! This short film tells the story of every village, every forest and human wildlife struggle in Uttarakhand!

मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं पहाड़ों पर आए दिन देखने को मिलती है। इन घटनाओं से निबटने के लिए वन विभाग अब तक कोई ठोस नीति नही बना पाया। हालांकि उत्तराखंड वन विभाग ने जंगलों में ब्रीडिंग फार्मूला अपनाने की योजना तो बनाई लेकिन उस पर तरीके से अमल नही हो पाया। ग्रामीणों और वन्य जीवों के बीच संघर्ष की ऐसी ही एक शार्ट फ़िल्म नैनीताल के कलाकारों द्वारा बनाई गई है।

जंगल  जानवर और मानव संघर्ष पर नैनीताल फिल्म्स प्रोडक्शन के बैनर तले एक शार्ट फ़िल्म बनाई गई है जिसका नाम है "जागते रहो-ए स्टोरी ऑफ विलेजेस"। 30 मिनट की ये फ़िल्म आपको पहाड़ों के गांवों की असली तस्वीर से रूबरू करवाती है । फ़िल्म की शूटिंग नैनीताल के समीप खुर्पाताल में मात्र तीन दिन की कड़ी मेहनत में पूरी की गई। फ़िल्म नैनीताल के जाने माने फोटोग्राफर अमित साह द्वारा प्रोड्यूस की गई है। फ़िल्म के सह निर्देशक खुर्शीद हुसैन है और कहानी की परिकल्पना दिलावर सिराज की है। फ़िल्म की शुरुआत ही जंगल से होती है जहाँ अचानक एक बाघ घास काट रही महिला पर हमला बोल देता है। गांव वालों की चिंता और परेशानी हर रोज बढ़ती ही जाती है। गांव के मुखिया के पास जब ये मामला रखा जाता है तब तय होता है कि जब तक जिला प्रशासन,वन विभाग बाघ को नही पकड़ लेता तब तक गांव में रात को कौन पहरा देगा? सभी को अपनी जान प्यारी होती है इसीलिए हर कोई अपना नाम आने पर कोई न कोई बहाना बनाकर रात के पहरे से अपना पल्ला झाड़ लेता है। तब एक नाम सुझाया जाता है जो सेना से सेवानिवृत्त होता है। ये कौन है जो रात को अपनी जान जोखिम में डालकर पूरे गांव की रक्षा करने आगे आता है? क्या उसे अपनी जान की परवाह नही? आखिर वो रात के पहरे के लिए क्यो हामी भरता है? बाघ का क्या होता है?  क्या गांव वालों की चिंता और डर दूर होता है? 30 मिनट की फ़िल्म "जागते रहो" में यही सब बड़ी ही सादगी के साथ दिखाया गया है। फ़िल्म में बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता निर्मल पांडे के भाई मिथिलेश पांडे ने भी जागते रहो फ़िल्म में अहम भूमिका निभाई है। इनके अलावा फिल्म में मुख्य भूमिका में मंजूर हुसैन और मुकेश धस्माना आपको पल भर के लिए भी स्क्रीन से अलग नही होने देंगे। बाल कलाकार शहजीन ने गजब का अभिनय किया है। वहीं गांव वालों की भूमिका में डीके शर्मा,नीरज डालाकोटी,फ़िल्म के निर्माता अमित साह, अनवर रज़ा, शबनी राणा,पवन कुमार,सह निर्देशक मोहम्मद खुर्शीद हुसैन, रविन्द्र रौतेला,टोनी मनोज साह,भूषण छाबड़ा,इत्यादि कलाकारों ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है। फ़िल्म के निर्देशक अजय वीर पवार ने न सिर्फ फ़िल्म का निर्देशन किया बल्कि फ़िल्म की एडिटिंग भी की है। पर्दे के पीछे अदिति खुराना,अमर गौतम और ड्रोन कैमरे से बेहतरीन दृश्यों को कैद करने वाले नितिन छाबड़ा का सहयोग रहा। संगीत दिलावर सिराज और उनके भाई नदीम सिराज का है।
"जागते रहो-ए स्टोरी ऑफ विलेजेस" शार्ट फ़िल्म एक ऐसी फिल्म है जो शायद उत्तराखंड के हर जिले के गांवों, जंगलों,और मानव वन्य जीव संघर्ष की कहानी बयां करती है। ये शार्ट फ़िल्म यूट्यूब पर आप देख सकते है इसके अलावा अमित साह के फेसबुक पेज पर भी आप देख सकते हैं।