ऊधम सिंह नगर में अवैध वसूली का खेलः 35-35 हजार रुपये महीना दो, नहीं तो डंपर सीज हो जाएगा! पूर्व भाजपा नेता विकास सागर पर फिर लगे गंभीर आरोप, सबूत लेकर पुलिस के पास पहुंचा शिकायतकर्ता
रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर जिले में कथित अवैध वसूली का एक मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है। गदरपुर निवासी डंपर संचालक वरीस अहमद ने रुद्रपुर के इंद्रा कॉलोनी निवासी विकास सागर पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की है। शिकायत में दावा किया गया है कि पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई का भय दिखाकर पिछले तीन वर्षों से नियमित रूप से धनराशि वसूली जाती रही। प्रभारी निरीक्षक को दिए गए शिकायती पत्र में वरीस अहमद ने बताया कि वह अपने दस टायरा डंपर से स्टोन क्रशरों से रेता-बजरी और अन्य निर्माण सामग्री ढोने का कार्य करता है। उसके अनुसार उसके वाहन संख्या यूके 04 सीए 9515 के सभी दस्तावेज वैध और पूर्ण हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि लगभग तीन वर्ष पहले उसकी मुलाकात विकास सागर से हुई थी। उस दौरान कथित तौर पर विकास सागर ने कहा कि यदि डंपर सड़कों पर चलेगा तो पुलिस और प्रशासन बार-बार चालान और कार्रवाई कर परेशान करेंगे। आरोप है कि उसने यह भी कहा कि यदि हर महीने 35 हजार रुपये दिए जाएं तो बाजपुर, किलाखेड़ा, गदरपुर, रुद्रपुर, गूलरभोज से लेकर किच्छा-पुलभट्टा क्षेत्र तक वाहन को किसी प्रकार की प्रशासनिक परेशानी नहीं होगी। शिकायत के अनुसार विकास सागर ने कथित रूप से यह भरोसा भी दिलाया कि यदि किसी कारण वाहन का चालान हो भी जाए तो वह उसे बिना अतिरिक्त खर्च के छुड़वा देगा।
दो वाहनों से हर महीने ली जाती थी रकम
वरीस अहमद ने आरोप लगाया कि केवल उसके वाहन ही नहीं बल्कि उसके भाई फहीम के वाहन संख्या यूके 06 सीए 5619 के नाम पर भी रकम ली जाती रही। शिकायतकर्ता के मुताबिक दोनों वाहनों के लिए अलग-अलग 35-35 हजार रुपये प्रति माह दिए जाते थे। उसने दावा किया कि पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई के डर से वह लंबे समय तक गूगल पे और फोन पे जैसे डिजिटल माध्यमों से रकम भेजता रहा। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह भुगतान लगातार कई महीनों और वर्षों तक चलता रहा। शिकायती पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि विकास सागर ने कई बार धमकी दी कि यदि निर्धारित रकम नहीं दी गई तो पुलिस और प्रशासन के माध्यम से दोनों वाहनों को सीज करा दिया जाएगा। शिकायतकर्ता का कहना है कि इसी भय के कारण वह नियमित भुगतान करता रहा।
49 हजार के चालान के बाद बिगड़ा मामला
मामले में नया मोड़ तब आया जब 13 अप्रैल 2026 को दिनेशपुर पुलिस ने उसके भाई के वाहन का चालान करते हुए 49 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। शिकायतकर्ता के अनुसार उसने इस संबंध में विकास सागर से बात की और पूछा कि जब संरक्षण का दावा किया गया था तो फिर कार्रवाई कैसे हुई। आरोप है कि इसके बाद विकास सागर ने चालान निपटाने के लिए अतिरिक्त धनराशि की मांग की। जब उसने पैसा देने से इनकार कर दिया तो कथित तौर पर फिर से मासिक वसूली का दबाव बनाया जाने लगा। वरीस अहमद ने आरोप लगाया है कि पैसे देने से मना करने के बाद उसे फोन पर गाली-गलौच की गई और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। उसने दावा किया है कि बातचीत की रिकॉर्डिंग उसके पास मौजूद है, जिसे वह जांच एजेंसियों को उपलब्ध करा सकता है। इसके अलावा डिजिटल भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड भी उसके पास हैं।
पूर्व भाजपा पदाधिकारी का नाम आने से बढ़ी चर्चा
मामले को लेकर चर्चा इसलिए भी तेज हो गई है क्योंकि विकास सागर पूर्व में भाजपा अनुसूचित मोर्चा के जिला महामंत्री पद पर रह चुके हैं। जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले उन पर अवैध वसूली के आरोप लगने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि वर्तमान मामले में आरोपों की सत्यता की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। पीड़ित ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों, कथित डिजिटल लेनदेन, फोन रिकॉर्डिंग और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।