उत्तराखंड के सरकारी प्राथमिक स्कूलों की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त! सरकार से मांगा ताजा शपथपत्र
नैनीताल। उत्तराखंड के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की बदहाल स्थिति को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सरकार की ओर से पहले दाखिल किए गए जवाबी हलफनामे में कहा गया था कि शिक्षकों की कमी दूर करने, जर्जर भवनों के लिए फंड उपलब्ध कराने तथा पेयजल व्यवस्था सुधारने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। हालांकि याचिकाकर्ता का कहना है कि यह स्थिति करीब दो वर्ष पुरानी है और आज भी जमीनी स्तर पर हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। इस पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार को वर्तमान स्थिति स्पष्ट करते हुए नया शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि वर्तमान में विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की क्या स्थिति है, जर्जर स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण या मरम्मत के लिए कितना फंड जारी किया गया है तथा जिन विद्यालयों में पेयजल की सुविधा नहीं है, वहां यह व्यवस्था कब तक सुनिश्चित की जाएगी। इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत शपथपत्र न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले में अगली सुनवाई की तिथि 3 सप्ताह बाद की नियत की गई है। बता दें कि पिथौरागढ़ निवासी राजेश पांडे द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि राज्य के लगभग ढाई हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां केवल एक ही शिक्षक के भरोसे पढ़ाई संचालित हो रही है। वहीं कई विद्यालयों की इमारतें इतनी जर्जर हो चुकी हैं कि विशेषकर बरसात के मौसम में उनके कभी भी गिरने का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा 270 से अधिक विद्यालय ऐसे हैं, जहां आज भी पेयजल की सुविधा उपलब्ध नहीं है।