हरिद्वार का 'कौशल्या ब्लाइंड मर्डर केस' बेपर्दा: शादी का दबाव बना रही प्रेमिका को रास्ते से हटाया; यूपी के बांदा से प्रेमी, उसका भाई और जीजा गिरफ्तार

Haridwar's 'Kaushalya blind murder case' solved: Girlfriend pressuring for marriage eliminated; lover, his brother, and brother-in-law arrested from Banda, UP.

धर्मनगरी हरिद्वार को झकझोर कर रख देने वाले 'कौशल्या ब्लाइंड मर्डर केस' का हरिद्वार पुलिस ने 25 दिनों की रोंगटे खड़े कर देने वाली तफ्तीश के बाद सनसनीखेज खुलासा कर दिया है। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड (बांदा) से हरिद्वार आकर इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी (प्रेमी) समेत तीन सगे रिश्तेदारों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कातिलों ने बेहद शातिराना ढंग से पहचान छिपाने और पुलिस को गुमराह करने के लिए महिला की हत्या कर उसकी लाश को नग्न अवस्था में जंगल में छोड़ दिया था, ताकि कीड़े-मकोड़े उसका चेहरा खा जाएं और उसकी पहचान कभी न हो सके। लेकिन कातिलों का यह 'परफेक्ट मर्डर' का प्लान हरिद्वार पुलिस की हाइटेक जांच के आगे पूरी तरह ध्वस्त हो गया। मामले का खुलासा करते हुए हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि बीती 10 मई को श्यामपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत चंडी देवी मंदिर रोपवे के पास टूटे हुए पैदल रास्ते के पास जंगल में एक अज्ञात महिला का नग्न शव बरामद हुआ था। शव मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया। श्यामपुर पुलिस और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स ने मौके पर पहुंचकर बारीकी से साक्ष्य जुटाए।

घटनास्थल से पुलिस को दो कुंडल, एक टूटा हुआ मंगलसूत्र, सफेद रंग का गमछा और महिला के गले में कसकर लिपटा एक ब्लाउज मिला। साफ था कि इसी ब्लाउज से गला घोंटकर उसकी जान ली गई थी। चिलचिलाती गर्मी और कीड़े-मकोड़ों की वजह से महिला का चेहरा इस कदर सड़ चुका था कि पहली नजर में शिनाख्त नामुमकिन थी। शव की शिनाख्त न होने के कारण शुरुआती 72 घंटे बाद पुलिस ने नियमानुसार सम्मानजनक तरीके से शव का दाह संस्कार कर दिया और चंडीघाट चौकी प्रभारी संतोष सेमवाल की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। एसएसपी ने इस पेचीदा केस को सुलझाने के लिए दो बड़े टास्क दिए थे पहला महिला की पहचान और दूसरा कातिलों की धरपकड़। इस विधिक और तकनीकी जिम्मेदारी के लिए सीआईयू हरिद्वार और सुपरविजन के लिए एसपी क्राइम निशा यादव को मैदान में उतारा गया। जांच के शुरुआती दौर में आंधी-तूफान के कारण घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी कैमरे क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिससे वारदात की सही तारीख का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा था। लेकिन पुलिस ने हिम्मत नहीं हारी और घटनास्थल से 5 किलोमीटर की परिधि में आने वाले सभी होटलों, धर्मशालाओं, होमस्टे और चौकियों के 1 से 10 मई तक के 600 घंटे के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। इसी बीच मृतका के हाथों पर बने टैटू दाहिने हाथ पर अंग्रेजी में 'कौशल्या' व एक गमला और बाएं हाथ पर दिल के आकार में 'K R' व बाहर 'R' और 'ॐ' का निशान पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग साबित हुए। सोशल मीडिया और एनसीआरबी (NCRB) के जरिए साल 2019 से लापता 1,664 'कौशल्या' नाम की महिलाओं की सूची खंगाली गई। इसके साथ ही मोबाइल टावरों से 144 घंटों का डंप डेटा निकालकर 1,64,605 मोबाइल नंबरों की सूची बनाई गई और ट्रू-कॉलर के माध्यम से उनके नाम वेरिफाई किए गए।

कड़ी वैज्ञानिक जांच के बीच पुलिस को 8 मई की रात की एक सीमित फुटेज मिली, जिसमें तीन संदिग्ध पुरुष एक महिला को लेकर चंडी देवी मंदिर के रास्ते की तरफ बढ़ते दिखे। कुछ घंटों बाद जब वे पुरुष वापस लौटे, तो उनके साथ वह महिला नहीं थी। रूट चार्ट और संदिग्ध मोबाइल नंबरों के मिलान (क्रॉस-वेरिफिकेशन) से पुलिस सीधे उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में बैठे तीन आरोपियों तक पहुंच गई। पुलिस ने जाल बिछाकर बांदा से तीनों संदिग्धों को दबोच लिया। सख्ती से पूछताछ में उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर कौशल्या मर्डर केस की पूरी स्क्रिप्ट उगल दी। पूछताछ में सामने आया कि मृतका उत्तर प्रदेश के बांदा की रहने वाली कौशल्या (पत्नी पप्पू) थी। आरोपी रामप्रकाश उर्फ गोविंदा के साथ उसके लंबे समय से प्रेम संबंध थे। कौशल्या पहले से शादीशुदा थी, लेकिन वह लगातार अपने कुंवारे प्रेमी रामप्रकाश पर शादी करने का दबाव बना रही थी। शादी के इस लगातार बढ़ते दबाव और रोज-रोज के क्लेश से तंग आकर रामप्रकाश ने कौशल्या को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची। इस साजिश में रामप्रकाश ने अपने सगे बड़े भाई राकेश और अपने सगे जीजा छेदीलाल को भी शामिल किया। आरोपियों ने सोचा कि अगर वे बांदा या आसपास हत्या करेंगे तो तुरंत पकड़े जाएंगे। इसलिए उन्होंने जानबूझकर अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर धार्मिक नगरी हरिद्वार को चुना। वे कौशल्या को 'चंडी देवी मंदिर' के दर्शन कराने के बहाने बहला-फुसलाकर हरिद्वार लाए। 8 मई की रात को वे उसे श्यामपुर के घने जंगलों में ले गए, जहां तीनों ने मिलकर कौशल्या का गला घोंट दिया। पहचान मिटाने के लिए उसके कपड़े, गहने उतार दिए और लाश को कीड़े-मकोड़ों के बीच छोड़ दिया ताकि चेहरा गल जाए।