महा-गठबंधन: भारत-अमेरिका परमाणु ऊर्जा सहयोग में होगा 'बड़ा धमाका', अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का बड़ा संकेत

Grand Alliance: 'Major Breakthrough' Ahead in India-US Nuclear Energy Cooperation—US Ambassador Sergio Gor Drops a Big Hint

मुंबई। भारत और अमेरिका के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में दोनों महाशक्तियां अब तक के सबसे बड़े सहयोग की ओर कदम बढ़ा रही हैं। भारत में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने बुधवार को साफ संकेत दिया कि आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच बहुत बड़ी चीजें होने वाली हैं। यह बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी अमेरिकी राजदूत ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक सोशल मीडिया पोस्ट का जवाब देते हुए की। दरअसल, 'यूएस न्यूक्लियर एग्जीक्यूटिव मिशन टू इंडिया' के तहत 'न्यूक्लियर एनर्जी इंस्टीट्यूट' और 'यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम' का एक उच्च स्तरीय कार्यकारी प्रतिनिधिमंडल भारत दौरे पर है, जिसने मुंबई में मुख्यमंत्री फडणवीस के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक के तुरंत बाद दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा को लेकर रणनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई इस महा-बैठक के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र लंबे समय से सौर और पवन ऊर्जा जैसे पारंपरिक नवीकरणीय स्रोतों में भारी निवेश कर रहा है। लेकिन, कार्बन-मुक्त भविष्य और औद्योगिक स्तर पर बिना किसी रुकावट के 24 घंटे निरंतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अब 'परमाणु ऊर्जा' एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है।

मुख्यमंत्री ने अमेरिकी कंपनियों को आमंत्रित करते हुए एलान किया कि महाराष्ट्र परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करने और इस बड़े बदलाव का अग्रणी केंद्र बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। फडनवीस ने स्पष्ट किया कि इन सेक्टर्स के अभूतपूर्व विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में बिजली की मांग कई गुना बढ़ जाएगी। अगले कुछ दशकों में भारत में ऊर्जा की मांग रॉकेट की रफ्तार से बढ़ेगी और महाराष्ट्र इसका सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र होगा। इस भविष्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ परमाणु ऊर्जा ही बनेगी। मुंबई में परमाणु ऊर्जा पर मचे इस मंथन के बीच, राजधानी नई दिल्ली में भी एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक हुई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मुलाकात की। इस बैठक में भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और वित्तीय रिश्तों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने पर गहन चर्चा हुई। केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं ने फिनटेक (Fintech) सेक्टर, निवेश के नए अवसरों और आपसी सहयोग को बढ़ाने पर विस्तृत बातचीत की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश डिजिटल फाइनेंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लगातार एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। इस दौरान वित्त मंत्री ने अमेरिका के आगामी 250वें स्वतंत्रता दिवस के लिए राजदूत को अग्रिम बधाई भी दी। इस बीच, अमेरिकी दूतावास द्वारा साझा किए गए एक विशेष वीडियो में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोनों देशों के प्रगाढ़ होते संबंधों पर गहरी खुशी जताई। रुबियो ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि अमेरिका अपनी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ अपने सबसे मजबूत भारतीय भागीदारों के साथ मनाना चाहता है। उन्होंने दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों को रेखांकित करते हुए कहा, "भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और हम सबसे पुराने हैं। इसलिए हम साथ मिलकर इस ऐतिहासिक अवसर का जश्न मनाने के लिए उत्सुक हैं। राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में सीआईआई समिट में यह साफ कर दिया था कि नया डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन भारत के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार की बाधाओं को कम करने और भारतीय कंपनियों को अमेरिका में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही। अमेरिकी राजदूत के अनुसार, भारतीय कंपनियां अमेरिका में टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्युटिकल्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों में 20.5 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश करने की योजना बना रही हैं। व्यापार के ये बढ़ते अवसर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे और रणनीतिक आर्थिक संबंधों को एक ऐसे शिखर पर ले जाएंगे, जहाँ से वैश्विक मंच पर दोनों देशों का दबदबा और मजबूत होगा।