Good Morning India: चमोली टनल हादसे का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी,अब तक नौ मजदूरों की मौत,आज जाएंगे सीएम धामी,उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट, देहरादून समेत पांच जिलों में होगी तेज बरसात,पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार,2029 तक खींच सकते हैं जंग,लिंक में पढ़ें प्रमुख खबरें
नमस्कार दोस्तों, आवाज इंडिया अपना खास कॉलम 'गुड मॉर्निंग इंडिया' लेकर एकबार फिर आपके समक्ष हाजिर है। आईए शुरुआत करते हैं उन सुर्खियों के साथ,जो आज पूरे दिन चर्चा में रहने वाली हैं।
व्हाइट हाउस में नए 'चेहरे' की तलाश: कैरोलिन लेविट के इस्तीफे के बाद कौन बनेगा ट्रंप की 'आवाज'?
'2029 तक खींच सकते हैं जंग': आईआरजीसी जनरल की अमेरिका को खुली चुनौती, पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार।
बांग्लादेश में छाया भीषण अंधेरा: 10 घंटे तक पावर कट और हिंसक उपद्रव, भारत बना 'संकटमोचक'।
शीर्ष वार्ता से पहले सीमा पर चीन का पैंतरा: एलएसी पर तनाव आकस्मिक नहीं, दबाव बनाने की सोची-समझी कूटनीति।
झारखंड अगस्त क्रांति: सीसीटीवी फुटेज से पहचाने जा रहे उपद्रवी, विधानसभा घेराव मामले में 300 युवाओं पर एफआईआर।
10 साल बाद बदला इंस्टाग्राम का लुक, नया वर्डमार्क लॉन्च, एस और आर को लेकर यूजर्स ने उठाए सवाल।
केंद्र की सियासत में बड़े उलटफेर की आहट! एनडीए में डीएमके की एंट्री, कैबिनेट विस्तार पर भी मंथन।
खाद्य पदार्थों में मिलावट का खेल: यूपी देश में नंबर वन, मप्र में हर 56वां सैंपल फेल,डोमिनोज के 4 आउटलेट भी सस्पेंड।
दूध-मावा-पनीर से मिठाई तक सवालों के घेरे में गुणवत्ता, खाद्य मिलावट में यूपी सबसे आगे,देशभर में 34 हजार से ज्यादा नमूने फेल।
स्पैम कॉल का आतंक: शिकायतों में रिकॉर्ड उछाल, 82% मामले अनरजिस्टर्ड टेलीमार्केटर्स के; सरकार ने कसा शिकंजा।
मौसम का महाअलर्ट: उत्तराखंड में ऑरेंज अलर्ट, दिल्ली-यूपी समेत 15 राज्यों में आंधी और भारी बारिश की चेतावनी!
चमोली टनल हादसे का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, अब तक नौ मजदूरों की मौत,सुरंग में गले तक भरा मलबा और पानी।
उत्तराखंड एसआईआर: अगर आपके वोट पर आपत्ति का नोटिस आए तो हल्के में न लें, लापरवाही पड़ सकती है भारी।
चमोली टनल हादसा: एक्शन में सीएम धामी, देर रात पहुंचे आपदा कंट्रोल रूम,रेस्क्यू में तेजी लाने के निर्देश।
रक्षाबंधन पर उत्तराखंड की बहनों को बड़ा तोहफा: सरकारी बसों में 2 दिन या उससे अधिक मिल सकती है फ्री यात्रा!
उत्तराखंड में ट्रैफिक नियमों में बड़ा बदलाव: पहली भूल पर केवल चेतावनी, दूसरी बार लगेगा जुर्माना,लागू होगा जन विश्वास बिल।
हेडलाइंस के बाद आइए अब रुख करते हैं आज की बड़ी खबरों की तरफ-वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में जल्द ही बड़ा बदलाव होने जा रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट अगस्त के अंत में पद छोड़ने वाली हैं। महज 27 साल की उम्र में प्रेस सचिव बनकर इतिहास रचने वाली लेविट ने ट्रंप की नीतियों का आक्रामक अंदाज में बचाव किया और प्रशासन के प्रमुख चेहरों में अपनी जगह बनाई। उन्होंने पद छोड़ने की वजह अपने दो छोटे बच्चों के साथ अधिक समय बिताने की इच्छा बताई है। हालांकि, वह बाहरी संचार सलाहकार के तौर पर ट्रंप के साथ जुड़ी रहेंगी। लेविट के बाद अगला प्रेस सचिव कौन होगा, इसे लेकर व्हाइट हाउस में कई नामों पर चर्चा चल रही है। अलीना हब्बा प्रमुख दावेदारों में मानी जा रही हैं। ट्रंप की वकील रह चुकी हब्बा टेलीविजन पर भी राष्ट्रपति का मजबूती से बचाव करती रही हैं। उनका कानूनी और मीडिया अनुभव उन्हें मजबूत उम्मीदवार बनाता है। ब्राइटबार्ट के वॉशिंगटन ब्यूरो प्रमुख मैथ्यू बॉयल का नाम भी चर्चा में है। ट्रंप के साथ उनके पुराने संबंध और रूढ़िवादी राजनीति की गहरी समझ उनके पक्ष में जा सकती है। सीएनएन के ट्रंप समर्थक टिप्पणीकार स्कॉट जेनिंग्स भी संभावित विकल्प हैं। उन्हें व्हाइट हाउस और रिपब्लिकन राजनीति का पुराना अनुभव है। इसके अलावा संचार निदेशक स्टीवन च्यूंग, पूर्व उप चीफ ऑफ स्टाफ टेलर बुडोविच, प्रिंसिपल डिप्टी प्रेस सचिव अन्ना केली, कैटी मिलर, मोनिका क्राउली और कारी लेक के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि ट्रंप ने अभी किसी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप अपनी सरकार की आवाज किसे बनाते हैं।
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लेकर तनाव कम होने के बजाय नए बयान सामने आ रहे हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के वरिष्ठ जनरल मोहम्मद रजा नकदी ने दावा किया है कि तेहरान जरूरत पड़ने पर युद्ध को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल के अंत यानी 20 जनवरी 2029 तक खींच सकता है। उनके बयान को ट्रंप की ओर से दी गई चेतावनियों के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। नकदी ने कहा कि ईरान का लक्ष्य ऐसी स्थिति बनाना है, जिसमें दुश्मन उस पर हमला करने से पहले कई बार सोचे। उन्होंने संकेत दिया कि लंबे संघर्ष के जरिए अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचाना ईरान की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, यह बयान किसी आधिकारिक युद्धविराम या भविष्य की निश्चित रणनीति की घोषणा नहीं माना जा रहा है। इस बीच पश्चिम एशिया में गाजा संघर्ष को समाप्त करने की कोशिशें भी जारी हैं। ट्रंप के दामाद और वार्ताकार जेरेड कुश्नर के अगले सप्ताह इस्राइल और मिस्र जाने की संभावना है। उनके साथ निकोले म्लाडेनोव और टोनी ब्लेयर भी वार्ता में शामिल होंगे। काहिरा में गाजा के भविष्य और नियंत्रण को लेकर बातचीत प्रस्तावित है। हालांकि, गाजा शांति योजना पर इस्राइल और हमास के बीच मतभेद बने हुए हैं। हमास के निरस्त्रीकरण और इस्राइली सेना की वापसी को लेकर दोनों पक्षों के रुख अलग हैं। उधर, अमेरिकी सैन्य नुकसान को लेकर भी रिपोर्ट सामने आई है। वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, ईरान संघर्ष के दौरान अमेरिका ने कम से कम 45 MQ-9 रीपर ड्रोन खोए हैं। इनमें कुछ ड्रोन संचार संपर्क टूटने के कारण दुर्घटनाग्रस्त हुए, जबकि कुछ अन्य कारणों से नष्ट हुए।
ढाका। बांग्लादेश में बिजली और ईंधन का संकट लगातार गहराता जा रहा है। देश के कई ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में रोजाना कई घंटे बिजली कटौती हो रही है। ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सरकार ने व्यावसायिक गतिविधियों पर भी समय की पाबंदी लगा दी है। शॉपिंग मॉल, बाजार और दुकानें अब रात 8 बजे तक बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच बांग्लादेश ने आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत से अतिरिक्त डीजल की मांग की है। बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, देश में बिजली की मांग करीब 18,000 मेगावाट है, जबकि उपलब्ध आपूर्ति लगभग 13,000 मेगावाट के आसपास है। यानी करीब 5,000 मेगावाट का बड़ा अंतर बना हुआ है। ढाका के बाहर कई इलाकों में 8 से 10 घंटे तक लोड शेडिंग की शिकायतें सामने आ रही हैं। लगातार बिजली कटौती से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। कुछ इलाकों में बिजली कार्यालयों और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं। कर्मचारियों ने सुरक्षा की मांग की है। संकट का असर बांग्लादेश के गारमेंट और झींगा उद्योग पर भी पड़ रहा है। बिजली की कमी के कारण कारखानों का उत्पादन प्रभावित है और झींगा पालन में एरेटर बंद होने से नुकसान की आशंका बढ़ गई है। ऊर्जा संकट के बीच बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद ने भारत से अतिरिक्त डीजल आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया है। दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद क्रॉस-बॉर्डर पाइपलाइन के जरिये डीजल आपूर्ति की जा रही है। ढाका को उम्मीद है कि भारत से अतिरिक्त ईंधन मिलने पर तत्काल ऊर्जा संकट को कुछ हद तक संभाला जा सकेगा।
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच शीर्ष स्तर की बातचीत और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले अरुणाचल प्रदेश के ताक्सिंग सेक्टर में सीमा पर हलचल ने रणनीतिक हलकों की चिंता बढ़ा दी है। ब्रिक्स सम्मेलन के लिए जिनपिंग के भारत आने की चर्चा के बीच सीमा पर तनाव को महज संयोग नहीं, बल्कि चीन की पुरानी दबाव आधारित कूटनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बीजिंग कई मौकों पर उच्चस्तरीय वार्ता से पहले सीमा पर सैन्य दबाव बढ़ाकर बातचीत की मेज पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करता रहा है। एक तरफ राजनयिक स्तर पर संवाद जारी रहता है, तो दूसरी ओर सीमा पर गतिविधियों के जरिये भारत पर रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जाती है। इससे पहले 2017 के डोकलाम गतिरोध में भारत और चीन की सेनाएं करीब 73 दिनों तक आमने-सामने रहीं। गतिरोध खत्म होने के कुछ ही सप्ताह बाद ब्रिक्स सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। 2020 के पूर्वी लद्दाख संकट और गलवां हिंसा के बाद भी दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक बातचीत जारी रही। इसी तरह दिसंबर 2022 में तवांग सेक्टर में झड़प और बाद में बातचीत के जरिये तनाव कम करने का प्रयास हुआ। 2024 में देपसांग और डेमचोक में पेट्रोलिंग को लेकर समझौते के बाद भी दोनों नेताओं की ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मुलाकात हुई। ऐसे में ताक्सिंग की मौजूदा हलचल को भारत-चीन संबंधों के व्यापक रणनीतिक संदर्भ में देखा जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सीमा तनाव के बीच दोनों देश वार्ता और कूटनीति के जरिए किस तरह आगे बढ़ते हैं।
रांची। भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ झारखंड में जारी छात्र आंदोलन अब पुलिस कार्रवाई के दौर में पहुंच गया है। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव के दौरान हुए हंगामे को लेकर विधानसभा थाने में करीब 300 अज्ञात युवाओं के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस अब सीसीटीवी और अन्य वीडियो फुटेज के जरिए प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान कर रही है। रांची पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों पर हमला करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान 14 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था। प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट किया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा डालने और उपद्रव करने वालों की पहचान वीडियो फुटेज के आधार पर की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और लोगों के नाम मुकदमे में जोड़े जा सकते हैं। उधर, भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन 20वें दिन भी जारी रहा। अभ्यर्थी सीबीआई जांच और विवादित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जुटे छात्रों ने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन के बीच झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता देवेंद्र नाथ महतो के आमरण अनशन का मुद्दा भी गरमाया हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है। इससे पहले पुलिस करीब 100 नामजद और 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर चुकी है।
नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम ने करीब 10 साल बाद अपने टेक्स्ट-ओनली लोगो यानी वर्डमार्क को नया रूप दिया है। कंपनी का कहना है कि नया डिजाइन ज्यादा साफ, आधुनिक और इंस्टाग्राम की व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की पहचान को दर्शाता है। इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए नए वर्डमार्क की जानकारी साझा की। मोसेरी के मुताबिक, ऐप के शीर्ष पर इस्तेमाल होने वाले वर्डमार्क में लंबे समय से बदलाव नहीं किया गया था, इसलिए इसे नया रूप देने का समय आ गया था। नए डिजाइन को तैयार करने के लिए टीम ने सैकड़ों विकल्पों पर विचार किया। इनमें ऑल-कैप्स से लेकर हस्तलिखित डिजाइन तक शामिल थे। आखिरकार टीम ने स्क्रिप्ट फॉन्ट को चुना, जिसमें तरल और प्रवाहपूर्ण स्ट्रोक नजर आता है। इंस्टाग्राम की प्रोडक्ट डिजाइन निदेशक जैस्मीन प्रोब्स्ट ने बताया कि स्क्रिप्ट व्यक्तिगत पहचान और आवाज को दर्शाती है, जो इंस्टाग्राम की मूल भावना से जुड़ी है। नया वर्डमार्क पुराने डिजाइन की पहचान को बनाए रखते हुए ज्यादा बोल्ड और सरल बनाया गया है। हालांकि, नए लोगो को लेकर यूजर्स की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। कुछ लोगों ने इसे आधुनिक, साफ और आकर्षक बताया, जबकि कुछ ने इसकी पठनीयता पर सवाल उठाए हैं। खासकर ‘एस ’ और ‘आर’ के नए डिजाइन को लेकर यूजर्स ने भ्रम की शिकायत की। कुछ लोगों का कहना है कि नया वर्डमार्क देखने में अच्छा जरूर है, लेकिन पढ़ना पहले की तुलना में मुश्किल हो गया है। कंपनी ने नए डिजाइन के जरिए इंस्टाग्राम की पुरानी पहचान को बरकरार रखते हुए उसे आधुनिक डिजिटल दौर के अनुरूप ढालने की कोशिश की है।
नई दिल्ली। केंद्र की राजनीति में बड़े सियासी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का कुनबा जल्द और बड़ा हो सकता है। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रमुक को गठबंधन में शामिल करने और उसे केंद्र में प्रतिनिधित्व देने को लेकर बातचीत अंतिम दौर में पहुंचने की चर्चा है। इसी के साथ शरद पवार की एनसीपी के भी एनडीए के साथ आने के संकेत बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, द्रमुक केंद्र सरकार में दो मंत्री पद चाहती है। दोनों सदनों में पार्टी के करीब 30 सांसद हैं। वहीं एनसीपी की ओर से सुप्रिया सुले को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। संभावित मंत्रिमंडल विस्तार इसी महीने के अंत तक होने की अटकलें हैं। भाजपा की इस कवायद को आगामी राजनीतिक समीकरणों और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन को आगे बढ़ाने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की दिशा में भी सरकार की कोशिशों के बीच नए सहयोगियों का महत्व बढ़ सकता है। द्रमुक के लोकसभा अध्यक्ष की ओर से आयोजित चाय पार्टी में शामिल होने को भी बदलते सियासी समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। संसद के अंतिम दिन कांग्रेस ने इस आयोजन का बहिष्कार किया था, जबकि द्रमुक सांसद कनिमोझी इसमें शामिल हुई थीं। उधर, परिसीमन के मुद्दे पर हालिया टीवीके बैठक में द्रमुक सांसदों की गैरमौजूदगी और सुप्रिया सुले के उस बयान ने भी चर्चा तेज कर दी है, जिसमें उन्होंने सीटों में 50 फीसदी बढ़ोतरी की स्थिति में परिसीमन का समर्थन करने की बात कही थी। हालांकि, द्रमुक और एनसीपी की एनडीए में औपचारिक एंट्री को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अगर यह समीकरण बनता है तो विपक्षी खेमे के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।
नई दिल्ली। अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने जेन जी प्रदर्शन को लेकर एक बार फिर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में जेन जी युवाओं की संख्या अपेक्षाकृत कम थी। कंगना ने सवाल उठाया कि जब प्रदर्शन में अलग-अलग आयु वर्ग के लोग शामिल थे तो इसे केवल जेन जी प्रोटेस्ट कैसे कहा जा सकता है। कंगना ने कहा कि देश में जेन जी की आबादी करोड़ों में है, जबकि जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 10 हजार बताई गई। उनके मुताबिक, इनमें बड़ी संख्या अन्य आयु वर्ग के लोगों की थी। उन्होंने इसी संदर्भ में अभिनेत्री शबाना आजमी का भी नाम लेते हुए तंज किया। कंगना ने अपने पुराने ‘गटर जनरेशन’ वाले बयान पर सफाई देते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी पूरी पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि प्रदर्शन में शामिल एक खास भीड़ के संदर्भ में थी। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा कोई बयान दिखाया जाए जिसमें उन्होंने पूरी जेन जी पीढ़ी के बारे में यह टिप्पणी की हो। उन्होंने कहा, “मैं युवाओं के खिलाफ नहीं हूं, क्योंकि मैं भी उनमें से एक हूं।” कंगना ने आरोप लगाया कि उनके बयान को अलग संदर्भ में पेश कर उन पर अनावश्यक एजेंडा थोपा जा रहा है। इससे पहले कंगना ने जेन जी प्रदर्शनकारियों और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ जैसे शब्दों को लेकर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने ‘गटर जनरेशन’ शब्द के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा था कि उनकी टिप्पणी सभी युवाओं के लिए नहीं थी। राजनीति के साथ कंगना फिल्मों में भी सक्रिय हैं। वह हाल में ‘भारत भाग्य विधाता’ में नजर आईं और ‘क्वीन 2’ में भी काम कर रही हैं।
दिल्ली। देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट को लेकर तस्वीर चिंताजनक बनी हुई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में जांचे गए लाखों खाद्य नमूनों में हजारों तय गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। सबसे अधिक गैर-अनुपालन वाले मामले उत्तर प्रदेश में सामने आए हैं। दूध, पनीर, मावा और मिठाइयों जैसे रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता भी चिंता का विषय बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 में 6,47,408 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इनमें 34,388 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 22,516 नमूने यानी करीब 65.5 प्रतिशत गुणवत्ता मानकों से कम पाए गए, जबकि 7,945 नमूने असुरक्षित और 3,931 में लेबलिंग अथवा अन्य अनुपालन संबंधी खामियां मिलीं। मध्य प्रदेश में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। यहां करीब हर 56वां नमूना निर्धारित गुणवत्ता मानक पर खरा नहीं पाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, खराब गुणवत्ता वाला भोजन भी स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। दूषित भोजन से संक्रमण से लेकर गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है और बच्चों पर इसका प्रभाव अधिक पड़ सकता है। इसी बीच महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर डोमिनोज के कई आउटलेट्स के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। मुंबई और सतारा के कुछ प्रतिष्ठानों में खाद्य भंडारण, तापमान निगरानी, स्वच्छता, पेयजल और कीट नियंत्रण से जुड़ी कमियां मिलीं। अधिकारियों ने कच्चे-पके तथा शाकाहारी-मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग रखने और नियमित सफाई के निर्देश भी दिए हैं। खाद्य कारोबार में नियमों के पालन की निगरानी बढ़ाने के बावजूद आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना अभी बड़ी चुनौती है।
नई दिल्ली। मोबाइल फोन पर आने वाली अनचाही कॉल और मैसेज ने उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। संसद में गुरुवार को पेश आंकड़ों के मुताबिक, स्पैम कॉल और संदेशों के खिलाफ शिकायतों में पिछले कुछ वर्षों से लगातार बढ़ोतरी हो रही है। खास बात यह है कि 82 प्रतिशत से अधिक शिकायतें अनरजिस्टर्ड टेलीमार्केटर्स के खिलाफ दर्ज की गई हैं। टेलीकॉम राज्य मंत्री पेम्मसानी चंद्रशेखर ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि 2026 की पहली छमाही में 20.75 लाख से अधिक शिकायतें मिली हैं। यह संख्या 2025 में पूरे साल दर्ज हुई 31.09 लाख शिकायतों के दो-तिहाई से अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, 2021 में स्पैम कॉल और मैसेज को लेकर 12.84 लाख शिकायतें आई थीं। 2022 में यह संख्या घटकर 10.83 लाख रह गई, लेकिन 2023 में करीब 26 प्रतिशत बढ़कर 13.62 लाख पहुंच गई। इसके बाद 2025 में शिकायतों का आंकड़ा 31.09 लाख तक पहुंच गया। सरकार की ओर से कार्रवाई भी की जा रही है। अगस्त-दिसंबर 2024 के बीच अनचाही कॉल और एसएमएस से जुड़े 155 पंजीकृत संस्थानों को ब्लैकलिस्ट किया गया। 2025 में 995 और 2026 की पहली छमाही में 1,406 संस्थानों को ब्लैकलिस्ट किया गया। पंजीकृत टेलीमार्केटर्स पर भी कार्रवाई हुई है। 2024 के अंतिम पांच महीनों में 41, वर्ष 2025 में 12 और जून 2026 तक सात टेलीमार्केटर्स को ब्लैकलिस्ट किया गया। लगातार बढ़ते आंकड़े बताते हैं कि नियामकीय कार्रवाई के बावजूद स्पैम कॉल और मैसेज मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ी समस्या बने हुए हैं। खासकर अनरजिस्टर्ड टेलीमार्केटर्स पर प्रभावी नियंत्रण सरकार और दूरसंचार नियामकों के लिए बड़ी चुनौती है।
नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में शुक्रवार को मौसम का मिजाज बिगड़ने वाला है। मौसम विभाग ने 14 अगस्त को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत करीब 15 राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा भी मंडरा रहा है। उत्तराखंड में 14 से 17 अगस्त तक भारी से बहुत भारी बारिश का दौर रहने का अनुमान है। मौसम विभाग ने देहरादून, बागेश्वर और नैनीताल में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। लोगों और पर्यटकों को नदी-नालों और गदेरों के आसपास नहीं जाने की सलाह दी गई है। भूस्खलन संभावित मार्गों पर राहत और बचाव दलों को अलर्ट रखा गया है। पहाड़ी सड़कों पर मलबा आने से यातायात बाधित होने की आशंका भी है। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से कुछ प्रभावित इलाकों में स्कूलों में छुट्टी घोषित की है। मैदानी राज्यों में दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार के अलावा झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, पंजाब और छत्तीसगढ़ में भी भारी बारिश और तेज हवाओं की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि भी हो सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और खुले स्थानों पर सावधानी बरतने की सलाह दी है। भारी बारिश से जलभराव, ट्रैफिक जाम और पेड़ गिरने की घटनाएं परेशानी बढ़ा सकती हैं। हालांकि, बारिश से उमस और गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
आइए अब नज़र डालते हैं उत्तराखंड की ख़बरों पर-चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। हादसे में अब तक नौ श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जबकि छह अन्य मजदूरों की तलाश की जा रही है। सुरंग के भीतर पानी और भारी गाद भरने के कारण रेस्क्यू टीमों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हादसा गुरुवार शाम करीब पौने सात बजे हुआ। उस समय सुरंग के अंदर 25 से अधिक श्रमिक काम कर रहे थे। बताया गया कि करीब 1.8 किलोमीटर अंदर ग्रेविटी प्वाइंट पर पैकिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक तेज धमाके जैसी आवाज के साथ सुरंग के ऊपरी हिस्से से पानी और मलबा तेजी से अंदर भरने लगा। देखते ही देखते मजदूर इसकी चपेट में आ गए। घटना के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य बचाव दलों ने मोर्चा संभाला। हालांकि, सुरंग में पानी, दलदल और ऑक्सीजन की कमी के कारण रात में अभियान रोकना पड़ा। एनडीआरएफ के असिस्टेंट कमांडेंट आलोक जायरा ने बताया कि परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन अभियान जारी रहेगा और शुक्रवार सुबह फिर से रेस्क्यू शुरू किया गया। हादसे में घायल 12 श्रमिकों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है, जबकि एक घायल को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। अधिकांश प्रभावित मजदूर बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के बताए जा रहे हैं। 444 मेगावाट की विष्णुगाड़-पीपलकोटी परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। हादसे के बाद सुरंग की सुरक्षा और निर्माण कार्यों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल बचाव दलों की प्राथमिकता सुरंग में फंसे छह श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना है।
देहरादून। उत्तराखंड में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। ऐसे में जिन मतदाताओं के वोट पर आपत्ति दर्ज कराते हुए फॉर्म-10 का नोटिस जारी हुआ है, उन्हें इसे कतई हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जवाब नहीं देने या पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत न करने पर मतदाता सूची से नाम हटने का खतरा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से चलाए जा रहे एसआईआर के तहत प्रदेश की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं के नामों को लेकर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। इनमें बड़ी संख्या उन आपत्तियों की है, जिनमें दावा किया गया है कि संबंधित मतदाता अब दिए गए पते पर निवास नहीं करता। ऐसे मामलों में आपत्ति की सुनवाई के दौरान आपत्तिकर्ता को अपने दावे के समर्थन में प्रमाण देना होगा। वहीं, संबंधित मतदाता को भी निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी या सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के सामने यह साबित करना होगा कि वह उसी पते पर निवास करता है। मतदाताओं को सलाह दी गई है कि यदि बूथ लेवल ऑफिसर के माध्यम से फॉर्म-10 का नोटिस मिलता है तो उसकी तारीख और प्रक्रिया की जानकारी तुरंत हासिल करें। सुनवाई के दौरान अपने निवास से जुड़े विश्वसनीय दस्तावेज लेकर पहुंचें, ताकि दावे का ठोस जवाब दिया जा सके। आपत्ति पर सुनवाई के बाद यदि ईआरओ मतदाता के जवाब और प्रस्तुत प्रमाणों से संतुष्ट नहीं होते हैं तो नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। इसलिए एसआईआर के अंतिम चरण में मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे नोटिस को नजरअंदाज न करें और समय पर अपना पक्ष मजबूती से रखें। एक नोटिस की अनदेखी भारी पड़ सकती है वोट बचाने के लिए समय पर जवाब और सही दस्तावेज जरूरी हैं।
देहरादून। चमोली के पीपलकोटी में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में मलबा और पानी भरने की घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देर रात राहत और बचाव अभियान की कमान संभाल ली। मुख्यमंत्री अचानक आपदा परिचालन केंद्र पहुंचे और अधिकारियों से पल-पल की स्थिति की जानकारी लेते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने रेस्क्यू किए गए श्रमिकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने श्रमिकों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। घायलों के बेहतर उपचार के साथ उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए। आपदा परिचालन केंद्र से मुख्यमंत्री ने चमोली जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना समेत अन्य संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा। उन्होंने रेस्क्यू अभियान की प्रगति, टनल के भीतर की स्थिति और बचाव दलों के सामने आ रही चुनौतियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि टनल में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि बचाव अभियान में किसी भी स्तर पर लापरवाही या ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी एजेंसियां आपसी समन्वय के साथ पूरी ताकत से अभियान चलाएं। सीएम धामी ने कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और जब तक टनल में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल लिया जाता, राहत एवं बचाव अभियान पूरी गंभीरता के साथ जारी रहेगा। इस दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
देहरादून। रक्षाबंधन पर उत्तराखंड सरकार प्रदेश की बहनों को बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है। उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में महिलाओं को एक दिन के बजाय दो या उससे अधिक दिनों तक निश्शुल्क यात्रा की सुविधा देने पर शासन स्तर पर मंथन चल रहा है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद होने की उम्मीद है। वर्तमान में प्रदेश सरकार रक्षाबंधन के दिन महिलाओं को परिवहन निगम की बसों में राज्य की सीमा के भीतर मुफ्त यात्रा की सुविधा देती है। अब उत्तर प्रदेश में रक्षाबंधन के दौरान महिलाओं को चार दिन तक निश्शुल्क बस यात्रा की योजना को देखते हुए उत्तराखंड में भी इस सुविधा का दायरा बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। परिवहन निगम मुख्यालय की ओर से महिलाओं को निश्शुल्क यात्रा सुविधा देने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। निगम अधिकारियों का मानना है कि इससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाली बहनों को अपने मायके पहुंचने और भाइयों से राखी बांधने में सुविधा मिलेगी। परिवहन निगम के महाप्रबंधक संचालन क्रांति सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश में महिलाओं के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की व्यवस्था किए जाने की तैयारी है। वहां महिलाओं के साथ यात्रा करने वाले अन्य यात्रियों को भी इसका लाभ मिलने की संभावना है। इससे उत्तराखंड परिवहन निगम की आय प्रभावित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए निगम ने 15 अगस्त को मुख्यमंत्री की ओर से की जाने वाली घोषणाओं के लिए निश्शुल्क यात्रा का प्रस्ताव शासन को भेजा है। अब निगाहें सरकार के अंतिम फैसले पर हैं। अगर प्रस्ताव मंजूर होता है तो इस रक्षाबंधन पर उत्तराखंड की बहनों को एक दिन के बजाय दो या उससे अधिक दिनों तक सरकारी बसों में मुफ्त सफर की सौगात मिल सकती है।
देहरादून। उत्तराखंड में सड़क यातायात से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की व्यवस्था में 15 अगस्त से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। जन विश्वास अधिनियम के तहत कई सामान्य यातायात उल्लंघनों में पहली बार गलती करने पर सीधे जुर्माना लगाने के बजाय चेतावनी दी जाएगी। दोबारा नियम तोड़ने पर 500 से 1500 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। नई व्यवस्था के तहत ड्राइविंग लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद भी उसे 30 दिन तक वैध माना जाएगा। वाहन हस्तांतरण की सूचना देने की समय सीमा भी 14 दिन से बढ़ाकर 30 दिन कर दी गई है। हालांकि, गंभीर मामलों में कार्रवाई सख्त होगी। खतरनाक खराबी वाले वाहन को सड़क पर चलाने पर 5000 रुपये तक जुर्माना होगा। ऐसे वाहन से दुर्घटना में चोट या संपत्ति को नुकसान होने पर छह महीने तक कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। प्रदूषण और सड़क सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना और तीन महीने के लिए लाइसेंस से अयोग्य ठहराने का प्रावधान किया गया है। अनावश्यक या प्रतिबंधित क्षेत्र में हॉर्न बजाने पर पहली बार चेतावनी और बाद में 1000 से 2000 रुपये तक जुर्माना लगेगा। बिना बीमा वाहन चलाने पर भी जुर्माना बढ़ाया गया है। पहली बार तीन गुना बीमा आधार प्रीमियम या 5000 रुपये और दोबारा पांच गुना आधार प्रीमियम या 10 हजार रुपये, जो अधिक हो, वसूला जाएगा। बिना परमिट व्यावसायिक वाहन चलाने पर पहली बार 10 हजार और दोबारा 20 हजार रुप